उत्तराखंड में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में काम किया जा रहा है:धामी

उत्तराखंड में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में काम किया जा रहा है:धामी

उत्तराखंड में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में काम किया जा रहा है:धामी
Modified Date: January 18, 2026 / 09:19 pm IST
Published Date: January 18, 2026 9:19 pm IST

हरिद्वार, 18 जनवरी (भाषा) उत्तराखंड को देशवासियों के लिए आस्था का केंद्र बताते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को कहा कि प्रदेश में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में काम किया जा रहा है।

यहां देव संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा अखिल भारतीय गायत्री परिवार की संस्थापिका माता भगवती देवी शर्मा के तपस्वी जीवन के शताब्दी समारोह के अवसर पर आयोजित ‘ध्वज वंदन समारोह’ में हिस्सा लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बदरीनाथ और आदि कैलाश जैसे तीर्थस्थल भारत की आत्मा की धड़कन हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य में जहां एक ओर केदारखंड और मानसखंड के मंदिर क्षेत्रों के सौंदर्यीकरण का काम किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर यमुना नदी के घाटों का भी विकास किया जा रहा है।

 ⁠

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार-ऋषिकेश गलियारा, शारदा गलियारा, विवेकानंद गलियारा और गोलज्यू गलियारा की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है जबकि भारतीय संस्कृति और दर्शन के इतिहास के गहन अध्ययन के लिए दून विश्वविद्यालय में हिंदू अध्ययन केंद्र की स्थापना कर दी गयी है।

उन्होंने कहा कि हरिद्वार में 2027 में अर्धकुंभ मेले को दिव्य, भव्य और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक स्तर पर काम किया जा रहा है।

धामी ने कहा कि ऐसे पावन परिवेश में माता भगवती देवी शर्मा के तपस्वी जीवन का शताब्दी समारोह भारतीय संस्कृति, संस्कार और साधना परंपरा के नवजागरण का संदेश देता है।

कार्यक्रम में मौजूद केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने इस शताब्दी समारोह को सेवा, साधना और संस्कार का त्रिवेणी संगम बताते हुए कहा कि यह नवयुग के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा।

उन्होंने कहा कि विश्व की महान सभ्यताओं का निर्माण सामूहिक चरित्र निर्माण के माध्यम से ही संभव हुआ है ।

शेखावत ने कहा कि जब समाज के व्यक्ति नैतिक मूल्यों, अनुशासन और सेवा भाव को अपने जीवन का आधार बनाते हैं, तभी सशक्त संस्कृति और स्थायी सभ्यता का निर्माण होता है और यह जनशताब्दी समारोह इसी सामूहिक चेतना को जाग्रत करने का अहम प्रयास है।

यह आयोजन 23 जनवरी तक चलेगा ।

भाषा सं दीप्ति नोमान

नोमान


लेखक के बारे में