महिला आरक्षण विधेयक: नागरिक संस्थाओं ने पारदर्शिता को लेकर चिंता जताई

महिला आरक्षण विधेयक: नागरिक संस्थाओं ने पारदर्शिता को लेकर चिंता जताई

महिला आरक्षण विधेयक: नागरिक संस्थाओं ने पारदर्शिता को लेकर चिंता जताई
Modified Date: April 13, 2026 / 10:27 pm IST
Published Date: April 13, 2026 10:27 pm IST

नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) महिला आरक्षण और परिसीमन संबंधी प्रस्तावित कानूनों में ‘‘पारदर्शिता की कमी’’ पर चिंता व्यक्त करते हुए, नागरिक संस्थाओं के सदस्यों और कार्यकर्ताओं के एक समूह ने सोमवार को केंद्र से आग्रह किया कि वह व्यापक परामर्श के लिए मसौदा विधेयकों को लोगों के बीच रखे। साथ ही, उन्होंने विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण का ‘‘पूरी तरह से’’ समर्थन किया।

एक बयान में, अंजली भारद्वाज, निवेदिता मेनन, एनी राजा, मीरा शंकर, हर्ष मंदर और अमृता जौहरी सहित अन्य हस्ताक्षरकर्ताओं ने संसद के विस्तारित बजट सत्र के तहत 16 से 18 अप्रैल तक विशेष बैठक के दौरान प्रस्तावित कानूनों को पेश करने के तरीके पर चिंता व्यक्त की।

बयान में कहा गया है कि प्रस्तावित कानूनों में कथित तौर पर महिलाओं के आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संशोधन शामिल हैं, जिनसे भारत के चुनावी ढांचे और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर दूरगामी प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।

उन्होंने यह भी आग्रह किया कि मसौदा कानूनों को ‘‘विधायी पूर्व परामर्श नीति के अनुरूप व्यापक जन परामर्श प्रक्रिया से गुजारा जाए।’’

बयान में कहा गया है कि ‘‘देश के नागरिकों को विधेयकों की सामग्री, उनके निहितार्थ और उनके पीछे के तर्क के बारे में पूरी तरह से अंधेरे में रखा गया है।’’ इसमें यह भी कहा गया है कि प्रस्तावित कानूनों के बारे में जानकारी ज्यादातर सूत्रों पर आधारित मीडिया रिपोर्ट के माध्यम से सामने आ रही है।

भाषा सुभाष दिलीप

दिलीप


लेखक के बारे में