Bhopal Permanent Witness System: एक ही दिन में 10 FIR में गवाही… पुलिस की इस गजब ‘सेटिंग’ का हुआ भंडाफोड़, परमानेंट गवाहों का खेल जानकर रह जाएंगे हैरान

भोपाल के मिसरोद थाने में कथित 'परमानेंट गवाह सिस्टम' का खुलासा हुआ है। RTI से सामने आया कि चायवाला, ढाबा संचालक और पुलिस ड्राइवर को दर्जनों मामलों में गवाह बनाया गया।

Bhopal Permanent Witness System: एक ही दिन में 10 FIR में गवाही… पुलिस की इस गजब ‘सेटिंग’ का हुआ भंडाफोड़, परमानेंट गवाहों का खेल जानकर रह जाएंगे हैरान

Bhopal Permanent Witness System / Image Source : IBC24

Modified Date: June 22, 2026 / 05:19 pm IST
Published Date: June 22, 2026 5:13 pm IST
HIGHLIGHTS
  • RTI में भोपाल के मिसरोद थाने के कथित 'परमानेंट गवाह सिस्टम' का खुलासा।
  • चायवाला, ढाबा संचालक और थाने का ड्राइवर दर्जनों FIR में बने गवाह।
  • एक व्यक्ति को एक केस में गवाह और दूसरे केस में आरोपी बनाए जाने का दावा।

भोपाल : Bhopal Permanent Witness System मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के मिसरोद थाने से एक ऐसा चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ पुलिस ने अपनी सहूलियत के लिए एक ‘परमानेंट गवाह सिस्टम’ तैयार कर रखा था, जिसके तहत एक चायवाले, ढाबा संचालक और थाने के अपने ही ड्राइवर को सैकड़ों केस में फिक्स गवाह बना दिया गया। आरटीआई (RTI) से मिली जानकारी के बाद इस पूरे फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ है।आरटीआई कार्यकर्ता अजय पाटीदार द्वारा CCTNS डेटा से निकाली गई जानकारी के अनुसार, मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार के जॉइन करने के बाद यानि 2 दिसंबर 2025 से 16 अप्रैल 2026 तक महज 4 महीनों में 146 केस दर्ज हुए। इनमें से 103 FIR की पड़ताल करने पर सामने आया कि हर घटना के गवाह वही गिने-चुने चेहरे हैं।

कौन कितनी बार बना गवाह?

बता दें की इस पूरे मामले में विष्णु पाटिल उर्फ देवा ढाबा संचालक 36 केस में गवाह बना। इसके बाद सुरेश अहिरवार थाने का ड्राइवर 22 केस में गवाह बना और एक ही दिन में 10 FIR में गवाही दी। RTI Activist Ajay Patidar Reveal इसके बाद राघवेंद्र मैना जो मजदूर है वह 12 केस में गवाह बना। इसके साथ ही धर्मेंद्र कुशवाहा एक ही दिन में 3 केस में गवाह बने इतना ही नहीं खुद पुलिसकर्मी 28 मामलों में गवाह बन गए।

एक केस में गवाह एक केस में आरोपी

हैरानी की बात यह है कि पुलिस ने जिस भगवान दास नाम के व्यक्ति को 13 दिसंबर को एक केस में गवाह बनाया, उसी दिन उसे दूसरे केस में आरोपी भी बना दिया। Permanent Witness System Police थाना प्रभारी के आते ही शराब पीने के 109 केस तेजी से दर्ज किए गए और फिर अचानक बंद हो गए।इस मामले पर आरटीआई कार्यकर्ता अजय पाटीदार का कहना है कि यह न्याय प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ है और यदि थाना प्रभारी को तुरंत नहीं हटाया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

परमानेंट गवाह सिस्टम पर बड़े सवाल हुए खड़े

वहीं, मामले के बचाव में एडिशनल डीसीपी अनिल शर्मा का कहना है कि यह मामला उनके संज्ञान में आया है। चूंकि अधिकतर कार्रवाई आबकारी एक्ट की है, इसलिए जहाँ लोग शराब पीते पकड़े जाते हैं, वहाँ आसपास के ढाबा संचालक या पुलिस को गवाह बनाया जाता है। ढाबा संचालक के आसपास लोग शराब पी रहे थे, इसलिए उसकी गवाही ज्यादा हुई है। फिलहाल इस परमानेंट गवाह सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

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