Indore MY Hospital Medical Negligence : मां भीगी चुन्नी से बचाती रही, पिता खींचता रहा स्ट्रेचर! तड़पते मासूम की तस्वीर ने खोली सरकारी अस्पतालों की हकीकत
इंदौर के एमवाय अस्पताल और सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। एक बीमार बच्चे को रेफर किए जाने के बाद उसके परिजन करीब एक किलोमीटर तक स्ट्रेचर खींचकर ले जाने को मजबूर हुए। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर बहस तेज हो गई है।
dore MY Hospital Medical Negligence / Image Source : FILE
- एमवाय अस्पताल से सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल रेफर किया गया बच्चा
- परिजन करीब 1 किलोमीटर तक स्ट्रेचर खींचकर ले जाने को मजबूर
- भीषण गर्मी में मां बच्चे को भीगी चुन्नी से राहत देती रही
इंदौर: Indore MY Hospital Medical Negligence : मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। एमवाय अस्पताल और सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के बीच रेफर किए गए एक बीमार बच्चे को उसके परिजन करीब एक किलोमीटर तक स्ट्रेचर पर ले जाने को मजबूर हो गए। भीषण गर्मी के बीच मां अपने बेटे को भीगी चुन्नी से राहत पहुंचाती रही, जबकि पिता स्ट्रेचर खींचते नजर आए। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद अस्पतालों की व्यवस्थाओं और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
खुद स्ट्रेचर ले जाने पर मजबूर मां-बाप
इंदौर के एमवाय अस्पताल और सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में मरीजों को बेहतर इलाज और सुविधाएं देने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां करती नजर आ रही है।Indore Hospital Stretcher Controversy सामने आए दृश्य में एक बीमार बच्चे को इलाज के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल ले जाया जा रहा है। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की मदद नहीं मिली, जिसके चलते उन्हें खुद ही स्ट्रेचर खींचकर बच्चे को दूसरे अस्पताल तक ले जाना पड़ा।
व्यवस्थाओं की हकीकत आई सामने
भीषण गर्मी के बीच मां लगातार भीगी चुन्नी से बच्चे को राहत पहुंचाने की कोशिश करती रही, जबकि पिता स्ट्रेचर को धक्का देकर अस्पताल तक पहुंचाने में जुटे रहे। Super Speciality Hospital Indore Viral Video अस्पताल परिसर में मरीजों और परिजनों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं को लेकर यह तस्वीर कई सवाल खड़े करती है। करोड़ों रुपये खर्च कर स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जब मरीज और उनके परिजन खुद ही सहारा बनने को मजबूर हों, तो व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति सामने आ जाती है।
जिम्मेदार अधिकारी क्या लेंगे एक्शन?
यह घटना एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में स्ट्रेचर, व्हीलचेयर, सहायक स्टाफ और मरीज परिवहन जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता पर सवाल खड़े कर रही है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और मरीजों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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