लाडकी बहिन योजना में 80 लाख लाभार्थी अपात्र थे तो 20 माह तक लाभ क्यों दिया: जयंत पाटिल

लाडकी बहिन योजना में 80 लाख लाभार्थी अपात्र थे तो 20 माह तक लाभ क्यों दिया: जयंत पाटिल

लाडकी बहिन योजना में 80 लाख लाभार्थी अपात्र थे तो 20 माह तक लाभ क्यों दिया: जयंत पाटिल
Modified Date: June 2, 2026 / 04:12 pm IST
Published Date: June 2, 2026 4:12 pm IST

मुंबई, दो जून (भाषा) ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन’ योजना की सत्यापन प्रक्रिया में करीब 80 लाख महिलाओं के अपात्र पाए जाने के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने महाराष्ट्र सरकार की इस प्रमुख योजना में कथित अनियमितताओं को लेकर मंगलवार को जवाबदेही तय करने की मांग की।

पाटिल ने सवाल उठाया कि कथित ‘फर्जी’ लाभार्थियों को लगभग 20 महीनों तक लाभ कैसे मिलता रहा। उन्होंने संदेह जताया कि क्या भारी खर्च ‘सुनियोजित भ्रष्टाचार’ की ओर इशारा करता है।

पूर्व मंत्री ने कहा, ‘‘यदि ये 80 लाख लाभार्थी फर्जी थे, तो सरकार ने 20 महीने तक उन्हें लाभ क्यों दिया?’’

राज्य सरकार ने कहा है कि सत्यापन प्रक्रिया और 30 अप्रैल को ई-केवाईसी (उपभोक्ता को जानो) की समयसीमा समाप्त होने के बाद करीब 80 लाख लाभार्थियों को सूची से हटा दिया गया। इस कदम को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार की तीखी आलोचना की है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हालांकि स्पष्ट किया है कि योजना बंद नहीं की जाएगी और 1.70 करोड़ पात्र महिलाओं को इसका लाभ मिलता रहेगा।

इस बीच, पाटिल ने कहा कि योजना शुरू करते समय सरकार को प्रभावी सत्यापन व्यवस्था बनानी चाहिए थी, जिससे अपात्र लोगों को लाभ मिलने से रोका जा सके।

उन्होंने आरोप लगाया कि हो सकता है कि पर्याप्त जांच-पड़ताल के बिना राशि वितरित की गई। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह पूरी प्रक्रिया चुनावी लाभ को ध्यान में रखकर संचालित की गई थी।

पाटिल ने दावा किया कि प्रति माह 1,500 रुपये के हिसाब से पिछले 20 महीनों में इन कथित अपात्र लाभार्थियों को लगभग 24,000 करोड़ रुपये वितरित किए गए।

उन्होंने कहा, ‘‘यदि सरकार का दावा सही है, तो इस भारी खर्च के लिए जिम्मेदार कौन है? क्या यह बेहद सुनियोजित तरीके से किया गया भ्रष्टाचार है?’’

पाटिल ने मांग की कि सरकार कथित चूक के लिए जिम्मेदारी तय करे और यह स्पष्ट करे कि लंबे समय तक वित्तीय सहायता मिलने के बाद इतनी बड़ी संख्या में लाभार्थी अचानक अपात्र कैसे पाए गए।

भाषा

खारी अविनाश

अविनाश


लेखक के बारे में