(Foldable Phone Screen/ Image Credit: Instagram)
Foldable Phone Screen: आजकल फोल्डेबल स्मार्टफोन का चलन तेजी से बढ़ता जा रहा है। इस फोने को बीच से मोड़कर छोटा किया जा सकता है और खोलने पर स्क्रीन (Foldable Phone Screen) बड़ी हो जाती है। बंद होने पर फोन कॉम्पैक्ट हो जाता है यही इससी सबसे बड़ी खासियत है। लेकिन लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि स्क्रीन आखिर मुड़ती कैसे है और हजारों बार मोड़ने पर टूटती क्यों नहीं? इसका जवाब इसकी खास डिस्प्ले तकनीक में छिपा है।
फोल्डेबल फोन में आमतौर पर OLED डिस्प्ले का इस्तेमाल किया जाता है। सामान्य LCD स्क्रीन की तुलना में OLED को काफी पतला बनाया जा सकता है। LCD में रोशनी के लिए अलग बैकलाइट की जरूरत होती है, जिससे उसकी परतें मोटी हो जाती हैं। वहीं OLED का हर पिक्सल खुद रोशनी पैदा करता है। इसी वजह से इसमें बैकलाइट की जरूरत नहीं पड़ती और डिस्प्ले को पतला व लचीला बनाना आसान होता है।
सामान्य स्मार्टफोन की तरह फोल्डेबल फोन की स्क्रीन (Foldable Phone Screen) पूरी तरह कठोर कांच से नहीं बनी होती। इसमें ऐसी खास लचीली सामग्री और सुरक्षा परतों का इस्तेमाल किया जाता है जो मुड़ने के दौरान डिस्प्ले को सहारा देती हैं। स्क्रीन के ऊपर मजबूत कवर लेयर भी होती है जो रोजाना इस्तेमाल के दौरान सुरक्षा देती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि स्क्रीन को नुकसान नहीं पहुंच सकता। तेज झटका, दबाव या खरोंच से डिस्प्ले खराब हो सकती है।
फोल्डेबल OLED स्क्रीन कई परतों से मिलकर तैयार होती है। सबसे नीचे सब्स्ट्रेट लेयर होती है जो पूरी स्क्रीन को आधार देती है। इसके ऊपर TFT लेयर पिक्सल को नियंत्रित करने में मदद करती है। OLED लेयर रोशनी पैदा करके तस्वीर दिखाती है। जबकि सबसे ऊपर की कवर लेयर डिस्प्ले की सुरक्षा करती है। इन सभी परतों को लचीले तरीके से डिजाइन किया जाता है ताकि स्क्रीन मुड़ सके।
फोन के बीच में लगा खास हिंज स्क्रीन को सही दिशा और तय तरीके से मोड़ने में मदद करता है। स्क्रीन की लचीली संरचना और हिंज का डिजाइन मिलकर फोन को बार-बार खोलने और बंद करने की सुविधा देते हैं। इसलिए फोल्डेबल फोन की स्क्रीन (Foldable Phone Screen) साधारण कांच की तरह तुरंत नहीं टूटती। फिर भी इसे सावधानी से इस्तेमाल करना जरूरी है, क्योंकि ज्यादा दबाव या गलत तरीके से मोड़ने पर नुकसान हो सकता है।