त्विषा मामला: उच्च न्यायालय में जमानत रद्द होने के बाद सीबीआई पूर्व जज गिरिबाला सिंह के घर पहुंची
त्विषा मामला: उच्च न्यायालय में जमानत रद्द होने के बाद सीबीआई पूर्व जज गिरिबाला सिंह के घर पहुंची
भोपाल, 28 मई (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द किए जाने के कुछ घंटों बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की एक टीम बृहस्पतिवार को उनके आवास पर पहुंची।
सीबीआई की टीम को भोपाल के बाग मुगलिया एक्सटेंशन में एचआईजी 311 स्थित सिंह के आवास में प्रवेश करते देखा गया।
सूत्रों ने बताया कि एजेंसी ने उच्च न्यायालय के आदेश के बाद गिरिबाला सिंह से पूछताछ की, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो जाएगा।
एक सत्र अदालत ने 15 मई को गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दे दी थी, जो अपने बेटे समर्थ सिंह के साथ कथित दहेज उत्पीड़न से संबंधित आरोपों का सामना कर रही हैं।
सीबीआई ने इस सप्ताह की शुरुआत में मध्यप्रदेश पुलिस से त्विषा मामले की जांच अपने हाथ में ले ली है। पेशे से वकील समर्थ सिंह इसके बाद से फिलहाल सीबीआई की हिरासत में हैं।
इससे मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने त्विषा मामले में उसकी सास और पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी है।
बुधवार देर रात जारी अपने 17 पन्नों के आदेश में न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा की एकल पीठ ने कहा, ‘‘मामले के तथ्यात्मक पहलुओं और प्रतिवादी (गिरिबाला सिंह) के खिलाफ लगाए गए आरोपों के आलोक में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, भोपाल द्वारा 15 मई 2026 को पारित अग्रिम जमानत आदेश को रद्द किया जाता है।’’
वरिष्ठ अधिवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने ‘पीटीआई-भाषा’ से फोन पर कहा, ‘‘36 साल तक न्यायिक सेवा में रहने के बाद अगर गिरिबाला के मन में कानून के प्रति कोई सम्मान है तो मुझे लगता है कि उन्हें शालीनता से सीबीआई के समक्ष आत्मसमर्पण करना चाहिए और आगे की जांच में जांच एजेंसी के साथ सहयोग करना चाहिए।’’
मामले में राज्य सरकार की ओर से दलील रखते हुए वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा और त्विषा के परिजनों के वकील श्रीवास्तव ने अदालत से कहा कि आरोपी गिरिबाला सिंह एक सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी हैं और उन्होंने साइबर अपराधों, साइबर फोरेंसिक और डिजिटल सिग्नेचर तकनीक के साथ ही अपराध दृश्य के प्रबंधन पर विशेष पाठ्यक्रमों का प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
उन्होंने कहा कि ऐसे में गिरिबाला सिंह के अपराध स्थल से छेड़छाड़ करने की आशंका भी है।
वकीलों ने दलील दी कि भोपाल जिला अदालत ने गिरिबाला को 24 घंटे में जमानत दे दी थी जबकि मामला प्रारंभिक चरण में था और महत्वपूर्ण बयान ही दर्ज नहीं हुए थे।
उन्होंने कहा कि त्विषा के व्हाट्सऐप चैट और केस डायरी में प्रताड़ना का स्पष्ट उल्लेख है लेकिन इन्हें भी नजरंदाज किया गया।
त्विषा शर्मा राजधानी भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में 12 मई को अपने ससुराल में कथित तौर पर फांसी पर लटकी मिली थीं। सीबीआई ने सोमवार को शर्मा की मौत की जांच अपने हाथों में ले ली थी।
सीबीआई ने मामले को हाथ में लेने के बाद फिर से प्राथमिकी दर्ज की है, जिसमें समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह को आरोपी के रूप में नामजद किया गया है।
भाषा ब्रजेन्द्र मनीषा
मनीषा

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