आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने वाले पहले भारतीय राज्य बने
आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने वाले पहले भारतीय राज्य बने
अमरावती/बेंगलुरु, छह मार्च (भाषा) शुक्रवार को आंध्र प्रदेश और कर्नाटक, अलग-अलग आयु समूहों में बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने वाले पहले दो भारतीय राज्य बन गए।
सोशल मीडिया की लत से बच्चों की सुरक्षा की आवश्यकता पर वैश्विक बहस के बीच, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया ने भी इसी तरह के प्रतिबंध लागू किए हैं।
जहां एक ओर तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के नेतृत्व वाली राजग शासित आंध्र प्रदेश सरकार ने कहा कि 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंधित रहेगा, वहीं पड़ोसी राज्य कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने कहा है कि यह प्रतिबंध 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर लागू होगा।
आंध्र प्रदेश विधानसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि वह इस बात पर विचार कर रहे हैं कि क्या इस प्रतिबंध को 13 से 16 वर्ष की आयु के बच्चों तक बढ़ाया जाए।
नायडू ने कहा, “हम निश्चित रूप से यह सुनिश्चित करेंगे कि 90 दिनों के भीतर 13 वर्ष से कम आयु के लोग सोशल मीडिया का उपयोग न कर सकें।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार 13 से 16 वर्ष की आयु के किशोरों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के संबंध में निर्णय लेगी।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने 16 वर्ष से कम आयु के लोगों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की।
सिद्धरमैया ने यहां 2026-27 के लिए राज्य का बजट पेश करते हुए कहा, “बच्चों पर मोबाइल फोन के बढ़ते उपयोग के प्रतिकूल प्रभावों को रोकने के उद्देश्य से, 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जाएगा।”
बाद में एक संवाददाता सम्मलेन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 16 वर्ष से कम आयु के बच्चे मोबाइल फोन रख सकते हैं, लेकिन वे सोशल मीडिया का उपयोग नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा, “हम उनके लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगा देंगे।”
स्कूलों, कॉलेजों या घरों में इसे कैसे नियंत्रित किया जाएगा, इस बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए सिद्धरमैया ने कहा, “हम इसके लिए एक कार्यक्रम तैयार करेंगे। कार्यक्रम को अंतिम रूप देने के बाद, हम आपको सूचित करेंगे।”
इस साल जनवरी में, कर्नाटक के इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री प्रियंक खरगे ने विधानसभा को सूचित किया था कि राज्य सरकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सोशल मीडिया के जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग, विशेष रूप से बच्चों के बीच, के लिए लागू किए जाने वाले उपायों के संबंध में परामर्श कर रही है।
केंद्र सरकार द्वारा इस वर्ष जनवरी में संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि डिजिटल लत से बचने के लिए ऑनलाइन शिक्षण को कम करने के साथ-साथ ऑनलाइन मंचों तक आयु-आधारित पहुंच पर विचार किया जाना चाहिए।
बेंगलुरु के जलाहल्ली निवासी मनोहर एन.एच. ने कहा कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाना कुछ मायनों में अच्छा हो सकता है, लेकिन इसे लागू करना मुश्किल होगा।
मनोहर एन.एच. के दो बच्चे 16 वर्षीय बेटा और 13 वर्षीय बेटी हैं।
उन्होंने कहा, “आजकल कई स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ाई ऐप्स के माध्यम से होती है। उदाहरण के लिए, माध्यमिक विद्यालय और प्राथमिक विद्यालय के छात्र—विशेषकर माध्यमिक विद्यालय के छात्र— कक्षाओं और संचार के लिए ऐप्स पर बहुत अधिक निर्भर हैं। सोशल मीडिया के उपयोग को नियंत्रित करना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा, खासकर सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में। यह नियम लागू तो हो सकता है, लेकिन मुझे इसकी सफलता पर संदेह है; सफलता दर शायद केवल 10 प्रतिशत ही रहेगी।”
इस कदम की सराहना करते हुए, मदरहुड हॉस्पिटल में मनोविज्ञान और बाल विकास सलाहकार डॉ. सरिता नागराज ने कहा कि इससे बच्चों और किशोरों में खराब मानसिक स्वास्थ्य का खतरा कम हो जाएगा – जिसमें अवसाद, चिंता, नींद की कमी और अस्वस्थ तुलनाओं से उत्पन्न होने वाली शारीरिक छवि संबंधी समस्याएं शामिल हैं, जो आगे चलकर खाने संबंधी विकारों का कारण बन सकती हैं।
उन्होंने कहा, “उनकी संज्ञानात्मक क्षमता और भावनात्मक नियंत्रण में भी सुधार होने की संभावना है। खतरनाक सामग्री के संपर्क में आने की आशंका कम हो जाएगी, जिससे ध्यान केंद्रित करने की क्षमता के साथ-साथ शैक्षणिक प्रदर्शन में भी सुधार हो सकता है।”
भाजपा के राज्यसभा सदस्य लहर सिंह सिरोया ने ‘एक्स’ पर एक सोशल मीडिया पोस्ट में इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि उन्होंने संसद में विशेष उल्लेख के माध्यम से इस मुद्दे को उठाया था।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री (नरेन्द्र) मोदी ने हाल ही में एआई शिखर सम्मेलन में हमारी युवा पीढ़ी के हितों की रक्षा करने की बात कही थी। मैंने संसद में अपने भाषण में बच्चों के बीच स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। मुझे उम्मीद है कि इस पर भी गंभीरता से विचार किया जाएगा।”
ऑस्ट्रेलिया 2025 में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला देश बना था जिसने टिकटॉक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे मंचों तक पहुंच को अवरुद्ध किया था।
इंडोनेशिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगा दिया है।
भाषा प्रशांत नरेश
नरेश

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