आधुनिकता और परंपरा के समन्वय से ही देश का संतुलित विकास संभव: राष्ट्रपति मुर्मू
आधुनिकता और परंपरा के समन्वय से ही देश का संतुलित विकास संभव: राष्ट्रपति मुर्मू
जबलपुर, 21 जून (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को युवाओं से अपनी पहचान और परंपरा की ‘पवित्रता’ बनाए रखने का आह्वान करते हुए कहा कि आधुनिकता व परंपरा के समन्वय से ही देश का संतुलित विकास संभव है।
राष्ट्रपति मुर्मू, यहां रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रही थीं।
उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती त्याग, परिश्रम और बलिदान की प्रतिमूर्ति थीं तथा नारी शक्ति के लिए प्रेरणा का प्रतीक हैं।
रानी दुर्गावती के नाम पर विश्वविद्यालय का नाम रखा गया है।
राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘विकास की दौड़ में जो लोग पीछे छूट गए हैं, उन्हें आगे लाना और मुख्यधारा से जोड़ना जरूरी है। हम सभी को मिलकर यह प्रयास करना चाहिए कि हमारे विद्यार्थियों और युवाओं को आधुनिक विकास की प्रक्रिया में सहभागी बनने का अवसर मिले।’’
उन्होंने कहा, ‘‘विद्यालयों को अपनी पहचान और परंपरा को नहीं भूलना चाहिए। इसकी पवित्रता बनाए रखना जरूरी है। आधुनिकता और परंपरा के समन्वय से ही देश का संतुलित विकास संभव है।’’
मुर्मू ने जनजातीय समाज के लोगों में कौशल और ज्ञान को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आधुनिकता के साथ विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति और परंपरा के प्रति भाव भी विकसित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों से यही अपेक्षा की जाती है।
मुर्मू ने दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में बेटियों की संख्या अधिक होने पर प्रसन्नता व्यक्त की।
उन्होंने इसे देश के सर्वांगीण विकास का प्रतीक बताते हुए कहा कि भारत युवाओं का देश है, जहां उनकी आबादी लगभग 65 प्रतिशत है।
राष्ट्रपति ने कहा कि युवाओं में कुछ भी कर गुजरने का अदम्य साहस है और देश व देशवासियों को उनसे बड़ी अपेक्षाएं हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ये अपेक्षाएं तभी पूरी होंगी, जब आपको आपकी योग्यता के अनुरूप रोजगार मिलेगा। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारें प्रयास कर रही हैं।’’ राष्ट्रपति ने कहा कि आज पूरा विश्व तेजी से बदल रहा है और इसके साथ हमारी वेशभूषा, रहन-सहन तथा जीवनशैली में भी तेजी से परिवर्तन हो रहा है।
मुर्मू ने कहा, ‘‘हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारे कुछ मूल्य हैं, जो हमें सदैव शक्ति प्रदान करते हैं। मेरा मानना है कि आप जैसे युवाओं को भारतीय संस्कृति के मूल्यों और आदर्शों को अपने जीवन का आधार बनाना चाहिए।’’
उन्होंने कहा, “ सत्य, अहिंसा, करुणा और सेवा जैसे मूल्य मानव चेतना का मूल हिस्सा हैं। इन मूल्यों को अपने जीवन में अपनाकर आप कठिन परिस्थितियों का भी सामना कर सकते हैं और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।”
राष्ट्रपति ने युवाओं को भारत का भविष्य निर्माता बताते हुए कहा कि देश का भविष्य उनके कंधों पर ही निर्भर है।
उन्होंने कहा, ‘‘आपके ज्ञान से ही विकसित भारत का सपना साकार होगा। मैं आपसे आग्रह करती हूं कि अपनी शिक्षा और प्रतिभा का उपयोग समाज के वैभव और कल्याण के लिए करें। अपने आसपास के वंचित और ग्रामीण समुदायों की समस्याओं को समझें तथा उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करें। उन्हें सशक्त बनाएं और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में अपनी भूमिका निभाएं।’’
राष्ट्रपति ने युवाओं से पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने की भी अपील की।
उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन का संरक्षण उनकी जीवन-यात्रा का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए।
भाषा ब्रजेन्द्र जितेंद्र
जितेंद्र

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