जमीन बिक्री की अनुमति नहीं मिलने से युवक ने कलेक्ट्रेट में की आत्महत्या, जांच के आदेश

जमीन बिक्री की अनुमति नहीं मिलने से युवक ने कलेक्ट्रेट में की आत्महत्या, जांच के आदेश

जमीन बिक्री की अनुमति नहीं मिलने से युवक ने कलेक्ट्रेट में की आत्महत्या, जांच के आदेश
Modified Date: June 6, 2026 / 10:21 pm IST
Published Date: June 6, 2026 10:21 pm IST

केंद्रपाड़ा (ओडिशा), छह जून (भाषा) ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिला प्रशासन ने 26 वर्षीय एक दलित युवक की मौत के मामले में जांच के आदेश दिए हैं। युवक ने कथित तौर पर कलेक्ट्रेट परिसर में आत्महत्या कर ली थी।

मृतक की पहचान निकिराई थाना क्षेत्र के रैतुंडी गांव निवासी श्रीचंदन मलिक (26) के रूप में हुई है।

परिजनों का आरोप है कि श्रीचंदन ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर लोहे की रेलिंग से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। उनका कहना है कि वह अपनी जमीन बेचने के लिए प्रशासनिक अनुमति प्राप्त नहीं कर पा रहा था, जिससे वह मानसिक रूप से परेशान था।

परिजनों के अनुसार, श्रीचंदन अनुसूचित जाति समुदाय से था और नियमों के तहत उसे अपनी जमीन किसी गैर-अनुसूचित जाति के व्यक्ति को बेचने के लिए प्रशासन से अनुमति लेना जरूरी था।

उन्होंने आरोप लगाया कि वह पिछले छह महीने से अनुमति प्राप्त करने का प्रयास कर रहा था लेकिन अनुमति नहीं मिलने के कारण वह हताश हो गया और अंततः उसने आत्महत्या कर ली।

केंद्रपाड़ा के जिलाधिकारी रघुराम आर अय्यर ने कहा कि जिला प्रशासन ने इस घटना की जांच शुरू कर दी है।

उन्होंने कहा, ‘इस दुखद मौत के मामले की जांच शुरू कर दी गई है। यदि किसी व्यक्ति को लापरवाही, गलत आचरण या उत्पीड़न का दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।’

घटना को लेकर लोगों में बढ़ते आक्रोश के बीच विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) का एक प्रतिनिधिमंडल, जिला अध्यक्ष शिव प्रसाद बल के नेतृत्व में शनिवार को जिलाधिकारी से मिला।

प्रतिनिधिमंडल ने उन अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की, जिनकी कथित लापरवाही और उत्पीड़न के कारण युवक को यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

इस दौरान बीजद कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन भी किया।

केंद्रपाड़ा से बीजद विधायक गणेश्वर बेहरा ने घटना की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया कि जिला और राज्य स्तर पर जन शिकायत निवारण व्यवस्था लगभग ठप हो चुकी है।

बेहरा ने मृतक के परिजनों को 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की मांग भी की।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘जन शिकायत सुनवाई अब केवल एक औपचारिकता बनकर रह गई है। सरकारी कार्यालयों में सैकड़ों आवेदन और शिकायतें धूल फांक रही हैं। पीड़ित नौकरशाही की जटिल प्रक्रियाओं में फंस गया था और लंबे समय तक उत्पीड़न का सामना कर रहा था। अधिकारियों के असंवेदनशील रवैये से निराश होकर उसने आत्महत्या जैसा कदम उठाया।’

बेहरा ने कहा कि शोक संतप्त परिवार को पर्याप्त मुआवजा दिया जाना चाहिए और सरकार को जिम्मेदारी तय करते हुए यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

इसी तरह की मांग करते हुए भाजपा नेता और पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष गीता सेठी ने कहा कि युवक की मौत के लिए यदि कोई अधिकारी जिम्मेदार पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

युवक की मौत के मामले में जिला अधिवक्ता संघ ने भी जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष रबी नारायण मोहंती ने आरोप लगाया कि केंद्रपाड़ा के उप-जिलाधिकारी अरुण कुमार नायक ने युवक को प्रताड़ित किया था और इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

वकीलों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर भूमि हस्तांतरण की अनुमति देने में कथित देरी के लिए उप-जिलाधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की।

ओडिशा भूमि सुधार अधिनियम, 1960 की धारा 22 के तहत अनुसूचित जाति का कोई भूमिधर अपनी जमीन किसी अन्य जाति या सामान्य वर्ग के व्यक्ति को राजस्व अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना हस्तांतरित या बेच नहीं सकता।

भाषा

राखी माधव

माधव


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