कांग्रेस ने इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों को ‘सरकार और तंत्र की प्रायोजित हत्याएं’ बताया
कांग्रेस ने इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों को 'सरकार और तंत्र की प्रायोजित हत्याएं’ बताया
इंदौर (मध्यप्रदेश), चार फरवरी (भाषा) कांग्रेस ने इंदौर में दूषित पानी से 32 लोगों की मौत का दावा करते हुए बुधवार को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला और कहा कि देश के सबसे स्वच्छ शहर में हुईं ये मौतें दरअसल सरकार और तंत्र की प्रायोजित हत्याएं हैं।
प्रमुख विपक्षी दल ने इस मामले में राज्य के काबीना मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की बर्खास्तगी, शहर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव पर हत्या का मामला दर्ज किए जाने और सभी मृतकों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिए जाने की मांगें भी कीं।
कांग्रेस प्रवक्ता और पार्टी के सोशल मीडिया विभाग की प्रमुख सुप्रिया श्रीनेत ने इंदौर प्रेस क्लब में संवाददाताओं से कहा,‘‘शहर में दूषित पानी पीने से 32 लोगों की मौतें दरअसल प्रायोजित हत्याएं हैं जो सरकार और तंत्र ने की हैं। इसका जवाब सरकार को देना पड़ेगा।’’
पेयजल त्रासदी को लेकर सुर्खियों में चल रहा भागीरथपुरा, काबीना मंत्री विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र ‘इंदौर-1’ में आता है।
श्रीनेत ने मांग की कि विजयवर्गीय को मंत्रिमंडल से तुरंत बर्खास्त किया जाए, शहर के महापौर भार्गव पर हत्या का मामला दर्ज किया जाए और सभी मृतकों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा पर सत्ता का नशा इस कदर चढ़ चुका है कि उसे लोगों के दुःख-दर्द की कोई परवाह नहीं है।
कांग्रेस नेता ने कहा,’लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दिल्ली से इंदौर पहुंचकर पेयजल त्रासदी के पीड़ितों का दुःख-दर्द समझा था, लेकिन सूबे के मुख्यमंत्री मोहन यादव और स्थानीय लोकसभा सांसद शंकर लालवानी के पास भागीरथपुरा जाने का वक्त नहीं है।’’
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के आम बजट में जल जीवन मिशन के लिए 67,000 करोड़ रुपये आवंटित किए थे, लेकिन इस मद में केवल 17,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं और 50,000 करोड़ रुपये ‘बचा लिए गए’।
श्रीनेत ने कहा,’अगर सरकार द्वारा इस मद का कुछ और हिस्सा खर्च किया जाता, तो इंदौर में दूषित पेयजल से 32 लोग शायद नहीं मरते।’
अधिकारियों ने बताया कि भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से उल्टी-दस्त का प्रकोप दिसंबर के आखिर में शुरू हुआ था।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ में 27 जनवरी को राज्य सरकार की पेश ‘डेथ ऑडिट’ रिपोर्ट में संभावना जताई गई थी कि भागीरथपुरा में 16 लोगों की मौत का संबंध इस इलाके में दूषित पेयजल के कारण फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप से हो सकता है।
अदालत ने दूषित पेयजल मामले की न्यायिक जांच के लिए उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता की अगुवाई में एक सदस्यीय आयोग गठित किया है।
राज्य सरकार ने भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त के प्रकोप के दौरान मरे 20 से ज्यादा लोगों के परिवारों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की है।
अधिकारियों का दावा है कि इनमें से कुछ लोगों की मौत दूसरी बीमारियों और अन्य कारणों से भी हुई है, लेकिन सभी मृतकों के परिवारों को मानवीय आधार पर आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।
भाषा हर्ष नोमान
नोमान

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