Tamil Nadu Election Result 2026: शुरुआती रूझान में एक्टर विजय चल रहे पीछे, युवाओं पर बड़ा दांव खेलने के बाद भी बाद भी स्टालिन की पार्टी डीएमके आगे
Tamil Nadu Election Result 2026: शुरुआती रूझान में एक्टर विजय चल रहे पीछे, युवाओं पर बड़ा दांव खेलने के बाद भी बाद भी स्टालिन की पार्टी डीएमके आगे
Tamil Nadu Election Result 2026: शुरुआती रूझान में एक्टर विजय चल रहे पीछे, युवाओं पर बड़ा दांव खेलने के बाद भी बाद भी स्टालिन की पार्टी डीएमके आगे
चेन्नई: Tamil Nadu Election Result 2026 पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों का शुरुआती रूझान आने शुरू हो गए हैं। बात करें सबसे चर्चित दो राज्य पश्चिम बंगाल और असम की तो असम में भाजपा जीत की ओर बढ़त बनाते हुए दिखाई दे रही है। जबकि पश्चिम बंगाल में भाजपा और टीएमसी के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। असम में भाजपा 29 सीटों पर आगे चल रही है तो कांग्रेस 7 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं। जबकि बंगाल में भजपा 70 और टीएमसी 65 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं। वहीं, बात तमिलनाडु की करें तो यहां डीएमके 61, एआईडीएमके 6 और अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके 19 सीटों पर आगे चल रही है। शुरुआती रूझान को देखने से ये पता चलता है कि चुनावी रैलियों में दिखने वाली भीड़ का समर्थन अभिनेता विजय को नहीं मिला है।
अभिनेता विजय शुरुआती रूझान में चल रहे पीछे
Tamil Nadu Election Result 2026 बता दें कि अभिनेता विजय तमिलनाडु चुनावों में अपनी पार्टी तमिलगा वेट्री कज़गम (TVK) की ओर से डीएमके के गढ़ पेरम्बूर और त्रिची पूर्व से चुनाव में खड़े है। चुनावी रैलियों के दौरान विजय ने युवाओं को अपनी ओर खिंचने के लिए कई अहम घोषणाएं भी कीं थी। उन्होंने 29 वर्ष से अधिक उम्र के ऐसे युवाओं को, जिन्हें अभी तक रोजगार नहीं मिला है, हर महीने 4,000 रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। वहीं, डिप्लोमा धारकों को प्रति माह 2,500 रुपए देने का भी वादा किया गया है। बावजूद इसके शुरूआती आंकड़े विजय के पक्ष में नहीं दिखाई दे रहे हैं।
दो सीटों पर चुनाव लड़ रहे विजय
चूंकि अधिकांश उम्मीदवार राजनीति में नए हैं, इसलिए पेरम्बूर और त्रिची पूर्व सीटों पर खास ध्यान केंद्रित हो गया है। विजय के विरोधियों ने उनके दो सीटों से चुनाव लड़ने के फैसले को ‘सुरक्षित’ खेलने की कोशिश बताते हुए इसे ‘असमझदारी भरा’ कदम करार दिया है। दरअसल, विजय ने इस मामले में जयललिता की रणनीति को दोहराने की कोशिश की है, जिन्होंने 1991 में तमिलनाडु के उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए बरगुर और कांगेयम, दो सीटों से चुनाव लड़ा था।
पेरम्बूर और तिरुचि पूर्व दोनों ही शहरी क्षेत्र
पेरम्बूर और तिरुचि पूर्व दोनों ही शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्र हैं, जिसका मतलब है कि यहां की बड़ी आबादी विजय के समर्थकों में शामिल हो सकती है, जो मतदान के दौरान ईवीएम तक पहुंचकर वोट में बदल सकती है। पेरम्बूर को मुख्यतः कामकाजी वर्ग का इलाका माना जाता है, जबकि तिरुचि पूर्व में ईसाई मतदाताओं की उल्लेखनीय संख्या है। इस नजरिए से देखें तो यह ‘थलपति’ विजय की दोनों सीटों पर जीत की संभावनाओं को मजबूत करने की एक सोची-समझी रणनीति लगती है।
हालांकि, यदि सतही पहलू से हटकर देखा जाए, तो इस फैसले के पीछे गहरी राजनीतिक सोच दिखाई देती है। चेन्नई की ऐसी सीट चुनना, जहां बड़ी संख्या में ‘ब्लू कॉलर’ यानी श्रमिक वर्ग के मतदाता हों, अपने आप में एक महत्वपूर्ण संकेत है। इससे विजय को आम लोगों के नेता के रूप में अपनी छवि और मजबूत करने का अवसर मिलता है।
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