मप्र में विचाराधीन कैदियों में 21 प्रतिशत आदिवासी, सिंघार ने त्वरित सुनवाई का आह्वान किया

मप्र में विचाराधीन कैदियों में 21 प्रतिशत आदिवासी, सिंघार ने त्वरित सुनवाई का आह्वान किया

मप्र में विचाराधीन कैदियों में 21 प्रतिशत आदिवासी, सिंघार ने त्वरित सुनवाई का आह्वान किया
Modified Date: January 18, 2026 / 07:54 pm IST
Published Date: January 18, 2026 7:54 pm IST

भोपाल, 18 जनवरी (भाषा) मध्यप्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने रविवार को कहा कि राज्य की जेलों में विचाराधीन कैदियों में करीब 21 प्रतिशत कैदी आदिवासी समुदाय के हैं।

सिंघार ने सरकार और न्यायपालिका से ऐसे कैदियों के लिए त्वरित सुनवाई और सरल जमानत प्रक्रिया सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

सिंघार ने एक बयान में कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार, मध्यप्रदेश में 1.53 करोड़ से अधिक आदिवासी रहते हैं, जो राज्य की आबादी का 21.08 प्रतिशत है और यह भारत में सबसे अधिक है।

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जेलों में अत्यधिक भीड़भाड़ के बारे में चिंता जताते हुए, उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में 132 जेलों में 45,543 कैदी बंद हैं।

उन्होंने कहा कि यह संख्या बिहार और उत्तर प्रदेश के बाद देश में सबसे अधिक है।

कांग्रेस के आदिवासी चेहरे सिंघार ने कहा, ‘कुल 22,946 कैदियों में करीब 50 प्रतिशत विचाराधीन कैदी हैं, जिनके खिलाफ अभी आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं या जिनकी सुनवाई चल रही है। इनमें से 21 प्रतिशत आदिवासी समुदाय से हैं, जो देश में सबसे ज्यादा है।’

उन्होंने कहा कि राज्य की जेलों लगभग 30 हजार कैदी रखे जा सकते हैं लेकिन वर्तमान में कैदियों की संख्या क्षमता से 152 प्रतिशत अधिक है।

सिंघार ने कहा कि आंकड़े यह संकेत देते हैं कि सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लोग लंबी न्यायिक प्रक्रिया के कारण अधिक प्रभावित हो रहे हैं, जहां उन्हें गरीबी और जमानत न जुटा पाने के कारण लंबे समय तक जेल में रहना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि हाल में उच्चतम न्यायालय ने विचाराधीन कैदियों के लंबे समय तक जेल में बंद रहने पर कड़ी टिप्पणियां की हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा कि अदालत ने स्पष्ट किया है कि बिना दोष सिद्ध हुए किसी व्यक्ति को लंबे समय तक जेल में रखना संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है, जो जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है।

अदालत का हवाला देते हुए सिंघार ने कहा कि विचाराधीन कैदी, खासकर गरीब वर्ग के लोग, सालों तक जेल में रह रहे हैं क्योंकि वे जमानत राशि जुटा नहीं पाते।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अगर दोषी कैदियों की बात करें तो प्रदेश में कुल लगभग 22 हजार कैदी हैं और इनमें करीब 50 प्रतिशत संख्या आदिवासी और दलितों की है।

इन आंकड़ों को ‘बेहद चिंताजनक’ करार देते हुए सिंघार ने कहा, ‘मेरा अनुरोध है कि सरकार और न्यायालय को मिलकर विचाराधीन कैदियों की सुनवाई शीघ्र पूरी करनी चाहिए। साथ ही जमानत प्रक्रिया सरल बनाने तथा जेल सुधारों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।’

भाषा ब्रजेन्द्र नोमान

नोमान


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