गुजरात की आंधी.. MP में बनेगी सुनामी? गुजरात जीत का एमपी पर कितना असर, क्या मोदी-शिवराज को केंद्र में रखकर बनेगी चुनावी रणनीति ?

Will the election strategy be made keeping Modi-Shivraj at the center?

गुजरात की आंधी.. MP में बनेगी सुनामी? गुजरात जीत का एमपी पर कितना असर, क्या मोदी-शिवराज को केंद्र में रखकर बनेगी चुनावी रणनीति ?
Modified Date: December 10, 2022 / 12:11 am IST
Published Date: December 10, 2022 12:10 am IST

भोपालः गुजरात की बंपर जीत के मध्यप्रदेश बीजेपी के नेताओं की उम्मीदें आसमान पर तो भरोसा हाईलेवल पर है। बीजेपी को मालूम है कि शाह की रणनीति और मोदी मैजिक से 2023 में सत्ता हासिल करना उनके लिए मुश्किल नहीं है..वैसे गुजरात की बात करें तो वहां 40 फीसदी विधायकों के टिकट काटे गए। कई बड़े नेताओं को टिकट नहीं दिया गया यदि ऐसा होता है मध्यप्रदेश में दो दर्जन ऐसे विधायक हैं, जो चुनाव तक 65 के पार हो जाएंगे इन्हें शायद ही टिकट मिले। SC-ST सीटों पर पार्टी ज्यादा फोकस रखेगी जिसकी शुरुआत हो भी चुकी है। बीजेपी ओबीसी के साथ आदिवासी समीकरण को भी तवज्जो दे सकती है। पार्टी राजनीतिक परिवार से सिर्फ एक टिकट देने का फार्मूला भी अपना सकती है। वैसे जीत का फॉर्मूला चाहे जो भी हो लेकिन इस वक्त तो बीजेपी का हर नेता अगले साल के चुनाव के लिए अभी से दावा ठोंक रहा है।

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बीजेपी के बड़े नेता ही नहीं हर लेवल का कार्यकर्ता ये मान रहा है कि बीजेपी की जीत से पार्टी को वो बूस्टर डोज मिला है जिसकी इस वक्त सबसे ज्यादा जरुरत थी। क्योंकि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा मध्यप्रदेश में गुजरात से सटे मालवा निमाड़ से निकली थी। जिसके बाद कांग्रेसियों का उत्साह उफान मार रहा था। ये सही है कि कांग्रेस के सामने चुनौती राहुल की यात्रा के बाद बने माहौल को बरकरार रखने की है लेकिन गुजरात परिणाम के बाद मुकाबला लगभग बराबरी का हो गया है। वैसे कांग्रेस गुजरात में हार का ठीकरा आप पर फोड़कर खुद को बचाने की कोशिश में है।

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वैसे ये बात भी सच है कि गुजरात और मध्यप्रदेश की सियासत में काफी अंतर हैं। गुजरात में कांग्रेस जहां कमजोर नेतृत्व के सामने चुनाव लड़ी। वहीं मध्यप्रदेश में कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के नेतृत्व मे कांग्रेस सक्रिय बनी हुई है और नगरीय निकाय चुनाव में आप की शुरुआत भले ही सामान्य रही हो लेकिन वैसा परिणाम विधानसभा चुनावों में आएगा इस पर भी संशय है।

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सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।