मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने जहरीले कफ सिरप मामले में दो आरोपियों को सशर्त जमानत दी
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने जहरीले कफ सिरप मामले में दो आरोपियों को सशर्त जमानत दी
जबलपुर, एक जुलाई (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने छिंदवाड़ा में पिछले वर्ष जहरीले कफ सिरप से 20 से अधिक बच्चों की मौत के मामले में गिरफ्तार दो ‘मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव’ को सशर्त जमानत दे दी। उनके वकील ने बुधवार को यह जानकारी दी।
वकील ने बताया कि न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी की एकल पीठ ने मंगलवार को आरोपी सतीश वर्मा और शैलेश सिंह पंड्या को राहत दी।
याचिका में दोनों आरोपियों ने कहा था कि जहरीले कफ सिरप के उत्पादन से उनका कोई संबंध नहीं था।
उन्होंने कहा कि मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के रूप में उन्होंने केवल कंपनी को दवा आपूर्ति के लिए ऑर्डर दिए थे और उन्हें दवा में किसी तरह की मिलावट या खामी की जानकारी नहीं थी।
याचिका में यह भी कहा गया कि दवा के भंडारण, वितरण या नष्ट करने में भी उनकी कोई भूमिका नहीं थी।
दोनों आरोपियों की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता संकल्प कोचर ने बताया कि पुलिस जांच पूरी कर अदालत में संबंधित दस्तावेज पेश कर चुकी है और मामले की सुनवाई में समय लग सकता है।
उन्होंने कहा कि सतीश वर्मा अक्टूबर 2025 तथा शैलेश सिंह पंड्या नवंबर 2025 से न्यायिक हिरासत में हैं।
हालांकि, राज्य सरकार ने जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि दोनों आरोपी इस पूरे प्रकरण में शामिल थे।
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि दोनों आरोपी मुख्य आरोपी डॉ. प्रवीण सोनी और दवा कंपनी के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम कर रहे थे तथा जांच में उनके खिलाफ महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद एकल पीठ ने दोनों आरोपियों को सशर्त जमानत दे दी।
उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2025 में छिंदवाड़ा जिले में ‘कोल्ड्रिफ’ कफ सिरप का सेवन करने के बाद बच्चों के बीमार पड़ने के मामले सामने आए थे। बच्चों में उल्टी, पेशाब नहीं होने और बुखार जैसे लक्षण पाए गए थे।
जांच में पता चला था कि सिरप में ‘डाइएथिलीन ग्लाइकोल’ नामक विषैला रसायन मिला था, जिससे गुर्दे खराब हो सकते हैं। इस मामले में दवा कंपनी के मालिक और इस सिरप के सेवन की कथित तौर पर सलाह देने वाले एक सरकारी चिकित्सक को गिरफ्तार किया गया था।
अधिकारियों ने बताया ऊचेन्नई की सरकारी औषधि परीक्षण प्रयोगशाला में जांचे गए सिरप के नमूने को तमिलनाडु औषधि नियंत्रण निदेशालय ने ‘मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं’ घोषित किया था।
भाषा सं दिमो जोहेब
जोहेब

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