Holika Dahan Time 2026: सिर्फ 20 मिनट के लिए होलिका दहन का शुभ मुहूर्त… इस काल ने पारंपरिक समय पर लगाई रोक, जानिए आधी रात कब जलानी है होलिका

Holika Dahan Time 2026: भद्रा के अंतिम चरण यानी भद्रा पुच्छ में होलिका दहन करना शास्त्रसम्मत माना गया है। उन्होंने बताया कि 2 मार्च 2026 को रात्रि 12:30 बजे से 12:50 बजे तक केवल 20 मिनट का शुभ मुहूर्त उपलब्ध है

Holika Dahan Time 2026: सिर्फ 20 मिनट के लिए होलिका दहन का शुभ मुहूर्त… इस काल ने पारंपरिक समय पर लगाई रोक, जानिए आधी रात कब जलानी है होलिका

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Modified Date: March 2, 2026 / 07:32 am IST
Published Date: March 2, 2026 7:17 am IST
HIGHLIGHTS
  • 20 मिनट का दहन मुहूर्त
  • भद्रा संग पूर्णिमा शुरू
  • आधी रात बाद दहन

Holika Dahan Time 2026: नई दिल्ली: इस वर्ष होलिका दहन को लेकर देशभर में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कारण है फाल्गुन पूर्णिमा के साथ ही भद्रा काल का आरंभ होना और अगले दिन 3 मार्च को चंद्र ग्रहण का पड़ना। शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन प्रदोष काल में पूर्णिमा तिथि के दौरान और भद्रा रहित मुहूर्त में ही किया जाना चाहिए। लेकिन 2026 में 2 मार्च की शाम 5:55 बजे पूर्णिमा शुरू होते ही भद्रा भी लग रही है, जो 3 मार्च की सुबह लगभग 5:28 बजे तक रहेगी। ऐसे में पारंपरिक नियमों के अनुसार प्रदोष काल में होलिका दहन का अवसर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, जिससे लोगों में भ्रम की स्थिति बन गई है।

Holika Dahan 2026: केवल 20 मिनट के लिए शुभ मुहूर्त

इस विशेष स्थिति में भद्रा के अंतिम चरण यानी भद्रा पुच्छ में होलिका दहन करना शास्त्रसम्मत माना गया है। उन्होंने बताया कि 2 मार्च 2026 को रात्रि 12:30 बजे से 12:50 बजे तक केवल 20 मिनट का शुभ मुहूर्त उपलब्ध है, जिसमें होलिका दहन किया जा सकता है। यह समय भद्रा के अशुभ मुख भाग से पहले का चरण है, इसलिए इसे आपातकालीन शुभ मुहूर्त माना जा रहा है। शास्त्रों में उल्लेख है कि जब प्रदोष काल में भद्रा रहित पूर्णिमा उपलब्ध न हो, तब भद्रा पुच्छ में दहन करना स्वीकार्य होता है। इसलिए इस वर्ष अधिकांश स्थानों पर आधी रात के बाद ही होलिका दहन किया जाएगा।

Holika Dahan Kab Kiya Jana Chahiye: कब किय जाना चाहिए होलिका दहन

धार्मिक ग्रंथों जैसे विष्णु पुराण और भविष्य पुराण में स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि होलिका पूजन और दहन पूर्णिमा की रात्रि में प्रदोष काल के दौरान तथा भद्रा रहित समय में किया जाना चाहिए। किंतु इस वर्ष भद्रा का प्रभाव प्रदोष से लेकर पूरी रात्रि तक बना हुआ है। विशेष रूप से भद्रा मुख, जिसे अत्यंत अशुभ माना जाता है, 3 मार्च की रात्रि 2:35 बजे से सुबह 4:30 बजे तक रहेगा। इस अवधि में किसी भी प्रकार का मांगलिक या धार्मिक अग्नि कर्म वर्जित बताया गया है। इसलिए 12:30 से 12:50 का समय ही व्यावहारिक रूप से उपलब्ध सुरक्षित और शास्त्रसम्मत मुहूर्त माना जा रहा है।

पंचांग के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 को शाम 5:55 बजे आरंभ होकर 3 मार्च की शाम 5:07 बजे समाप्त होगी। पूर्णिमा तिथि के साथ ही भद्रा का आरंभ 2 मार्च शाम 5:55 बजे से हो जाएगा और इसका समापन 3 मार्च सुबह 5:28 बजे के आसपास माना गया है। चूंकि 3 मार्च को चंद्र ग्रहण भी लग रहा है और इसका सूतक काल प्रभावी रहेगा, इसलिए 3 मार्च को होलिका दहन करना शास्त्रीय दृष्टि से उचित नहीं माना गया। यही कारण है कि 2 मार्च की मध्यरात्रि का सीमित मुहूर्त ही अंतिम विकल्प बन गया है।

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लेखक के बारे में

पत्रकारिता और क्रिएटिव राइटिंग में स्नातक हूँ। मीडिया क्षेत्र में 3 वर्षों का विविध अनुभव प्राप्त है, जहां मैंने अलग-अलग मीडिया हाउस में एंकरिंग, वॉइस ओवर और कंटेन्ट राइटिंग जैसे कार्यों में उत्कृष्ट योगदान दिया। IBC24 में मैं अभी Trainee-Digital Marketing के रूप में कार्यरत हूँ।