विधानसभा में संघ संस्थापक हेडगेवार पर सियासी बवाल, म्यूजियम बनाने को लेकर कांग्रेस ने जताई आपत्ति

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मध्यप्रदेश सरकार आरएसएस नेता केशव बलिराम हेडगेवार की याद में म्यूजियम बनाने जा रही है। अनुपूरक बजट में बीजेपी सरकार ने 1 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। कांग्रेस ने आपत्ती जाहिर की है।

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  • Publish Date - September 15, 2022 / 03:30 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:57 PM IST

M.P Assembly K.V Hedgewar Dispute: मध्यप्रदेश सरकार आरएसएस नेता केशव बलिराम हेडगेवार की याद में म्यूजियम बनाने जा रही है। अनुपूरक बजट में बीजेपी सरकार ने 1 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। कांग्रेस ने आपत्ती जाहिर की है। कांग्रेस विधायक कुणाल चौधरी ने कहा कि जिस शख्स का मध्यप्रदेश से कोई लेना देना नहीं,जिसने कभी मध्यप्रदेश के लिए कोई काम नहीं किया। जिसने स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा नहीं लिया तो ऐसे व्यक्ति के लिए सरकार 1 करोड़ रुपए बेवजह खर्च क्यों कर रही है।ऐसा तब हो रहा है जब मध्यप्रदेश पर पौने तीन लाख करोड़ रुपए का कर्ज है। उधर बीजेपी सरकार के कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि हेडगेवार पर ऐसे करोड़ों रुपए कुर्बान हैं।

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मुख्यमंत्री ने दी जानकारी

कैबिनेट बैठक से पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी ने डॉ हेडगेवार जी के बारे जानकारी दी।डॉ हेडगेवार जी क्रांतिकारी और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे है, लेकिन उनके जीवन में ये पक्ष सामने नहीं आ पाया।कल बालाघाट जिले के रामपायली गया था, रामपायली में वे काका जी के घर रहते थे। यहां से क्रांतिकारी एवं स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित गतिविधियों का संचालन करते थे। वो देशभक्ति की भावना को प्रज्वलित करने का काम करते थे।22 जून 1897 को जब हेडगेवार जी की उम्र लगभग 8 – 9 साल की थी, तब नागपुर में रानी विक्टोरिया की 60 वी सालगिरह का कार्यक्रम हो रहा था।

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तब वहां मिली मिठाई फेंक कर आ गए थे।बड़े भाई ने पूछा कि केशव तुमने मिठाई क्यों नहीं खाई तो बालक केशव ने जवाब दिया कि भैया अंग्रेजो ने हमारे हिंदुस्तान, हमारे भोसले खानदान के खिलाफ काम किया है, हम इनके समारोह में कैसे हिस्सा ले सकते हैं और इनकी मिठाई कैसे खा सकते है।उन्होंने अंग्रेजों के एक सर्कुलर का उल्लंघन किया था, इस सर्कुलर के अनुसार कोई भी वंदे मातरम का गायन नहीं कर सकता था।बालक केशव ने स्कूल में वंदे मातरम का गायन कर, इस सर्कुलर का उल्लंघन कर विरोध किया और उन्हे स्कूल से निकाल दिया गया।

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अनुशील समित से हुई थी शुरुआत

1910 में जब वे पढ़ाई करने के लिए कलकत्ता गए थे, वहां अनुशीलन समिति से जुड़ गए। कलकत्ता में पढ़ाई करते हुए बंगाल के क्रांतिकारियों से उनका मेल मिलाप हुआ। पहले अनुशीलन समिति का साधारण सदस्य बनाया गया। उसके बाद समिति का अंतरंग सदस्य भी बना लिया गया।1915 में नागपुर लौटने पर कांग्रेस में सक्रिय हो गए। कुछ समय में विदर्भ प्रांतीय कांग्रेस के सचिव बन गए।1920 में नागपुर में कांग्रेस का राष्ट्रीय अधिवेशन हुआ, तो डॉ हेडगेवार जी ने अधिवेशन की पूरी व्यवस्थाएं संभाली।

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अग्रेजो के खिलाप भड़काया आंदोलन

डॉ हेडगेवार वर्ष 1916 में लोकमान्य तिलक जी से प्रभावित हुए जब लोकमान्य तिलक जी कारावास समाप्त कर मुक्त हुए तो उनके संपर्क में आए और भारतीय स्वतंत्रता के लिए काम करने लगेडॉ हेडगेवार कलकत्ता से एमबीबीएस करने के बाद वर्ष 1914 के बाद और आरएसएस की स्थापना वर्ष 1925 के पूर्व एक लंबे कालखंड में रामपायली में रहकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की विभिन्न गतिविधियों को संचालित करते रहे रामपायली में श्री राम मंदिर के सामने बने पुलिस थाने पर डॉ हेडगेवार ने अंग्रेजी के खिलाफ उग्र आंदोलन कर, अंग्रेजों को भागने पर मजबूर कर दिया।

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दशहरे की दिन की थी पहली सभा

डॉ हेडगेवार जी ने रामपायली में स्वतंत्रता समर के दौरान पहली सभा दशहरे के दिन की थी।स्वतंत्रता संग्राम के दौरान डॉ हेडगेवार जी ने रामपायली में रहकर जंगल सत्याग्रह सहित अनेक क्रांतिकारी गतिविधियों की रचना की।अंग्रेज सरकार के खिलाफ वे उग्र भाषण देने लगे, अंग्रेज सरकार ने उन पर भाषण बंदी का नियम भी लागू किया। परंतु हेडगेवार जी नहीं माने।वे लगातार अंग्रेजों के विरुद्ध काम करते रहे, भाषण देते रहे, खिलाफत आंदोलन, असहयोग आंदोलन के दौरान अंग्रेज सरकार ने उन पर मामला दर्ज किया और 1 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा दी।12 जुलाई 1922 को वे कारागार से मुक्त हुए। स्वतंत्रता आंदोल में भाग लेने और अंग्रेज सरकार का विरोध करने पर डॉ हेडगेवार जी 2 बार जेल भी गए।

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