सेना के जवानों की शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक सहनशक्ति को बढ़ाता है योग: थल सेना प्रमुख

सेना के जवानों की शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक सहनशक्ति को बढ़ाता है योग: थल सेना प्रमुख

सेना के जवानों की शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक सहनशक्ति को बढ़ाता है योग: थल सेना प्रमुख
Modified Date: June 21, 2026 / 01:51 pm IST
Published Date: June 21, 2026 1:51 pm IST

तेजपुर, 21 जून (भाषा) थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने रविवार को कहा कि योग केवल एक शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि यह जीवन जीने की एक ऐसी पद्धति है, जो व्यक्ति के विचारों, कार्यों और समग्र कल्याण को प्रभावित करती है।

द्विवेदी ने यहां तेजपुर सैन्य अड्डे में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम के दौरान मीडिया कर्मियों से बातचीत में सशस्त्र बलों के जवानों की शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक दृढ़ता बढ़ाने में योग की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। जनरल द्विवेदी ने कहा कि योग एक सशक्त साधना है, जो शरीर, मन और आत्मा को एक सूत्र में पिरोती है।

जनरल द्विवेदी ने कहा कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों, दूरदराज के इलाकों और दुर्गम स्थानों में तैनात सैनिकों को अत्यधिक मौसम, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और लंबे समय तक अलग-थलग रहने जैसी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। थलसेना प्रमुख ने कहा, ‘‘योग उन्हें (जवानों को) शारीरिक रूप से फिट, मानसिक रूप से मजबूत और भावनात्मक रूप से संतुलित बनाए रखने में मदद करता है, जिससे वे कठिन परिस्थितियों में भी अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर पाते हैं।’’ उन्होंने कहा कि जब शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य होता है, तब व्यक्ति आंतरिक स्थिरता, नई ऊर्जा और जीवन के उद्देश्य के प्रति अधिक गहन अनुभूति का अनुभव करता है।

जनरल द्विवेदी ने कहा, ‘‘ऐसी मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति सैनिकों को अभियान संबंधी चुनौतियों का सामना करने तथा समर्पण भाव से राष्ट्रसेवा करने के लिए आवश्यक प्रेरणा व ताजगी प्रदान करती है।’’

उन्होंने सभी सैनिकों को योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बनाने के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि स्वस्थ शरीर, संतुलित मन और दृढ़ आत्मबल सैन्य क्षमता तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रमुख आधार हैं।

भाषा जितेंद्र रंजन

रंजन


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