मध्यप्रदेश में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त, सरकार ने बच्चों का भविष्य अंधकार में धकेला: कांग्रेस
मध्यप्रदेश में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त, सरकार ने बच्चों का भविष्य अंधकार में धकेला: कांग्रेस
भोपाल, दो जुलाई (भाषा) कांग्रेस ने मध्यप्रदेश के सरकारी विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं और शिक्षकों की भारी कमी को लेकर दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) का हवाला देते हुए बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य के भविष्य को भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और लापरवाही की भेंट चढ़ा दिया है।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने हाल में एक पीआईएल पर सुनवाई करते हुए केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
अदालत ने राज्य में शिक्षकों की भारी कमी और स्कूलों की खराब हालत पर चिंता जताते हुए केंद्र और राज्य सरकारों को 17 अगस्त तक विस्तृत जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
कांग्रेस की मध्यप्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक बयान में कहा, “आज प्रदेश के सरकारी स्कूलों की स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि खुद मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा है और केंद्र व राज्य सरकार से जवाब तलब करना पड़ा है।”
उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय में पेश तथ्यों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के शिक्षा मॉडल की वास्तविकता उजागर कर दी है।
पटवारी ने कहा, “प्रदेश में शिक्षकों के 2.89 लाख स्वीकृत पदों में से 1, 15,678 पद रिक्त हैं। यानी लगभग 40 प्रतिशत शिक्षक पद खाली पड़े हैं। सबसे शर्मनाक स्थिति यह है कि 1,895 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं है।”
कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि आखिर बिना शिक्षक के बच्चों का भविष्य कैसे बनाया जाएगा।
उन्होंने उच्च न्यायालय में पेश आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पिछले 10 वर्षों में सरकारी स्कूलों से 22.03 लाख छात्र कम हो गए हैं।
पटवारी ने कहा, “यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि प्रदेश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था से जनता के टूटते विश्वास का प्रमाण है। जब सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में विफल रहती है, शिक्षकों की भर्ती नहीं करती और स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराती, तो स्वाभाविक रूप से अभिभावक सरकारी स्कूलों से दूरी बनाने लगते हैं।”
पटवारी ने कहा कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों की स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि 5,000 स्कूलों के भवन जर्जर हैं, 3,400 स्कूलों में शौचालय नहीं हैं, 10 हजार स्कूलों में बिजली की सुविधा नहीं है, 40 हजार स्कूलों में चारदीवारी नहीं है और 59 हजार स्कूलों में कंप्यूटर तक उपलब्ध नहीं हैं, जबकि हजारों स्कूलों में शुद्ध पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव है।
उन्होंने कहा, “यह स्थिति बताती है कि भाजपा सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह भगवान भरोसे छोड़ दिया है।”
पटवारी ने आरोप लगाया कहा कि भाजपा सरकार ने प्रदेश को पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज में डुबो दिया, लेकिन शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, नये स्कूल बनाने, शिक्षकों की भर्ती करने और छात्रों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किया।
उन्होंने सवाल किया कि अगर सरकार के पास कर्ज लेने के लिए संसाधन थे, तो प्रदेश के बच्चों का भविष्य संवारने के लिए इच्छाशक्ति क्यों नहीं थी।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 45 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत प्रत्येक बच्चे को निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है, लेकिन भाजपा सरकार इस दायित्व को निभाने में पूरी तरह विफल रही है।
उन्होंने कहा कि यही कारण है कि आज उच्च न्यायालय को सरकार से जवाब मांगना पड़ रहा है।
पटवारी ने मांग की कि राज्य सरकार तत्काल सभी 1,15,678 रिक्त शिक्षक पदों पर पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया शुरू करे, शिक्षकविहीन 1,895 स्कूलों में तत्काल शिक्षकों की नियुक्ति करे, जर्जर स्कूल भवनों का पुनर्निर्माण कराए, सभी स्कूलों में बिजली, शौचालय, पेयजल, कंप्यूटर एवं चारदीवारी जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराए तथा सरकारी शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना सार्वजनिक करे।
पटवारी ने कहा कि बच्चों का भविष्य किसी भी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए, लेकिन भाजपा सरकार ने मध्यप्रदेश के भविष्य को भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और लापरवाही की भेंट चढ़ा दिया है।
भाषा
ब्रजेन्द्र पारुल
पारुल

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