अंतरिम गुजारा भत्ता निर्धारण चरण में पत्नी को कमाने वाली नहीं माना जा सकता: दिल्ली उच्च न्यायालय

अंतरिम गुजारा भत्ता निर्धारण चरण में पत्नी को कमाने वाली नहीं माना जा सकता: दिल्ली उच्च न्यायालय

अंतरिम गुजारा भत्ता निर्धारण चरण में पत्नी को कमाने वाली नहीं माना जा सकता: दिल्ली उच्च न्यायालय
Modified Date: January 8, 2026 / 05:47 pm IST
Published Date: January 8, 2026 5:47 pm IST

नयी दिल्ली, आठ जनवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि अंतरिम गुजारा भत्ते के निर्धारण के समय पत्नी को कमाने वाली या स्वयं का भरण-पोषण करने में सक्षम मान लेना उचित नहीं है।

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने यह टिप्पणी एक महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए की।

महिला ने याचिका में कुटुम्ब अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे प्रति माह 2,500 रुपये का अंतरिम गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया गया था। पति ने दावा किया कि याचिकाकर्ता नर्सरी शिक्षिका के रूप में काम करती है और वह कमा रही है। पति ने हालांकि इसका कोई दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।

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अदालत ने पाया कि महिला ने केवल 11वीं कक्षा तक ही पढ़ाई की है और पति के इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि बिना किसी सबूत के पति का यह दावा इस स्तर पर किसी काम का नहीं है।

अदालत ने पांच जनवरी को फैसले में कहा, “इसलिए इस अदालत का मानना ​​है कि अंतरिम गुराता भत्ता देते समय याचिकाकर्ता पत्नी को कमाने वाली या स्वयं का भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं माना जा सकता है।”

उच्च न्यायालय ने कहा, “बिना किसी सबूत के, यहां तक ​​कि प्रथम दृष्टया भी, केवल यह दावा करना कि पत्नी काम कर रही है और कमा रही है, इस स्तर पर प्रतिवादी-पति के लिए किसी काम का नहीं है।”

कुटुम्ब अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत महिला की याचिका पर मार्च 2024 में उसे अंतरिम गुजारा भत्ता के रूप में 2,500 रुपये प्रति माह देने का आदेश दिया था।

दोनों की निकाह जून 2021 में हुआ था और पत्नी का दावा है कि शादी के तुरंत बाद दहेज की मांग को लेकर उसके साथ क्रूरता की गई।

उसने बताया कि उसे 2022 में घर से निकाल दिया गया था।

महिला ने अंतरिम गुजारा भत्ता राशि बढ़ाने का अनुरोध करते हुए दलील दी कि उसका पति स्नातक है और एक निजी स्कूल में शिक्षक के रूप में कार्यरत है और उसकी मासिक आय लगभग 25,000 रुपये है।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि पति निजी ट्यूशन भी देता है और अतिरिक्त 15,000 रुपये प्रति माह कमाता है, साथ ही एक किराने की दुकान भी चलाता है, और उसे लगभग 30,000 रुपये किराये के तौर पर भी मिलते हैं।

महिला ने कहा कि 2,500 रुपये प्रति माह अपर्याप्त है।

उच्च न्यायालय ने कहा कि पति की आय का आकलन न्यूनतम मजदूरी के आधार पर किया जाना चाहिए, जो उसके लिए 13,200 रुपये थी और अंतरिम गुजारा भत्ता राशि को इसलिए बढ़ाया जाना चाहिए।

अदालत ने कहा, “यह सर्वविदित है कि प्रतिवादी (पति) उत्तर प्रदेश में रह रहा है और काम कर रहा है। उस समय उत्तर प्रदेश में स्नातक/कुशल श्रमिक के लिए लागू न्यूनतम मजदूरी लगभग 13,200 रुपये प्रति माह है। ”

अदालत ने पत्नी को दिए जाने वाले अंतरिम गुजारा भत्ता राशि को बढ़ाकर 3,500 रुपये प्रति माह कर दिया।

अदालत ने कहा, “प्रतिवादी की निर्धारित आय, पक्षों की स्थिति और इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि याचिकाकर्ता पत्नी की आय का कोई स्वतंत्र स्रोत नहीं है, अदालत का यह मत है कि कुटुंब अदालत द्वारा दिया गया अंतरिम गुजारा भत्ता अपर्याप्त है और इसमें वृद्धि की आवश्यकता है।”

अदालत ने पति को तीन महीने के भीतर भरण-पोषण की बकाया राशि का भुगतान करने का भी निर्देश दिया।

भाषा जितेंद्र प्रशांत

प्रशांत


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