निकाय चुनाव में निराशाजनक प्रदर्शन के एक दिन बाद चाचा शरद पवार से मिले अजित
निकाय चुनाव में निराशाजनक प्रदर्शन के एक दिन बाद चाचा शरद पवार से मिले अजित
(फाइल फोटो के साथ)
पुणे, 17 जनवरी (भाषा) महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख अजित पवार ने पुणे और पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका चुनावों में राकांपा-राकांपा (एसपी) गठबंधन के निराशानजक प्रदर्शन के एक दिन बाद शनिवार को बारामती में अपने चाचा शरद पवार से मुलाकात की।
शरद पवार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार (राकांपा-एसपी) के प्रमुख हैं।
पुणे महानगरपालिका चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 119 सीट पर जीत दर्ज की, जबकि राकांपा को 27, राकांपा (एसपी) को तीन और कांग्रेस को 15 सीट मिलीं। वहीं, 128 सदस्यीय पिंपरी-चिंचवड नगर निकाय में भाजपा ने 84 सीट पर कब्जा जमाया।
अजित ने कहा, “आज एक कृषि प्रदर्शनी का उद्घाटन हुआ और मैं उसी के सिलसिले में बारामती आया था। मुझे बताया गया कि (शरद) पवार साहब भी अपने आवास पर हैं। इसलिए मैं उनके आवास पर गया और बाद में हम सब प्रदर्शनी स्थल पर पहुंचे।”
उपमुख्यमंत्री ने राकांपा के दोनों गुटों के विलय की अटकलों के बीच पवार परिवार में एकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “हम (पवार परिवार के रूप में) साथ हैं। हम जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे के घर जाते हैं।”
पुणे की बारामती तहसील में आयोजित कृषि प्रदर्शनी का दोनों नेताओं ने उद्घाटन किया। इसके बाद, शरद पवार के आवास पर एक बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें अजित पवार, सुप्रिया सुले, रोहित पवार, शशिकांत शिंदे, जयंत पाटिल और मंत्री दत्तात्रेय भरने सहित राकांपा और राकांपा (एसपी) के कई शीर्ष नेता शामिल हुए।
बैठक में हुई बातचीत के बारे में पूछे जाने पर सुप्रिया सुले ने संवाददाताओं से कहा, “अगर बातचीत बंद दरवाजे के पीछे होती है, तो क्या उस पर बाहर चर्चा की जाएगी।
इससे पहले, अजित ने भाजपा को पुणे और पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका चुनावों में भारी जीत के लिए बधाई दी थी।
राकांपा प्रमुख ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा था कि उनकी पार्टी के नेता हार के कारणों का विश्लेषण करने के लिए बैठक करेंगे।
विपक्ष के इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर सवाल उठाने के बारे में पूछे जाने पर अजित ने कहा था कि वह इस मुद्दे पर टिप्पणी नहीं करेंगे।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि हार के बाद ईवीएम को दोष देना स्वाभाविक है, लेकिन जीत मिलने पर कोई भी इस तरह के सवाल नहीं उठाता है।
अजित ने कहा था, “मतदाता महत्वपूर्ण हैं और हर राजनीतिक दल को अपने प्रयास जारी रखने चाहिए। भाजपा ने महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है और मैं पार्टी को उसके प्रदर्शन के लिए बधाई देता हूं। भाजपा ने नगर निकाय चुनाव मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में लड़ा और अन्य दलों को हार का सामना करना पड़ा।”
उन्होंने कहा था कि इस हार से निराश होने के बजाय काम जारी रखा जाना चाहिए।
कभी राकांपा और पवार परिवार का गढ़ रहे पुणे और पिंपरी-चिंचवड में हार के संभावित कारणों के बारे में पूछे जाने पर उपमुख्यमंत्री ने कहा था, “नतीजे घोषित हुए अभी मात्र 24 घंटे ही बीते हैं। पार्टी बैठकर नतीजों पर चर्चा करेगी। मीडिया ने भी पार्टी के लिए अनुकूल माहौल का अनुमान लगाया था, लेकिन मीडिया के अनुमान भी गलत साबित हुए।”
यह पूछे जाने पर कि क्या दिन में राकांपा और राकांपा (एसपी) के विलय पर चर्चा के लिए कोई बैठक हुई थी, अजित ने कहा कि ऐसी कोई बैठक नहीं हुई।
राकांपा (एसपी) की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख शशिकांत शिंदे के इस बयान पर कि दोनों गुट आगामी जिला परिषद चुनाव साथ लड़ेंगे, अजित ने कहा कि उन्होंने शिंदे की बात नहीं सुनी है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि ऐसे चुनावों के लिए गठबंधन बनाने का अधिकार स्थानीय नेतृत्व को दिया जाता है।
राकांपा महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति का हिस्सा है, जिसमें भाजपा और शिवसेना भी शामिल हैं। हालांकि पुणे और पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका चुनावों के लिए पार्टी ने राकांपा (एसपी) के साथ गठबंधन किया था। लेकिन दोनों ही नगरपालिकाओं में राकांपा-राकांपा (एसपी) गठबंधन को भाजपा के हाथों करारी शिकस्त झेलनी पड़ी।
भाषा पारुल अविनाश
अविनाश

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