पीएमटी में चयन के नाम पर डॉक्टर से ठगी मामले में अंतरप्रांतीय गिरोह के तीन सदस्यों को सश्रम कारावास

पीएमटी में चयन के नाम पर डॉक्टर से ठगी मामले में अंतरप्रांतीय गिरोह के तीन सदस्यों को सश्रम कारावास

Modified Date: December 11, 2021 / 07:55 pm IST
Published Date: December 11, 2021 7:55 pm IST

इंदौर, 11 दिसंबर (भाषा) मध्यप्रदेश के कुख्यात व्यापमं घोटाले से जुड़े़ अंतरप्रांतीय पीएमटी चयन गिरोह के तीन सदस्यों को इंदौर की विशेष सीबीआई अदालत ने शनिवार को पांच-पांच साल के सश्रम कारावास और 8,000-8,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

व्यापमं घोटाले के मामलों के लिए गठित विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश संजय कुमार गुप्ता ने बिहार निवासी सौरव कुमार सिंह, छत्तीसगढ़ निवासी उमेश श्रीवास्तव और उत्तरप्रदेश निवासी प्रवीण सिंह को भारतीय दंड विधान की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (दस्तावेजों की जालसाजी) और अन्य प्रावधानों के तहत दोषी करार दिया।

विशेष लोक अभियोजक रंजन शर्मा ने बताया कि सीबीआई ने अदालत में तीनों व्यक्तियों के खिलाफ आरोप साबित किया कि उन्होंने व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) के वर्ष 2012 में आयोजित प्री-मेडिकल टेस्ट (पीएमटी) में इंदौर के एक डॉक्टर के बेटे का चयन कराने के नाम पर उसके पिता से 13 लाख रुपये ठग लिए।

उन्होंने बताया कि सीबीआई ने पीएमटी चयन गिरोह के सदस्यों पर जुर्म साबित करने के लिए अदालत में 41 गवाह पेश किए थे।

शर्मा ने बताया कि गिरोह के एक फरार सदस्य सेतु राज को भी विशेष अदालत ने दोषी करार दिया है और उसकी गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी किया है। सेतु राज बिहार का रहने वाला है।

उच्चतम न्यायालय के वर्ष 2015 में दिए गए आदेश के तहत व्यापमं घोटाले से जुड़े़ मामलों की जांच सीबीआई कर रही है।

गौरतलब है कि व्यापमं की आयोजित प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली सामने आने से हुई किरकिरी के बाद राज्य सरकार ने इसका आधिकारिक नाम बदलकर ‘प्रोफेशनल एक्जामिनेशन बोर्ड’ कर दिया था।

भाषा हर्ष

अमित रंजन

रंजन


लेखक के बारे में