आशा दादी एआई से लेकर इंस्टाग्राम तक हर चीज के बारे में जानने को उत्सुक थीं: चिंटू
आशा दादी एआई से लेकर इंस्टाग्राम तक हर चीज के बारे में जानने को उत्सुक थीं: चिंटू
(सुप्रिया सोगले)
मुंबई, 24 अप्रैल (भाषा) महान पार्श्व गायिका आशा भोसले हर विषय के बारे में जानने को लेकर जिज्ञासु रहती थीं, उन्हें बातें करना पसंद था और कृत्रिम मेधा(एआई) से लेकर इंस्टाग्राम तक हर चीज में रुचि रखती थीं। यह बात उनके पोते चिंटू भोसले ने कही, जिनका मानना है कि उनकी दादी ने हर भारतीय के जीवन में किसी न किसी रूप में अपनी छाप छोड़ी है।
आशा भोसले का 92 वर्ष की उम्र में 12 अप्रैल को निधन हो गया था। उन्होंने हिंदी फिल्म उद्योग में 12,000 से अधिक गीतों को अपनी आवाज दी थी और उन्हें देश-विदेश में कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले थे।
चिंटू भोसले ने कहा कि परिवार अभी भी इस क्षति से उबरने की कोशिश कर रहा है लेकिन वे उनके उपलब्धियों से भरे जीवन का जश्न मनाने पर ध्यान दे रहे हैं।
उन्होंने कहा, “उन्हें हर चीज में दिलचस्पी थी….एआई, संगीत, इंस्टाग्राम, फेसबुक… उन्हें यह बेहद अच्छा लगता था कि वह सीधे लोगों से जुड़ सकती हैं। वह हमेशा दुनिया में हो रही चीजों को लेकर उत्साहित और सकारात्मक रहती थीं।”
उन्होंने बताया, ‘वह खुली सोच वाली थीं, नयी चीजें समझना चाहती थी और बातचीत के दौरान उनके पास साझा करने और जानने के लिए बहुत कुछ होता था। अगर उनका मन होता तो वह अपने जीवन, अपने गीतों के बारे में बात करतीं और 1940 के दशक के गीत भी गुनगुनाती थीं।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर की तरह भारत रत्न मिलना चाहिए था, तो चिंटू ने कहा कि उनकी दादी का संगीत में योगदान किसी भी सम्मान से कहीं बड़ा है।
उन्होंने कहा, “ये सम्मान बहुत प्रतिष्ठित है, लेकिन इससे उनकी पहचान तय नहीं होती। मुझे नहीं लगता कि इस देश में कोई भी उन्हें अलग नजर से देखेगा, चाहे उन्हें यह सम्मान मिला हो या नहीं, क्योंकि उन्होंने हर भारतीय के जीवन में किसी न किसी रूप में अपनी छाप छोड़ी है।”
चिंटू ने कहा कि उनके जाने का दुख परिवार के लिए गहरा है, लेकिन इस मुश्किल समय में सभी लोग एक-दूसरे का सहारा बनकर साथ खड़े हैं।
उन्होंने कहा, “घर में जाते ही लगता है कि उनसे मिलें, उन्हें गले लगाएं, लेकिन अब वह नहीं हैं… हम मिलते हैं, बात करते हैं, हंसते हैं और उनके जीवन का जश्न मनाते हैं।”
अपने रिश्ते को याद करते हुए चिंटू ने बताया कि आशा भोसले उन्हें दोस्त की तरह मानती थीं।
उन्होंने कहा, “हम हर विषय पर खुलकर बात करते थे। अगर आपको कुछ पसंद है तो वह उसे पूरा करने की कोशिश करती थीं। किसी के जुनून को खुशी में बदलना उन्हें बहुत अच्छा लगता था।”
गायिका को खाना बनाना भी बेहद पसंद था।
चिंटू ने बताया, “उनका खाना शानदार होता था। वह खुद बाजार जाकर मसाले खरीदती थीं।”
‘बैंड ऑफ बॉयज’ के सदस्य चिंटू ने कहा कि शुरुआत में वह अपने संबंध को सार्वजनिक रूप से बताने से बचते थे, लेकिन मेरे एक साक्षात्कार के बाद आशा भोसले ने उन्हें इसके लिए डांटा भी था।
चिंटू ने कहा, ‘उन्होंने मेरा एक साक्षात्कार देखा था। उसमें किसी ने मुझसे पूछा कि क्या मैं आशा जी का संबंधी हूं, तो मैंने मजाक में कहा—अगर मेरा नाम क्लिंटन होता, तो क्या मैं बिल क्लिंटन का रिश्तेदार होता? यह सुनकर उन्होंने मुझे डांटा और कहा, “क्या तुम्हें यह कहने में शर्म आती है कि तुम मेरे पोते हो?”
उन्होंने बताया कि वह नहीं चाहते थे कि उनकी पहचान केवल आशा भोसले के पोते के रूप में हो, बल्कि वह अपनी मेहनत से पहचान बनाना चाहते थे।
भाषा
राखी नरेश
नरेश

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