मप्र रास चुनाव: सेंधमारी के डर से कांग्रेस के विधायकों का पहला जत्था कर्नाटक रवाना

मप्र रास चुनाव: सेंधमारी के डर से कांग्रेस के विधायकों का पहला जत्था कर्नाटक रवाना

मप्र रास चुनाव: सेंधमारी के डर से कांग्रेस के विधायकों का पहला जत्था कर्नाटक रवाना
Modified Date: June 9, 2026 / 05:18 pm IST
Published Date: June 9, 2026 5:18 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

भोपाल, नौ जून (भाषा) मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए 18 जून को होने वाले मतदान में क्रॉस वोटिंग से बचने और अपने खेमे को एकजुट रखने के मकसद से कांग्रेस के 35 विधायकों का पहला जत्था एक विशेष विमान से पार्टी शासित कर्नाटक के लिए रवाना हो गया।

कांग्रेस की मध्यप्रदेश इकाई के मीडिया प्रकोष्ठ के अध्यक्ष मुकेश नायक ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘35 विधायकों का पहला जत्था अपने परिवार के सदस्यों के साथ बेंगलुरू के लिए रवाना हो गया जबकि बाकी शाम तक रवाना हो जाएंगे।’’

उन्होंने बताया कि विपक्ष के नेता उमंग सिंघार भी कांग्रेस विधायकों के साथ गए हैं।

इससे पहले, सिंघार ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा था कि कांग्रेस के सभी विधायकों को पार्टी शासित किसी प्रदेश में ले जाया जाएगा क्योंकि भाजपा उनके विधायकों को कथित तौर पर खरीदने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि पार्टी के कुछ विधायकों ने उन्हें बताया है कि भाजपा के लोग ‘नोटों से भरी थैली’ लेकर उनसे संपर्क करने आए थे लेकिन उन्होंने उन्हें लौटा दिया।

सिंघार ने दावा किया कि 18 तारीख को मतदान के दिन भाजपा का सारा ‘षड्यंत्र’ विफल होगा।

सौंसर से विधायक विजय रेवानाथ चौरे ने बाद में ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा कि सभी विधायक भोपाल से बेंगलुरु जा रहे हैं।

उन्होंने भी दावा किया कि भाजपा विधायकों की खरीद फरोख्त के प्रयास कर रही है, इसलिए पार्टी के शीर्ष नेताओं ने विधायकों को एक साथ किसी कांग्रेस शासित राज्य में रखने का फैसला किया है।

राज्य में खाली हुई जिन तीन सीटों पर चुनाव चुनाव हो रहे हैं, उनमें से दो पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत तय मानी जा रही है जबकि संख्या बल के लिहाज से तीसरी सीट पर कांग्रेस का पलड़ा भारी है। लेकिन राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी ने तीसरी सीट पर भी उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को पेचीदा बना दिया है।

भाजपा ने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और राज्य इकाई के सचिव रजनीश अग्रवाल को मैदान में उतारा है और तीसरी सीट पर मध्यप्रदेश मछुआरा कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट पर दांव लगाया है।

कांग्रेस ने पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया है, जहां उनका मुकाबला केवट से होना निश्चित है।

चुघ और अग्रवाल ने शनिवार को नामांकन पत्र दाखिल किया, जबकि नटराजन और केवट ने सोमवार को नामांकन दाखिल किया।

राज्यसभा में अपना दूसरा कार्यकाल पूरा करने के बाद तीसरी सीट खाली करने वाले मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘भाजपा महिला आरक्षण विधेयक लागू करने के बड़े-बड़े दावे करती है लेकिन वास्तव में उसने हमेशा इसका विरोध किया है। जब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने पंचायती राज निकायों में महिला आरक्षण की शुरुआत की थी, उस समय पार्टी ने इसका विरोध किया था। यहां तक कि आरएसएस भी महिला विरोधी है क्योंकि आरएसएस में कोई भी महिला प्रचारक नहीं बन सकती।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए आज, जब कांग्रेस पार्टी ने तीसरी सीट के लिए एक महिला उम्मीदवार को मैदान में उतारा है, तो भाजपा ने उनके खिलाफ एक ऐसे उम्मीदवार को खड़ा किया है, जिसे उन्होंने (भाजपा) 2022 में निष्कासित कर दिया था। इससे भाजपा और उसके अनुशासन की पोल खुल गई है।’’

सिंह ने कहा, ‘‘पार्टी के सभी 62 विधायक अपनी पूरी ताकत से कांग्रेस उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करेंगे।’’

सिंह ने विश्वास जताया, ‘‘मीनाक्षी नटराजन को सभी 62 वोट तो मिलेंगे ही, हो सकता है यह संख्या और बढ़े।’’

इससे पहले, सोमवार देर रात सिंघार के आवास पर पार्टी नेताओं की एक बैठक हुई, जिसमें करीब 60 विधायक शामिल हुए।

पार्टी का एक विधायक बैठक में शामिल नहीं हुआ क्योंकि वह दिल्ली में था, जबकि वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने ऑनलाइन माध्यम से इसमें हिस्सा लिया।

वर्तमान में मध्यप्रदेश की कुल 230 सदस्यीय विधानसभा में सदस्यों की संख्या 229 है। इनमें भाजपा के 164 और कांग्रेस के 64 विधायक हैं जबकि एक सीट भारत आदिवासी पार्टी के पास है। दतिया सीट से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द हो चुकी है, जिस वजह से एक सीट रिक्त है।

श्योपुर जिले के विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर उच्च न्यायालय की रोक है।

सागर जिले की बीना सीट से विधायक निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने के लिए मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की गई है। ऐसे में यह संभावना है कि वह इस चुनाव में भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करें। सप्रे ने सोमवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात भी की है।

राज्यसभा की तीन सीटों पर प्रत्येक उम्मीदवार को जीत के लिए 58 वोटों की जरूरत है। इस हिसाब से दो सीटें जीतने के लिए भाजपा को 116 वोट की जरूरत है। कुल 164 में से 116 वोट देने के बाद भाजपा के पास 48 वोट बचेंगे। तीसरी सीट जीतने के लिए उसे 58 वोट चाहिए यानी भाजपा को 10 अतिरिक्त मतों की जरूरत है। निर्मला सप्रे और भारत आदिवासी पार्टी के विधायक कमलेश डोडियार के मत अगर भाजपा को मिले तो उसकी संख्या 50 तक पहुंच सकती है। इसके बावजूद जीत के लिए उसे कम से कम आठ और मतों की आवश्यकता होगी।

कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा इसकी पूर्ति कांग्रेस खेमे में सेंध लगाकर करने का प्रयास कर रही है।

सप्रे का रुख और मल्होत्रा के मतदान पर लगी रोक की वजह से कांग्रेस का प्रभावी आंकड़ा 62 पर सिमट सकता है। हालांकि, चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस के पास आवश्यक संख्या से चार वोट अधिक है।

उल्लेखनीय है कि साल 2020 में भाजपा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ 22 विधायकों को अपने खेमे में लाकर कमलनाथ के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार को गिरा दिया था। सिंधिया वर्तमान में केंद्र सरकार में मंत्री हैं।

मध्यप्रदेश की राज्यसभा की तीन सीटों के लिए 18 जून को मतदान होगा। सोमवार को नामांकन का आखिरी दिन था।

भाषा ब्रजेन्द्र धीरज

धीरज


लेखक के बारे में