जनजातीय समुदाय को भले ही कोई वनवासी कहे लेकिन वे आदिवासी हैं: राष्ट्रपति मुर्मू

जनजातीय समुदाय को भले ही कोई वनवासी कहे लेकिन वे आदिवासी हैं: राष्ट्रपति मुर्मू

जनजातीय समुदाय को भले ही कोई वनवासी कहे लेकिन वे आदिवासी हैं: राष्ट्रपति मुर्मू
Modified Date: June 18, 2026 / 01:29 pm IST
Published Date: June 18, 2026 1:29 pm IST

बैतूल (मध्यप्रदेश), 18 जून (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बृहस्पतिवार को जोर देकर कहा कि जनजातीय समुदाय को भले ही कोई वनवासी कहे लेकिन वास्तव में वे आदिवासी हैं।

राष्ट्रपति, मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल बैतूल जिले में स्थित प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित ‘आध्यात्मिक जागृति द्वारा जनजातीय समाज का सशक्तीकरण’ कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं।

उन्होंने कहा, ‘‘जनजातीय समुदाय की जीवन शैली सहज रूप से ही आध्यात्म की मूलभूत प्रेरणाओं के निकट होती है। हम जनजातीय को आदिवासी कहते हैं। कोई-कोई उनको वनवासी कहते हैं। ये आदिवासी है।’’

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि आदिम और आदिवासी तो सृष्टि के आरंभ से ही इस धरा पर रहते हैं और उनकी यह जीवनशैली आध्यात्मिकता के कारण है।

उन्होंने कहा, ‘‘वे सुख, शांति, आनंद, प्रेम में जीना जानते हैं। हिंसा से दूर रहते हैं। वे आदिम काल में जैसे थे, आज भी वैसे ही हैं। जैसे कि गीली मिट्टी… उसको जैसे बनाओ, वैसे बन जाते हैं। वह प्रकृति की पूजा करते हैं। केवल प्रकृति ही नहीं, वह पंच तत्वों की पूजा करते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘वह (आदिवासी) धरती, आकाश, वायु, जल, सूर्य और चंद्र की पूजा करते हैं। वह कोई मंदिर या पूजा स्थल नहीं बनाते हैं।’’

राष्ट्रपति मुर्मू का यह बयान इस संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कांग्रेस आरोप लगाती रही है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) जनजातीय समाज को ‘वनवासी’ कहकर उनकी अस्मिता को मिटा रही है।

इस अवसर पर मुर्मू ने यह भी कहा कि उपभोग की संस्कृति से प्रेरित आज की तेजी से भागती दुनिया में समाज के हर वर्ग में आध्यात्मिक जागरूकता महत्वपूर्ण हो जाती है।

उन्होंने कहा, ‘‘आज के तनाव और युद्ध से त्रस्त विश्व में इसकी आवश्यकता अतीत के किसी भी कालखंड की तुलना में और अधिक हो गई है। इस प्रकार के सम्मेलन और ऐसे प्रयासों का महत्व और भी बढ़ जाता है।’’

मुर्मू ने कहा कि आदिवासी समाज यदि धरती को क्षति भी पहुंचाता है तो पहले उसे नमन करता है।

उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासी समाज आत्मसम्मान और धैर्य के साथ जीता है और कभी भी अपनी समस्याओं के बारे में नहीं बोलता है।

उन्होंने कहा, ‘‘आदिवासी समाज स्वाभिमान और धैर्य के साथ जीता है और अपनी समस्याओं के बारे में किसी को नहीं बताता। वे कभी कुछ नहीं मांगते हैं और प्रकृति के साथ रहते हैं तथा इस उम्मीद के साथ रहते हैं कि उन्हें समय के साथ चीजें मिलेंगी। वे शांति से रहना पसंद करते हैं।’’

इस अवसर पर मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगू भाई पटेल और केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गा दास उइके भी उपस्थित थे।

राष्ट्रपति 18 से 22 जून तक मध्यप्रदेश और ओड़िशा के दौरे पर हैं। वह 19 जून को ओंकारेश्वर में अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस समारोह में शामिल होंगी और फिर उसी दिन ओड़िशा के रायरंगपुर में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, भुवनेश्वर द्वारा आयोजित चिकित्सा शिविर, कुसुमी ब्लॉक के अंतर्गत खनन प्रभावित गांवों के लिए वृहत एकीकृत ग्रामीण नल जल आपूर्ति योजना, ब्रह्माकुमारी संस्था के मातृशक्ति भवन और रायरंगपुर जिले के विशेष सर्किट हाउस और पुलिस जिला, रायरंगपुर का उद्घाटन करेंगी।

अगले दिन 20 जून को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पहाड़पुर में विद्यालय और कौशल केंद्र सहित विभिन्न स्थानों का दौरा करेंगे एवं लाभार्थियों और बच्चों से बातचीत करेंगे। इसके बाद, वे दोनों रायरंगपुर में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होंगे।

राष्ट्रपति मुर्मू 21 जून को वापस मध्यप्रदेश लौटेंगी और जबलपुर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह में भाग लेंगी। उसी दिन, वे जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36 वें दीक्षांत समारोह में शामिल होंगी।

अगले दिन 22 जून को राष्ट्रपति मध्यप्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में सहरिया जनजाति के सदस्यों, चीता ट्रैकर्स, टूरिस्ट गाइड और कूनो फील्ड टीम के सदस्यों के साथ संवाद करेंगी।

भाषा ब्रजेन्द्र दिमो

मनीषा

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