पैडमैन मूवी रिव्यू
पैडमैन मूवी रिव्यू
हमारी रेटिंग : 4 .1 / 5
आमतौर पर जैसा की सर्विदित है अक्षय कुमार की फिल्म लोगों को बेहद अट्रेक्ट करती है हुआ भी कुछ ऐसा ही सभी समीक्षकों ने फिल्म को 4 से 5 स्टार दिया है। फिल्म कुछ इस थीम पर है अक्षय अपनी पत्नी की मेंस्ट्रुअल हाइजीन के मुद्दे को लेकर इतना ज्यादा विचलित हो जाता है कि उस समस्या का निवारण करने के लिए खुद सैनिटरी पैड बनाने की ठान लेता है, मगर वह जिस दौर में यह निर्णय लेता है, वह है करीब 16 साल पहले यानी 2001 की बात, जब टीवी पर किसी सैनिटरी पैड के विज्ञापन के आने पर या तो चैनल बदल दिया जाता था या पूछे जाने पर उसे साबुन या किसी और ऐड का नाम दिया जाता था। ग्रामीण इलाकों में तो इसे गंदा और अपवित्र मानकर इसके बारे में बात करना भी पाप समझा जाता था। उस परिवेश की अरुणाचलम मुरुगनंथम की सच्ची कहानी पर आधारित फिल्म पैडमैन के जरिए निर्देशक आर. बाल्की और अक्षय कुमार ने मेंस्ट्रुअल हाइजीन के प्रति लोगों को जागरूक करने की दमदार पहल की है।
#OneWordReview…#PadMan: WINNER.
Rating:- ⭐️⭐️⭐️⭐️
Realistic. Inspiring. Engaging. Deeply moving… A big THUMBS UP.— taran adarsh (@taran_adarsh) February 9, 2018
कहानी: लक्ष्मीकांत चौहान (अक्षय कुमार) को गायत्री (राधिका आप्टे) से शादी करने के बाद पता चलता है कि माहवारी के दौरान उसकी पत्नी न केवल गंदे कपड़े का इस्तेमाल करती है बल्कि उसे अछूत कन्या की तरह 5 दिन घर से बाहर रहना पड़ता है। उसे जब डॉक्टर से पता चलता है कि उन दिनों में महिलाएं गंदे कपड़े, राख, छाल आदि का इस्तेमाल करके कई जानलेवा और खतरनाक रोगों को दावत देती हैं तो वह खुद सैनिटरी पैड बनाने की कवायद में जुट जाता है। इस सिलसिले में उसे पहले अपनी पत्नी, बहन, मां के तिरस्कार का सामना करना पड़ता है और फिर गांववाले और समाज उसे एक तरह से बहिष्कृत कर देते हैं, मगर जितना वह जलील होता जाता है उतनी ही उसकी सैनिटरी पैड बनाने की जिद पक्की होती जाती है। परिवार उसे छोड़ देता है, मगर वह अपनी धुन नहीं छोड़ता और आगे इस सफर में उसकी जिद को सच में बदलने के लिए दिल्ली की एमबीए स्टूडेंट परी (सोनम कपूर) उसका साथ देती है।

रिव्यू: निर्देशक आर. बाल्की ने पूरी कोशिश की है कि वह मेंस्ट्रुअल हाइजीन के मुद्दे को हर तरह से भुना लें। इसमें कोई दो राय नहीं कि मासिक धर्म को लेकर समाज में जितने भी टैबू हैं उनसे पार पाने के लिए यह आज के दौर की सबसे जरूरी फिल्म है, मगर कई जगहों पर बाल्की भावनाओं में बहकर फिल्म को उपदेशात्मक बना बैठे हैं। सैनिटरी पैड को लेकर फैलाई जानेवाली जागरूकता की कहानी कई जगहों पर खिंची हुई लगती है। हालांकि बाल्की ने उसे चुटीले संवादों और लाइट कॉमिक दृश्यों के बलबूते पर संतुलित करने की कोशिश जरूर की है। फिल्म का दूसरा भाग पहले भाग की तुलना में ज्यादा मजबूत है। बाल्की ने दक्षिण के बजाय मध्यप्रदेश का बैकड्रॉप रखा जो कहानी को दिलचस्प बनाता है।
The real #PadMan had his wife to thank for his story, so does the reel #PadMan 🙂 Full credit to this gorgeous superwoman for finding, chasing and making this film a reality. Over to you guys now. #PadManToday pic.twitter.com/8GuOjbiHCE
— Akshay Kumar (@akshaykumar) February 9, 2018
अक्षय कुमार फिल्म का सबसे मजबूत पहलू हैं। उन्होंने पैडमैन के किरदार के हर रंग को दिल से जिया है। एक अदाकार के रूप में वह फिल्म में हर तरह से स्वछंद नजर आते हैं और अपने रोल में दर्शकों को निश्चिंत कर ले जाते हैं कि परिवार और समाज द्वारा हीनता का शिकार बनाए जाने के बावजूद वह सैनिटरी पैड क्यों बनाना चाहते हैं? राधिका आप्टे आज के दौर की नैचरल अभिनेत्रियों में से एक हैं और उन्होंने अपने रोल को सहजता से अंजाम दिया है। परी के रूप में सोनम कपूर कहानी ही नहीं बल्कि फिल्म में भी राहत का काम करती हैं। फिल्म की सपॉर्टिंग कास्ट भी मजबूत है। फिल्म में महानायक अमिताभ बच्चन की एंट्री प्रभाव छोड़ जाती है। अमित त्रिवेदी के संगीत में ‘पैडमैन पैडमैन’, ‘हूबहू’, ‘आज से मेरा हो गया’ जैसे गाने फिल्म की रिलीज से पहले ही हिट हो चुके हैं।
Congratulations and good luck to @akshaykumar @mrsfunnybones @sonamakapoor #RBalki @radhika_apte @SonyPicsIndia @kriarj and the entire team of #Padman on its release. Looking forward to watching the film soon.:) pic.twitter.com/1cutlFs807
— Anupam Kher (@AnupamPKher) February 9, 2018
इस बारे में एक ही बात कही जा सकती है कि अगर आपको अक्षय कुमार की ऐक्टिंग के लिए यह फिल्म देखी जा सकती है। इसके साथ ही अगर आप खास मुद्दों पर बनीं फिल्में देखना पसंद करते हैं तो ‘पैडमैन’ जरूर देखे
WEB TEAM IBC24

Facebook


