Gwalior Fake CEO Case: फर्जी सर्टिफिकेट और सैलरी स्लिप लगाकर CEO बन गया युवक, कंपनी हर महीने देती रही 2.83 लाख सैलरी, एक साल बाद ऐसे खुली पोल

Ads

Gwalior Fake CEO Case: फर्जी सर्टिफिकेट और सैलरी स्लिप लगाकर CEO बन गया युवक, कंपनी हर महीने देती रही 2.83 लाख सैलरी, एक साल बाद ऐसे खुली पोल

Gwalior Fake CEO Case: फर्जी सर्टिफिकेट और सैलरी स्लिप लगाकर CEO बन गया युवक, कंपनी हर महीने देती रही 2.83 लाख सैलरी, एक साल बाद ऐसे खुली पोल /image: AI Generated

HIGHLIGHTS
  • फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के सहारे युवक ने हासिल की VP की नौकरी, बाद में CEO बनने का आरोप
  • कंपनी करीब एक साल तक हर महीने 2.83 लाख रुपये वेतन देती रही
  • दस्तावेजों की जांच में कथित फर्जीवाड़े का खुलासा, आरोपी के खिलाफ FIR दर्ज

ग्वालियर। Gwalior Fake CEO Case: ग्वालियर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक युवक ने फर्जी दस्तावेजों के दम पर न सिर्फ नामी ऑटोमोबाइल कंपनी में ग्रुप वाइस प्रेसिडेंट की नौकरी हासिल कर ली बल्कि प्रमोट होकर कंपनी का CEO भी बन गया। कंपनी उसे हर महीने 2 लाख 83 हजार रुपये सैलरी देती रही। करीब 1 साल बाद जब टारगेट पूरा नहीं हुआ और काम पर शक हुआ तो पोल खुल गई। क्राइम ब्रांच ने अब फर्जी CEO के खिलाफ FIR दर्ज की है।

सारे सर्टिफिकेट और सैलरी स्लिप निकली फर्जी (Fake Documents Job Fraud)

दअरसल, मामला ग्वालियर की श्री तुलजा भवानी ऑटोमोबाइल कंपनी का है। आरोपी युवक का नाम देवेंद्र कुमार दुबे है जो उत्तर प्रदेश के कानपुर का रहने वाला है। पुलिस के मुताबिक पिछले साल कंपनी ने ग्रुप वाइस प्रेसिडेंट पद के लिए वैकेंसी निकाली थी। देवेंद्र ने इस पर आवेदन किया। उसने अपने आवेदन के साथ लैंडमार्क ग्रुप कंपनी के फर्जी एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट (Fake Experience Certificate) और 2.83 लाख रुपये की फर्जी सैलरी स्लिप लगाई।

प्रमोशन के बाद बन गया कंपनी का CEO (CEO Fraud Case)

Gwalior Fake CEO Case कंपनी ने दस्तावेजों पर भरोसा कर उसे ग्रुप वाइस प्रेसिडेंट के पद पर रख लिया और बाद में प्रमोट कर CEO बना दिया। करीब 1 साल तक कंपनी उसे हर महीने 2 लाख 83 हजार रुपये वेतन देती रही। लेकिन इस दौरान उसकी कार्यशैली कंपनी को संदिग्ध लगने लगी। उसने कंपनी को बिजनेस का जो बड़ा टारगेट पूरा करने का दावा किया था वह भी पूरा नहीं हो रहा था।

FIR दर्ज, आरोपी फरार ( Madhya Pradesh Latest News)

शक होने पर कंपनी मैनेजमेंट ने HR मैनेजर से उसके दस्तावेजों की गोपनीय जांच कराई। जब लैंडमार्क ग्रुप से संपर्क किया गया तो पता चला कि देवेंद्र नाम का कोई व्यक्ति कभी उस कंपनी में काम ही नहीं करता था। उसके सारे सर्टिफिकेट और सैलरी स्लिप फर्जी है। खुलासे के बाद कंपनी ने क्राइम ब्रांच में शिकायत की। शिकायत के आधार पर क्राइम ब्रांच थाने में FIR दर्ज कर ली गई है। फिलहाल आरोपी देवेंद्र फरार है। क्राइम ब्रांच उसकी तलाश में दबिश दे रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि क्या आरोपी ने इसी तरह फर्जी दस्तावेजों से पहले भी कहीं नौकरी की है।

Gwalior Crime Branch FIR ग्वालियर CSP मनीष यादव ने मामले पर कहा कि कंपनी की शिकायत पर आरोपी देवेंद्र दुबे के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज बनाने का केस दर्ज किया गया है। कंपनी से उसके दस्तावेज मांगे गए हैं, जांच की जा रही है। (Gwalior Fake CEO Case)

ये भी पढ़ें

फर्जी CEO का मामला कहां का है?

यह मामला मध्य प्रदेश के ग्वालियर का है।

आरोपी का नाम क्या है?

पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान देवेंद्र कुमार दुबे के रूप में हुई है, जो कानपुर का रहने वाला बताया गया है।

आरोपी ने कंपनी में कौन-कौन से पद संभाले?

आरोप है कि उसने पहले ग्रुप वाइस प्रेसिडेंट की नौकरी हासिल की और बाद में प्रमोट होकर CEO बन गया।

कंपनी आरोपी को कितनी सैलरी दे रही थी?

कंपनी कथित तौर पर उसे हर महीने 2 लाख 83 हजार रुपये वेतन देती रही।

फर्जीवाड़े का खुलासा कैसे हुआ?

कामकाज और टारगेट पूरे न होने पर कंपनी को शक हुआ। इसके बाद दस्तावेजों की जांच कराई गई, जिसमें कथित तौर पर फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और सैलरी स्लिप का खुलासा हुआ।