Bhind Fake Driving License Racket: शहर में यहां चल रहा था फर्जी DL रैकेट, RTO के पीछे मात्र इतने हजार में बनाते थे नकली लाइसेंस, ऐसे खुला फर्जीवाड़े का पूरा खेल
Bhind Fake Driving License Racket: शहर में यहां चल रहा था फर्जी DL रैकेट, RTO के पीछे मात्र इतने हजार में बनाते थे नकली लाइसेंस, ऐसे खुला फर्जीवाड़े का पूरा खेल
Bhind Fake Driving License RacketImage- AI Generated
- भिंड में फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस रैकेट का खुलासा
- 2500 रुपए में बनाए जा रहे थे नकली DL
- पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जांच शुरू की
Bhind Fake Driving License Racket: भिंड में फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस रैकेट का खुलासा हुआ है. पुलिस ने RTO के पीछे चल रहे इस गिरोह से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो 2500 रुपए में नकली DL बनाते थे। पुलिस ने बताया कि आरोपी RTO के पीछे 2500 में नकली ड्राइविंग लाइसेंस बनाते थे, इस नकली ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने दो आरोपी को गिरफ्तार किया है.
हैरान करने वाली बात यह है कि यह फर्जीवाड़ा जिला परिवहन कार्यालय (Bhind Fake Driving License Racket) (RTO) के ठीक पीछे खुलेआम चल रहा था. कोतवाली थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो महज 2500 रुपए में नकली लाइसेंस तैयार कर लोगों को ठग रहे थे. पुलिस ने मौके से लैपटॉप, प्रिंटर, मोबाइल फोन, फर्जी DL और सैकड़ों खाली कार्ड बरामद किए हैं. इस कार्रवाई के बाद परिवहन विभाग के आसपास सक्रिय एजेंटों और दलालों में हड़कंप मच गया है, जबकि पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच में जुटी है.
शिकायत से खुला फर्जीवाड़े का पूरा खेल
मामले का खुलासा 14 मई को उस वक्त हुआ जब एक व्यक्ति ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई. शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने 2500 रुपए देकर ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया था, लेकिन जब उसे परिवहन विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर चेक किया गया, तो वह लाइसेंस फर्जी निकला. इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की.
RTO के पीछे चल रहा था धंधा
जांच के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि जिला परिवहन कार्यालय (Bhind Fake Driving License Racket) के पीछे लंबे समय से नकली लाइसेंस बनाने का काम किया जा रहा है. इसके बाद कोतवाली थाना पुलिस ने मौके पर दबिश दी, जहां से दो आरोपी प्रमोद यादव और सुमित चौधरी को गिरफ्तार किया गया.
एजेंट बनकर लोगों को जाल में फंसाते थे आरोपी
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों में से एक परिवहन विभाग में एजेंट के तौर पर सक्रिय था. वह लोगों का भरोसा जीतकर उन्हें कम समय में लाइसेंस बनवाने का झांसा देता था. इसके बाद उनसे पैसे लेकर फर्जी लाइसेंस बनाकर दिए जाते थे. छापेमारी के दौरान पुलिस ने बड़ी मात्रा में सामग्री जब्त की, जिसमें शामिल हैं: एक लैपटॉप, प्रिंटर, एंड्रॉयड मोबाइल फोन, तीन तैयार फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस, सैकड़ों खाली प्लास्टिक कार्ड. पुलिस का मानना है कि इन्हीं उपकरणों की मदद से लंबे समय से फर्जी लाइसेंस तैयार किए जा रहे थे.
2500 रुपए में तैयार होता था नकली DL
प्रारंभिक पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आरोपी प्रति लाइसेंस (Bhind Fake Driving License Racket) करीब 2500 रुपए लेते थे. कम समय और आसान प्रक्रिया का लालच देकर वे लोगों को फंसा लेते थे. इससे न केवल लोगों के साथ धोखाधड़ी होती थी, पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद पुलिस ने रिमांड पर लिया है. अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह में और कौन-कौन शामिल है? अब तक कितने लोगों को फर्जी DL जारी किए गए. क्या परिवहन विभाग के कुछ अफसर या कर्मचारी भी इसमें शामिल हैं ?
कार्रवाई के बाद मचा हड़कंप
इस कार्रवाई के बाद RTO (Bhind Fake Driving License Racket) के आसपास सक्रिय एजेंटों और दलालों में हड़कंप मच गया है. स्थानीय व्यापारियों और लोगों ने भी पुलिस की कार्रवाई का समर्थन किया है और ऐसे फर्जी रैकेट पर सख्त कार्रवाई की मांग की है.
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