मध्यप्रदेश : एनएसयूआई का सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में अनियमितताओं का दावा

मध्यप्रदेश : एनएसयूआई का सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में अनियमितताओं का दावा

मध्यप्रदेश : एनएसयूआई का सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में अनियमितताओं का दावा
Modified Date: August 23, 2026 / 07:07 pm IST
Published Date: August 23, 2026 7:07 pm IST

भोपाल, 23 अगस्त (भाषा) कांग्रेस की छात्र इकाई भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) ने रविवार को कहा कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा संचालित नर्सिंग कॉलेजों में प्राचार्यों, उप-प्रधानाचार्यों और आवश्यक शिक्षकों की कमी समेत कई समस्याएं हैं।

एनएसयूआई ने आरोप लगाया कि कुछ कॉलेजों ने संकाय सदस्यों के फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र जमा किए हैं और मामले की एक उच्च स्तरीय जांच की जानी चाहिए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं की गई तो वह आंदोलन का रास्ता अख्तियार करने को मजबूर होगा।

एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने यहां संवाददाता सम्मेलन के दौरान दावा किया कि छह सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में प्राचार्य, 10 में उप प्राचार्य और कई अन्य में मध्यप्रदेश सरकार के 2018 के मान्यता नियमों के तहत आवश्यक शिक्षकों की कमी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ कॉलेजों ने 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए मान्यता के सिलसिले में संकाय सदस्यों के फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र तक जमा किए हैं।

उन्होंने कहा कि 22 सरकारी नर्सिंग कॉलेजों ने मान्यता के लिए आवेदन जमा किए थे, जिनमें से तीन को मान्यता नहीं दी गई थी।

एनएसयूआई से जुड़े एक वकील ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि एनएसयूआई ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कथित अनियमितताओं की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

एक अन्य वकील ने कहा कि 2018 के नियमों के तहत नर्सिंग कॉलेजों के लिए 30 छात्रों के प्रवेश के लिए एक प्रिंसिपल, उप-प्रधानाचार्य, दो एसोसिएट प्रोफेसर और अन्य शिक्षण कर्मचारियों सहित न्यूनतम संकाय आवश्यकताओं को निर्धारित हैं।

भाषा ब्रजेन्द्र जोहेब

जोहेब


लेखक के बारे में