आकाश आनंद का बसपा में सफर: मायावती के उत्तराधिकारी बनने से लेकर अचानक किनारे किए जाने तक
आकाश आनंद का बसपा में सफर: मायावती के उत्तराधिकारी बनने से लेकर अचानक किनारे किए जाने तक
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती के भतीजे आकाश आनंद ने एक सप्ताह में सोशल मीडिया पर तीन बार अपना परिचय बदला। कुछ दिन पहले तक पार्टी के ‘मुख्य राष्ट्रीय समन्वयक’ से ‘पार्टी कार्यकर्ता बसपा’ बने आनंद अब ‘पार्टी समर्थक, बसपा’ बन गये हैं। तीन सितंबर से तेजी से हुए ये बदलाव पार्टी में उनके उतार-चढ़ाव भरे सफर को दर्शाते हैं।
मायावती द्वारा दिसंबर 2023 में अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किये गये आकाश को पार्टी प्रमुख ने बृहस्पतिवार को दल से परोक्ष रूप से निष्कासित करते हुए उन्हें 'पूरी तरह मुक्त' कर दिया। बसपा के पूर्व राज्यसभा सदस्य एवं आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ के बृहस्पतिवार को राजनीति और सामाजिक जीवन से 'संन्यास' लेने के ऐलान के बाद यह घटनाक्रम सामने आया। अशोक सिद्धार्थ को कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण पिछले महीने बसपा से निष्कासित कर दिया गया था।
नोएडा और गुरुग्राम से शुरुआती शिक्षा लेने के बाद इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी आफ प्लेमाउथ से एमबीए की पढ़ाई करने वाले आकाश ने भारत लौटकर शुरू में अपने पारिवारिक कारोबार को संभाला और कॉरपोरेट क्षेत्र की कुछ कम्पनियों में भी काम किया।
वर्ष 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पहली बार अपनी बुआ मायावती के साथ चुनावी रैलियों में नजर आये आकाश का अब तक का सियासी सफर बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा है। मायावती के भाई एवं पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार के बेटे 31 वर्षीय आकाश पार्टी में सियासी पायदान भी तेजी से चढ़े और पार्टी मुखिया ने जून 2019 में उन्हें बसपा का राष्ट्रीय समन्वयक नियुक्त कर दिया। आकाश के राजनीतिक सफर का चरमोत्कर्ष तब आया जब मायावती ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले दिसंबर 2023 में सभी को चौंकाते हुए उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।
हालांकि आकाश के नाम दर्ज यह उपलब्धि ज्यादा दिनों तक नहीं टिकी और 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान सीतापुर में दिये गये एक भाषण को लेकर उठे विवाद के बाद मायावती ने उसी साल मई में आकाश को 'अपरिपक्व' बताते हुए उन्हें उत्तराधिकारी के पद के साथ-साथ राष्ट्रीय समन्वयक के पद से भी हटा दिया।
हालांकि तीन ही महीने बाद अगस्त 2024 में मायावती ने आकाश की पार्टी में जिम्मेदारियों को बहाल कर दिया मगर उसके बाद भी पार्टी के संगठनात्मक फैसलों के तहत उनके पद और जिम्मेदारियों में बदलाव और उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहा।
आकाश के राजनीतिक सफर में सबसे बड़ा उतार उस वक्त आया जब उन्हें तीन मार्च 2025 को अनुशासनहीनता के आरोपों में पार्टी से ही निष्कासित कर दिया गया।आकाश के समक्ष नया संकट उनके ससुर के खिलाफ हुई कार्रवाई से शुरू हुआ। उनके ससुर को दो अगस्त 2026 को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था।
इसके बाद मायावती ने तीन सितंबर को आकाश को राष्ट्रीय समन्वयक के पद और संगठन से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से हटा दिया। उनके सोशल मीडिया परिचय में पहले उन्हें बसपा का मुख्य राष्ट्रीय समन्वयक बताया गया था, लेकिन इसके बाद इसे बदलकर ‘‘पार्टी कार्यकर्ता, बसपा’’ और बाद में ‘‘बसपा समर्थक’’ कर दिया गया।आकाश ने मार्च, 2023 में सिद्धार्थ की बेटी प्रज्ञा से शादी की थी।
मायावती ने बुधवार को 'एक्स' पर एक संदेश में सिद्धार्थ पर आकाश को बरगलाने का आरोप लगाते हुए कहा था कि अगर उन्हें अपने दामाद के राजनीतिक भविष्य की चिंता है तो वह सियासत से पूरी तरह संन्यास ले लें, तभी आकाश को उनकी जिम्मेदारियां देने पर विचार किया जाएगा।
हालांकि सिद्धार्थ ने बृहस्पतिवार की सुबह राजनीति से पूरी तरह संन्यास लेने का ऐलान कर दिया। लेकिन इसके कुछ ही देर बाद मायावती ने सिद्धार्थ से जुड़ी अपनी बुधवार की पोस्ट को आकाश की तरफ से ‘रीपोस्ट’ नहीं किए जाने पर सवाल उठाए और 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि ऐसा नहीं करने से यह लगता है कि सिद्धार्थ और आकाश दोनों को पार्टी और उसके आंदोलन में कम और अपने निजी तथा पारिवारिक स्वार्थ का मोह ज्यादा है।
मायावती ने कहा, ''अगर आकाश आनन्द पार्टी में अब स्वतंत्र रहना चाहते हैं तो वे स्वतंत्र हैं। अर्थात ऐसे में अब इनको पार्टी से पूरे तौर से मुक्त कर दिया गया है।'' मायावती ने हालांकि इस कदम को निष्कासन नहीं बताया है लेकिन माना जा रहा है कि यह निष्कासन की कार्रवाई ही है।
आकाश को बसपा के युवा चेहरे के रूप में आगे बढ़ाया गया था, खासतौर पर डिजिटल और सोशल मीडिया के इस्तेमाल में उनकी रुचि के कारण, जिसके जरिए वह पार्टी की अलग छवि पेश करना चाहते थे। उन्होंने बी. आर. आंबेडकर और कांशीराम के विचारों, युवाओं के सशक्तीकरण और सामाजिक समानता जैसे मुद्दों पर भी बात की।
दरअसल, बृहस्पतिवार को उनके ‘एक्स’ प्रोफाइल पर भी यही लिखा था: ‘‘पार्टी समर्थक, बसपा | बाबा साहेब के विचारों का एक युवा समर्थक।’’
बसपा नेता हालांकि इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन कई समर्थक आकाश को निष्कासित करने के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं।
खुद को आंबेडकर आंदोलन का समर्थक बताने वाले सूरज कुमार बौद्ध ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘बहन जी, आप देश की इतनी प्रमुख नेता हैं। फिर भी इतना बचकाना तर्क? क्या अब किसी व्यक्ति की किसी पार्टी के प्रति निष्ठा इस बात से तय होगी कि उसने किसी पोस्ट को दोबारा साझा (रीट्वीट) किया है या नहीं? आपने उन्हें केवल इसलिए पार्टी से निष्कासित कर दिया क्योंकि उन्होंने आपकी पोस्ट को ‘रीट्वीट’ नहीं किया। हर चीज की एक सीमा होती है। कोई व्यक्ति दुखी हो सकता है, आहत हो सकता है और फिर भी चुप रह सकता है। हर चुप्पी बगावत या साजिश नहीं होती।’’
इस बीच, मायावती ने आकाश के छोटे भाई ईशान को पार्टी का ‘मुख्य सेक्टर समन्वयक’ नियुक्त कर दिया है। वहीं, ईशान ने अपनी ओर से मायावती की सोशल मीडिया पर की गई सभी पोस्ट को नियमित रूप से दोबारा ‘रीपोस्ट’ किया है, जिनमें सिद्धार्थ और आकाश से जुड़ी पोस्ट भी शामिल हैं।
लेखक के बारे में
सवाल आपका है... 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई मीडिया संस्थानों में अपना योगदान दिया है. इन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर की डिग्री ली है.
और भी पढ़ें...Web Title: Akash Anand's Journey in BSP: From Mayawati's Successor to Sudden Sidelining
LUCKNOW
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