त्विषा शर्मा मौत मामले में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने गिरिबाला की अग्रिम जमानत रद्द की
त्विषा शर्मा मौत मामले में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने गिरिबाला की अग्रिम जमानत रद्द की
जबलपुर, 28 मई (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने त्विषा शर्मा मौत मामले में उसकी सास और पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी है।
बुधवार देर रात जारी अपने 17 पन्नों के आदेश में न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा की एकल पीठ ने कहा, ‘‘मामले के तथ्यात्मक पहलुओं और प्रतिवादी (गिरिबाला सिंह) के खिलाफ लगाए गए आरोपों के आलोक में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, भोपाल द्वारा 15 मई 2026 को पारित अग्रिम जमानत आदेश को रद्द किया जाता है।’’
वरिष्ठ अधिवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने ‘पीटीआई-भाषा’ से फोन पर कहा, ‘‘अंतत: त्विषा मामले में न्याय हो गया।’’
श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘गिरिबाला के 36 साल तक न्यायिक सेवा में रहने के बाद अगर उनके मन में कानून के प्रति कोई सम्मान है तो मुझे लगता है कि उन्हें शालीनता से सीबीआई के समक्ष आत्मसमर्पण करना चाहिए और आगे की जांच में जांच एजेंसी के साथ सहयोग करना चाहिए।’’
मामले में राज्य सरकार की ओर से दलील रखते हुए वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा और त्विषा के परिजनों के वकील श्रीवास्तव ने अदालत से कहा कि आरोपी गिरिबाला सिंह एक सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी हैं और उन्होंने साइबर अपराधों, साइबर फोरेंसिक और डिजिटल सिग्नेचर तकनीक के साथ ही अपराध दृश्य के प्रबंधन पर विशेष पाठ्यक्रमों का प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
उन्होंने कहा कि ऐसे में गिरिबाला सिंह के अपराध स्थल से छेड़छाड़ करने की आशंका भी है।
वकीलों ने दलील दी कि भोपाल जिला अदालत ने गिरिबाला को 24 घंटे में जमानत दे दी थी जबकि मामला प्रारंभिक चरण में था और महत्वपूर्ण बयान ही दर्ज नहीं हुए थे।
उन्होंने कहा कि त्विषा के व्हाट्सऐप चैट और केस डायरी में प्रताड़ना का स्पष्ट उल्लेख है लेकिन इन्हें भी नजरंदाज किया गया।
इससे पहले, जबलपुर में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने समर्थ सिंह की मां और सेवानिवृत्त न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द करने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
दोपहर में भोपाल की एक अदालत ने त्विषा के पति समर्थ सिंह को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की हिरासत में भेज दिया, जिसके बाद केंद्रीय एजेंसी ने उसके घर ले जाकर उससे पूछताछ की।
त्विषा शर्मा राजधानी भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में 12 मई को अपने ससुराल में कथित तौर पर फांसी पर लटकी मिली थीं। सीबीआई ने सोमवार को शर्मा की मौत की जांच अपने हाथों में ले ली थी।
सीबीआई ने मामले को हाथ में लेने के बाद फिर से प्राथमिकी दर्ज की है, जिसमें समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह को आरोपी के रूप में नामजद किया गया है।
त्विषा के परिजनों के वकील अंकुर पांडे ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से बातचीत में कहा कि समर्थ को राज्य पुलिस के विशेष जांच दल (एसआईटी) ने जबलपुर से गिरफ्तार किया था और फिर उसे भोपाल लाया गया था, जहां उसे मजिस्ट्रेट अदालत ने सात दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया था।
उन्होंने कहा कि चूंकि एसआईटी को अब समर्थ सिंह की हिरासत की आवश्यकता नहीं है क्योंकि जांच सीबीआई को सौंप दी गई है, इसलिए आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां संघीय एजेंसी ने उसकी रिमांड की मांग की। समर्थ सिंह पेशे से वकील है।
उन्होंने कहा कि अदालत ने समर्थ को सीबीआई की हिरासत में भेज दिया।
पांडे ने कहा कि चूंकि आरोपी की हिरासत और सभी संबंधित दस्तावेज अब सीबीआई को सौंप दिए गए हैं, इसलिए मामले में आगे की जांच केंद्रीय एजेंसी द्वारा की जाएगी।
उन्होंने कहा मजिस्ट्रेट की अदालत में हुई आज की कार्यवाही महज एक औपचारिकता बताया और कहा कि इससे आगे कोई भी कानूनी कार्यवाही संबंधित सीबीआई अदालत में होगी।
बाद में सीबीआई की एक टीम समर्थ सिंह के साथ उनकी मां गिरिबाला सिंह के घर पहुंची।
राज्य पुलिस से जांच अपने हाथ में लेते हुए सीबीआई ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 80 (2) (दहेज हत्या के लिए सजा), 85 (पति या उसके रिश्तेदार द्वारा महिला को क्रूरता के अधीन करना) और 3 (5) (साझा मंशा) के साथ-साथ दहेज निषेध अधिनियम के प्रावधानों को भी लागू किया, जो राज्य पुलिस द्वारा भी लगाए गए थे।
भोपाल पुलिस ने त्विषा की मौत के दो दिन बाद प्राथमिकी दर्ज की थी।
अपने बयानों में, त्विषा के परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया कि उसे उसके ससुराल वालों द्वारा प्रताड़ित किया गया था। उन्होंने दावा किया कि ससुराल पक्ष नौ दिसंबर, 2025 को उसकी शादी के समय दिए गए दहेज से संतुष्ट नहीं था।
उन्होंने उसके ससुराल वालों पर मानसिक प्रताड़ना और घरेलू हिंसा का आरोप लगाया और दावा किया कि 33 वर्षीय पूर्व मिस पुणे को यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया गया।
हालांकि, कई मीडिया साक्षात्कारों में त्विषा की सास ने उसके कथित चिकित्सा उपचार और मानसिक स्थिति पर सवाल उठाया है। समर्थ सिंह को 10 दिनों तक फरार रहने के बाद 22 मई को जबलपुर से गिरफ्तार किया गया था।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद रविवार को एम्स-दिल्ली के डॉक्टरों की एक टीम ने भोपाल में त्विषा का दूसरा पोस्टमॉर्टम किया था।
भाषा ब्रजेन्द्र गोला
गोला

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