Second Hand Smoking Kya Hai: सिगरेट पीते भी नहीं, फिर शरीर में पहुंच रहा जहर? आखिर क्या है सेकंडहैंड स्मोकिंग और कैसे बन रही जान की दुश्मन?

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Second Hand Smoking Kya Hai: अगर आप सिगरेट नहीं पीते, तब भी दूसरों के धुएं से आपकी सेहत प्रभावित हो सकती है। सेकंडहैंड स्मोक में मौजूद हानिकारक पदार्थ शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं और बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं। जानिए पैसिव स्मोकिंग क्या है और इससे बचाव क्यों जरुरी है।

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  • Publish Date - September 11, 2026 / 02:07 PM IST,
    Updated On - September 11, 2026 / 02:07 PM IST

(Second Hand Smoking Kya Hai/ Image Credit: Pexels)

HIGHLIGHTS
  • पैसिव स्मोकिंग से भारत में 2023 में 3 लाख से ज्यादा मौतें हुईं।
  • सेकंडहैंड स्मोकिंग का खतरा नॉन-स्मोकर्स को भी रहता है।
  • बच्चों, महिलाओं और दिल के मरीजों को ज्यादा जोखिम।

Second Hand Smoking Kya Hai: दूसरों के सिगरेट पीने से निकलने वाला धुआं भी सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। दे लैंसेट में प्रकाशित एक अध्ययन से मुताबिक, भारत में 2023 के दौरान सेकंडहैंड स्मोकिंग (Second Hand Smoking Kya Hai) से 3 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई। 1990 की तुलना में यह आंकड़ा करीब 50% बढ़ा है। चीन के बाद भारत इस समस्या से प्रभावित देशों में दूसरे स्थान पर बताया जा रहा है।

क्या है पैसिव या सेकंडहैंड स्मोकिंग?

पैसिव स्मोकिंग का मतलब है कि व्यक्ति खुद सिगरेट या कोई तंबाकू उत्पाद नहीं पीता, लेकिन आसपास मौजूद धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के धुएं को सांस के जरिए अंदर लेता है। इसे सेकंडहैंड स्मोकिंग भी कहा जाता है। सिगरेट जलने और धूम्रपान के दौरान बाहर निकलने वाला धुआं आसपास की हवा में फैल जाता है और पास मौजूद लोगों के शरीर में पहुंच सकता है।

बच्चों और दिल के मरीजों को ज्यादा खतरा

अध्ययन के मुताबिक, दुनिया में 2023 के दौरान धूम्रपान और तंबाकू से जुड़ी वजहों से 80 लाख से अधिक मौतें हुईं। इनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जिन्होंने कभी खुद धूम्रपान नहीं किया। पैसिव स्मोकिंग (Passive Smoking) का असर खासतौर पर बच्चों, महिलाओं और दिल से जुड़ी समस्याओं वाले लोगों के लिए चिंता का विषय है। लंबे समय तक धुएं के संपर्क में रहने से स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।

बढ़ सकता है गंभीर बीमारियों का जोखिम

सिगरेट के धुएं के संपर्क में आने से आंखों में जलन, खांसी और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक सेकंडहैंड स्मोक (Second Hand Smoking Kya Hai) के संपर्क में रहने से सांस से जुड़ी बीमारियों और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। रिपोर्ट में पैसिव स्मोकिंग से जुड़ी मौतों में हार्ट स्ट्रोक और फेफड़ों के कैंसर को प्रमुख गंभीर परिणामों में शामिल किया गया है।

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पैसिव स्मोकिंग क्या होती है?

जब कोई व्यक्ति खुद धूम्रपान नहीं करता, लेकिन आसपास मौजूद व्यक्ति के सिगरेट के धुएं को सांस के जरिए अंदर लेता है, तो इसे पैसिव या सेकंडहैंड स्मोकिंग कहते हैं।

पैसिव स्मोकिंग से किसे ज्यादा खतरा होता है?

बच्चों, महिलाओं और दिल से जुड़ी समस्याओं वाले लोगों को इससे विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

सेकंडहैंड स्मोकिंग से कौन-सी समस्याएं हो सकती हैं?

आंखों में जलन, खांसी और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। लंबे समय तक संपर्क गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है।

भारत में पैसिव स्मोकिंग से कितनी मौतें हुईं?

दिए गए अध्ययन के अनुसार, 2023 में भारत में सेकंडहैंड स्मोकिंग से 3 लाख से अधिक मौतें हुईं।