बैंडिट क्वीन से पहचान तो मिली, काम मिलने में समय लग गया : मनोज बाजपेयी
बैंडिट क्वीन से पहचान तो मिली, काम मिलने में समय लग गया : मनोज बाजपेयी
मुंबई, 10 जून (भाषा) अभिनेता मनोज बाजपेयी फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ की शूटिंग के दौरान फिल्मकार शेखर कपूर को कैमरे के सामने अभिनय करने का एक जरूरी सबक सिखाने का श्रेय देते हैं। उन्होंने कहा कि इस फिल्म से उन्हें सराहना तो मिली लेकिन आगे काम मिलने में समय लगा।
आलोचकों ने फिल्म को भले ही सराहा हो लेकिन बाजपेयी का कहना है कि 1994 में आई इस फिल्म में छोटे से किरदार से अभिनय के सफर की शुरुआत ने इंडस्ट्री में उनके लिए तत्काल रास्ते नहीं खोल दिए थे।
अभिनेता बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘मासूम: द नेक्स्ट जेनरेशन’ के लिए फिल्मकार कपूर के साथ फिर से काम करने जा रहे हैं।
डकैत से नेता बनीं फूलन देवी के जीवन पर आधारित फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ में बाजपेयी ने मान सिंह का किरदार निभाया था।
बाजपेयी ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ एक साक्षात्कार में कहा, “ ‘बैंडिट क्वीन’ ने मेरे करियर में कोई चमत्कार तो नहीं किया, लेकिन इसने दूसरे कलाकारों के करियर को जरूर बहुत आगे बढ़ाया। मुझे राम गोपाल वर्मा की फिल्म साढ़े चार या पांच साल बाद मिली। इतना समय इसलिए लगा क्योंकि वह एक शांत किरदार था और उन दिनों इंडस्ट्री, निर्माता और दर्शक शांत या मौन प्रदर्शन को समझ नहीं पाते थे।”
उन्हें कपूर की यह सलाह अच्छी तरह याद है कि कैमरे के बजाय पूरी तरह से प्रस्तुति पर ध्यान दिया जाए, और यह बात उनके पूरे करियर के दौरान उनके साथ रही है।
बाजपेयी ने कहा, “उन्होंने कहा कि ‘यह मत सोचो कि कैमरा है, बस अपनी प्रस्तुति दो’। और उसके बाद, मैंने कभी कैमरे की परवाह नहीं की, मैंने सिर्फ अपनी प्रस्तुति पर ध्यान दिया, और इस बात पर ध्यान दिया कि मुझे उस दृश्य में क्या करना है।”
राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाले अभिनेता, मशहूर फिल्म अदाकार नसीरुद्दीन शाह और शबाना आज़मी के साथ ‘मासूम: द नेक्स्ट जेनरेशन’ में काम करने को लेकर बहुत उत्साहित हैं।
उन्होंने कहा, “यह बहुत रोमांचक है। जब आप बेहतरीन कलाकारों के साथ काम करते हैं, तो आप जानते हैं कि आपका प्रदर्शन और बेहतर होगा तथा आप ज्यादा मेहनत करेंगे। आप किसी भी पल को हल्के में नहीं लेंगे। मेरे लिए शेखर कपूर के साथ काम करना भी रोमांचक है; मैं बस इस पटकथा पढ़ने के लिए उनके बुलावे का इंतज़ार कर रहा हूं।”
बाजपेयी ने अपने एक और पुराने साथी अनुराग कश्यप के साथ फिर से काम करने की इच्छा भी जताई और उन्हें “बेहतरीन सोच वाला और बागी” बताया।
कश्यप ने बाजपेयी की कुछ सबसे मशहूर फ़िल्मों – ‘सत्या’, ‘शूल’ और ‘कौन’ – के लिए लेखक के तौर पर काम किया। बाद में उन्होंने दो हिस्सों वाली क्राइम ड्रामा फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ का निर्देशन किया, जिसमें बाजपेयी ने सरदार खान का किरदार निभाया, जो दर्शकों को बहुत पसंद आया।
भाषा प्रशांत नेत्रपाल
नेत्रपाल

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