Tantya Mama Statue Scam: 9.90 लाख का टेंडर और 50 हजार की मूर्ति, टंट्या मामा की प्रतिमा में धांधली, नप गए दो बड़े अधिकारी

मध्य प्रदेश के खरगोन ज़िले में टंट्या मामा भील की प्रतिमा स्थापना में बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है। 9.90 लाख रुपये के टेंडर में संगमरमर या अष्ट धातु की जगह फाइबर की मूर्ति लगाए जाने के मामले में जांच के बाद सहायक यंत्री और सब इंजीनियर को निलंबित कर दिया गया है।

Tantya Mama Statue Scam: 9.90 लाख का टेंडर और 50 हजार की मूर्ति, टंट्या मामा की प्रतिमा में धांधली, नप गए दो बड़े अधिकारी

Tantya Mama Statue Scam/ Image Source : IBC24 / FILE

Modified Date: January 24, 2026 / 01:37 pm IST
Published Date: January 24, 2026 1:36 pm IST
HIGHLIGHTS
  • टंट्या मामा की मूर्ति स्थापना में 9.90 लाख रुपये के टेंडर में फाइबर की प्रतिमा लगाए जाने का मामला सामने आया।
  • जांच के बाद सहायक यंत्री और सब इंजीनियर को किया गया निलंबित।
  • कांग्रेस और बीजेपी पार्षदों ने मिलकर किया विरोध, कलेक्टर के आदेश पर हुई कार्रवाई।

खरगोन: मध्य प्रदेश के खरगोन ज़िले से बीते दिनों टंट्या मामा भील की प्रतिमा लगाने में बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया था, जहां 9.90 लाख रुपये में टंट्या मामा की मूर्ति लगाने का टेंडर पास हुआ था। मूर्ति संगमरमर और अष्ट धातु की जगह फाइबर से बनाकर लगाई गई थी। इस पूरे मामले में अब जांच के बाद सहायक यंत्री और सब इंजीनियर को निलंबित कर दिया गया है। जांच में सामने आया है कि इस पूरे मामले में ठेकेदार ने सहायक यंत्री और सब इंजीनियर से सत्यापन ही नहीं लिया था।

संगमरमर या अष्ट धातु से बनाई जानी थी मूर्ति

मिली जानकारी के अनुसार, पूरा मामला खरगोन के बिस्टान नाका तिराहे का है। Madhya Pradesh Corruption News 24 सितंबर 2025 को नगरपालिका परिषद ने तिराहे के सौंदर्यीकरण के लिए 40 लाख रुपये का बजट पास किया था। इस टेंडर में 9.90 लाख रुपये टंट्या मामा की मूर्ति के लिए पास हुए थे। कलेक्टर ने साफ आदेश दिया था कि मूर्ति संगमरमर या अष्ट धातु से बनी होनी चाहिए, लेकिन 5 नवंबर 2025 को मूर्ति के लोकार्पण के बाद बवाल खड़ा हो गया।

फाइबर से 50 हज़ार रुपये से बनी मूर्ति

कांग्रेस के साथ-साथ बीजेपी पार्षदों ने मूर्ति को देखकर मोर्चा खोल दिया, क्योंकि मूर्ति फाइबर से बनी हुई थी और उसकी वास्तविक कीमत सिर्फ 50 हजार रुपये थी। Tantya Bhil Statue Fraud इस मामले के सामने आने के बाद कलेक्टर ने तुरंत जांच के आदेश देते हुए संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। वहीं कांग्रेस के साथ-साथ बीजेपी पार्षदों ने भी इसका विरोध किया था। कलेक्टर द्वारा गठित टीम की जांच में यह बात सामने आई कि पूरे मामले में सहायक यंत्री और सब इंजीनियर ने ठेकेदार से सत्यापन ही नहीं लिया था।

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