मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने प्रश्नपत्र लीक मामलों के लिए चार विशेष त्वरित अदालतें गठित कीं

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने प्रश्नपत्र लीक मामलों के लिए चार विशेष त्वरित अदालतें गठित कीं

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने प्रश्नपत्र लीक मामलों के लिए चार विशेष त्वरित अदालतें गठित कीं
Modified Date: July 25, 2026 / 11:16 am IST
Published Date: July 25, 2026 11:16 am IST

जबलपुर, 25 जुलाई (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक और उनसे जुड़ी अनियमितताओं के मामलों की सुनवाई के लिए चार विशेष त्वरित अदालतें गठित की हैं। न्यायालय ने निर्देश दिया है कि आरोपपत्र दाखिल होने की तिथि से तीन महीने के भीतर इन मामलों का निपटारा करने का हरसंभव प्रयास किया जाए।

यह फैसला परीक्षा में गड़बड़ियों, विशेषकर राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए केंद्र सरकार द्वारा त्वरित अदालत गठित करने का आश्वासन दिए जाने के दो दिन बाद आया है। मई में नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक होने के बाद छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किए थे तथा अनियमितताओं के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की थी।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया ने शुक्रवार रात जारी आदेश में चार जिलों के जिला एवं अपर सत्र न्यायालयों को ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024’ और उससे संबंधित अपराधों की सुनवाई के लिए विशेष त्वरित अदालत के रूप में अधिसूचित किया।

इससे एक दिन पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में प्रश्नपत्र लीक के मामलों की त्वरित सुनवाई, शीघ्र न्याय और दोषियों को कड़ी सजा सुनिश्चित करने के लिए विशेष त्वरित अदालत स्थापित किए जाने की घोषणा की थी।

सरकारी बयान के अनुसार इन न्यायालयों में भोपाल में 18वें जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रवीण पटेल, ग्वालियर में आठवें जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश विशाल अखंड, जबलपुर में 27वें जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश आनंद कुमार सेहलाम तथा इंदौर में 26वें जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश डॉ. शुभ्रा सिंह को नामित किया गया है।

बयान में कहा गया है कि इस पहल का उद्देश्य लोक परीक्षाओं की शुचिता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना तथा ऐसे मामलों का त्वरित और प्रभावी न्यायिक निपटारा सुनिश्चित करना है।

इसके अनुसार, ये विशेष त्वरित न्यायालय ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024’ के तहत दंडनीय अपराधों के अलावा ऐसे मामलों से संबंधित ‘भारतीय न्याय संहिता, 2023’ के प्रावधानों के अंतर्गत आने वाले मामलों तथा राज्य या केंद्र सरकार द्वारा संदर्भित और संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा जांच किए गए अन्य मामलों की भी सुनवाई करेंगे।

बयान में कहा गया है कि प्रत्येक विशेष त्वरित अदालत का अधिकार क्षेत्र उसके मुख्यालय से संबद्ध निर्धारित जिलों तक होगा। इससे इन चार न्यायालयों के माध्यम से पूरे प्रदेश में प्रभावी न्यायिक व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकेगी।

उच्च न्यायालय ने संबंधित प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को यह भी निर्देश दिया है कि नामित विशेष त्वरित अदालत आरोपपत्र दाखिल होने की तिथि से तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर निर्णय सुनाने का हरसंभव प्रयास करें।

बयान के अनुसार, इन विशेष त्वरित अदालतों की स्थापना से सार्वजनिक परीक्षाओं से जुड़े अपराधों के मामलों में अभियोजन प्रक्रिया में तेजी आएगी और शीघ्र न्याय सुनिश्चित होने की उम्मीद है।

भाषा सं दिमो सिम्मी खारी

खारी


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