पश्चिमी शैली के बजाय भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के अनुरूप मनाया जाए महिला दिवस: राष्ट्र सेविका समिति

पश्चिमी शैली के बजाय भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के अनुरूप मनाया जाए महिला दिवस: राष्ट्र सेविका समिति

पश्चिमी शैली के बजाय भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के अनुरूप मनाया जाए महिला दिवस: राष्ट्र सेविका समिति
Modified Date: February 28, 2026 / 07:46 pm IST
Published Date: February 28, 2026 7:46 pm IST

(कोमल शर्मा)

नयी दिल्ली, 28 फरवरी (भाषा) राष्ट्र सेविका समिति की महासचिव सीता गायत्री अन्नदानम ने शनिवार को कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के अनुरूप, सकारात्मक और रचनात्मक तरीके से मनाया जाना चाहिए।

यह पूछने पर कि लगभग 90 साल पुरानी संस्था आठ मार्च को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को किस नजरिए से देखती है, तो गायत्री ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि सामाजिक परिस्थितियां समय के साथ बदलती हैं और सामाजिक महत्व प्राप्त करने वाले अवसरों को सकारात्मक रूप से निर्देशित किया जाना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को अक्सर पश्चिमी अवधारणा बताया जाता है।

उन्होंने कहा, “जब कोई विशेष दिन सामाजिक रूप से गहरा प्रभाव डालने लगे, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय, हमें उसे रचनात्मकता की ओर ले जाना चाहिए।”

गायत्री ने एक जनवरी का उदाहरण देते हुए कहा कि परंपरागत रूप से इस दिन को इतना महत्व नहीं दिया जाता, फिर भी अब बड़ी संख्या में लोग इस दिन मंदिरों में दर्शन करने जाते हैं।

उन्होंने कहा, “इस वर्ष एक जनवरी को लगभग दो लाख श्रद्धालुओं ने भगवान राम के दर्शन किए, जो एक दिन में दर्ज की गई अब तक की सबसे अधिक संख्या है। इससे पता चलता है कि जब समाज किसी विशेष दिन को महत्व देता है, तो हम उसे अपने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ सकते हैं।”

गायत्री ने कहा कि आठ मार्च को देशभर की महिलाएं विभिन्न कार्यक्रमों के लिए एकत्रित होती हैं।

उन्होंने कहा, “अगर ऐसा मंच पहले से मौजूद है, तो हमें इसे छोड़ना नहीं चाहिए। हमारा प्रयास यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि ये अवसर केवल पश्चिमी शैली के नारीवाद का रुख नहीं करे, बल्कि हमारी अपनी सांस्कृतिक सोच, सामाजिक सद्भाव और भारतीय मूल्य प्रणाली को भी प्रतिबिंबित करें।”

भाषा जितेंद्र पवनेश

पवनेश


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