West Bengal New Chief Minister: मोदी-शाह किसे सौपेंगे बंगाल की जिम्मेदारी और कौन होगा नया मुख्यमंत्री? इन चार में से किसी एक के सिर बंधेगा सेहरा, आप भी जानें

West Bengal New Chief Minister: बंगाल में BJP सरकार बनने पर नया मुख्यमंत्री कौन होगा, मोदी-शाह तय करेंगे चार प्रमुख दावेदार

West Bengal New Chief Minister: मोदी-शाह किसे सौपेंगे बंगाल की जिम्मेदारी और कौन होगा नया मुख्यमंत्री? इन चार में से किसी एक के सिर बंधेगा सेहरा, आप भी जानें

West Bengal New Chief Minister || Image- IBC24 News file

Modified Date: May 4, 2026 / 03:23 pm IST
Published Date: May 4, 2026 3:23 pm IST
HIGHLIGHTS
  • बंगाल में BJP की बढ़त, मुख्यमंत्री पद पर चर्चा तेज
  • सुकांत मजूमदार, सुवेंदु अधिकारी सहित चार नाम रेस में
  • अंतिम फैसला मोदी-शाह और केंद्रीय नेतृत्व करेगा

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना के शुरुआती रुझान राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे रहे हैं। (West Bengal New Chief Minister) अब तक के ट्रेंड में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है, जबकि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पीछे नजर आ रही है।

अगर यह रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो यह बंगाल की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव होगा। इस बार की लड़ाई सिर्फ सीटों की नहीं रही, बल्कि यह पूरी तरह राजनीति और सामाजिक समीकरणों की भी रही। ताजा रुझानों के मुताबिक भाजपा 192 सीटों पर आगे चल रही हैं जबकि सत्ताधारी टीएमसी 96 सीटों पर पकड़ बनाये हुए है। वही कांग्रेस और अन्य दल पांच सीटों पर मजबूत दिखाई दे रही है।

कौन होगा बंगाल का नया मुख्यमंत्री?

ताजा नतीजे के सामने आने के बाद अब सवाल उठ रहे है कि पीएम मोदी और अमित शाह बंगाल के किस नेता के कंधो पर राज्य की जिम्मेदारी सौपेंगे, हालांकि पश्चिम बंगाल में अगर भाजपा सरकार बनाती है, तो मुख्यमंत्री का चयन पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व ही तय करता है, और वह चुनाव नतीजों, विधायकों की संख्या और आंतरिक सहमति पर निर्भर करता है। (West Bengal New Chief Minister) राजनीतिक चर्चा और पिछले रुझानों के आधार पर कुछ प्रमुख नाम अक्सर सामने आते हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा सुकान्त मजूमदार की होती है, जो राज्य भाजपा अध्यक्ष भी हैं और संगठन में मजबूत पकड़ रखते हैं। दूसरा बड़ा नाम सुवेन्दु अधिकारी का है, जो टीएमसी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे और विपक्ष के नेता के रूप में प्रमुख चेहरा रहे हैं। इनके अलावा महिला नेत्री लॉकेट चटर्जी और दिलीप घोष के नाम भी प्रमुखता से सामने आये हैं

इसके अलावा पार्टी में कुछ अन्य वरिष्ठ नेता और सांसद भी समय-समय पर संभावित दावेदार के रूप में चर्चा में आते हैं, लेकिन अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व, खासकर केंद्रीय नेतृत्व और विधायक दल की राय के आधार पर ही होता है। इसलिए फिलहाल सिर्फ इतना कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री का चेहरा तय करना भाजपा के अंदरूनी समीकरणों और चुनावी नतीजों पर पूरी तरह निर्भर करेगा।

क्या रहें भाजपा के चुनावी मुद्दे?

भाजपा जिस तरह से प्रचंड सीटों के साथ बंगाल में जीत की तरफ आगे बढ़रही है ऐसे में चर्चा तेज है कि, आखिर बंगाल में भाजपा के कौन से मुद्दे हावी रहें? पीएम मोदी के किन मुद्दों पर बंगाल की जनता ने भरोसा जताया? भाजपा ने जहां अपने वादों के जरिए मजबूत नैरेटिव खड़ा किया, वहीं “एम फैक्टर” ने भी चुनावी गणित को प्रभावित किया। भाजपा ने अवैध घुसपैठ को बड़ा मुद्दा बनाया। बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को बाहर करने का वादा खासकर सीमावर्ती इलाकों में असरदार साबित हुआ। इसे सुरक्षा और स्थानीय अधिकारों से जोड़कर पेश किया गया।

महिलाओं और बेरोजगार युवाओं को हर महीने आर्थिक सहायता देने जैसे वादों का भी असर देखने को मिला। केंद्र की योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने का भरोसा दिया गया, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग में भाजपा की पकड़ मजबूत हुई। (West Bengal New Chief Minister) राज्य में बढ़ती हिंसा और अपराध के मुद्दे को भी भाजपा ने जोर-शोर से उठाया और सख्त कानून व्यवस्था लागू करने की बात कही।

भाजपा ने युवाओं और व्यापारिक वर्ग को किया आकर्षित

सिंडिकेट राज खत्म करने और पारदर्शिता लाने का वादा भाजपा के प्रचार का अहम हिस्सा रहा। लंबे समय से सिस्टम से नाराज वोटरों तक यह संदेश सीधे पहुंचा। बंद पड़े उद्योगों को चालू करने और नए निवेश लाने के वादों ने युवाओं और व्यापारिक वर्ग को आकर्षित किया। “सोनार बांग्ला” का सपना भी इसी से जोड़ा गया।

इन सबके साथ भाजपा ने “एम फैक्टर” पर भी काम किया, जिसने चुनावी परिणामों को प्रभावित किया। मुस्लिम वोट पारंपरिक रूप से टीएमसी के साथ रहे हैं, लेकिन इस बार उनमें बंटवारा देखने को मिला। भाजपा ने इस वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की, जबकि ध्रुवीकरण भी असरदार रहा। (West Bengal New Chief Minister) नरेंद्र मोदी की रैलियों और राष्ट्रीय मुद्दों पर फोकस ने भाजपा को नई ऊर्जा दी, जबकि ममता बनर्जी की छवि टीएमसी की बड़ी ताकत बनी रही। कुल मिलाकर, भाजपा ने अपने वादों और सामाजिक समीकरणों के दम पर बढ़त बनाई, जबकि टीएमसी इनका प्रभावी जवाब देने के लिए संघर्ष करती दिखी।

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