शक्कर की कीमतों में वृद्धि के लिए सरकार की एथनॉल नीति जिम्मेदार: माकपा

शक्कर की कीमतों में वृद्धि के लिए सरकार की एथनॉल नीति जिम्मेदार: माकपा

शक्कर की कीमतों में वृद्धि के लिए सरकार की एथनॉल नीति जिम्मेदार: माकपा
Modified Date: August 23, 2026 / 05:02 pm IST
Published Date: August 23, 2026 5:02 pm IST

भोपाल, 23 अगस्त (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने रविवार को भाजपा नीत केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए दावा किया कि गन्ने को एथनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल करने से शक्कर की कीमतें बढ़ी हैं, जिसकी वजह से इस बार राखी जैसे त्योहार की मिठास फीकी पड़ गई है।

विपक्षी पार्टियां पेट्रोल में एथनॉल के बढ़ते मिश्रण को लेकर लगातार केंद्र पर निशाना साधते हुए आरोप लगा रही हैं कि इस नीति से शक्कर की कीमतें बढ़ रही हैं और लोगों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है।

सरकार ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि कि घरेलू मांग पूरी करने के लिए देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक है।

सरकार ने मौजूदा स्थिति के लिए उद्योग जगत को दोषी ठहराया है।

किराने की दुकान के मालिकों के अनुसार, मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में चीनी की कीमत एक सप्ताह पहले 65 रुपये प्रति किलोग्राम थी जो बढ़कर 70 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है।

माकपा ने सरकार से चीनी की कीमतों में हुई वृद्धि को वापस लेने की मांग की।

मध्यप्रदेश माकपा सचिव जसविंदर सिंह ने एक बयान में आरोप लगाया कि सरकार उपभोक्ताओं की तुलना में कॉरपोरेट घरानों और एथनॉल उत्पादकों के हितों की रक्षा के बारे में अधिक चिंतित है।

उन्होंने कहा कि गन्ने को एथनॉल उत्पादन के परिणामों के बारे में चेतावनी दी गई थी, लेकिन सरकार ने एथनॉल को बढ़ावा देना जारी रखा।

सिंह ने दावा किया कि करीब 25 लाख टन गन्ना एथनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया गया है, जिससे चीनी की कमी और इसकी कीमतों में वृद्धि हुई है।

उन्होंने कहा, ‘सरकार अब भी चीनी की कीमतों में अचानक वृद्धि का कारण बताने को तैयार नहीं है। इससे 28 अगस्त को मनाए जाने वाले रक्षाबंधन त्योहार की मिठास फीकी होना तय है।’

सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार अब चीनी आयात पर विचार कर रही है, लेकिन एथनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के इस्तेमाल को प्रतिबंधित करने के बारे में बात नहीं कर रही।

उन्होंने दावा किया कि अगर आयात प्रक्रिया तुरंत शुरू हो जाती है, तो भी चीनी की भारत में आपूर्ति में दो महीने से अधिक का समय लग सकता है, जो दिवाली के दौरान कीमतों को भी प्रभावित कर सकता है।

सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों का उद्देश्य एथनॉल उत्पादकों के मुनाफे की रक्षा करना है, जबकि आम उपभोक्ताओं को बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ रहा है।

भाषा ब्रजेन्द्र जोहेब

जोहेब


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