बंदी प्रजनित गिद्ध महाराष्ट्र से 3,334 किलोमीटर की उड़ान भरकर रणथंभौर पहुंचा

बंदी प्रजनित गिद्ध महाराष्ट्र से 3,334 किलोमीटर की उड़ान भरकर रणथंभौर पहुंचा

बंदी प्रजनित गिद्ध महाराष्ट्र से 3,334 किलोमीटर की उड़ान भरकर रणथंभौर पहुंचा
Modified Date: June 24, 2026 / 11:45 am IST
Published Date: June 24, 2026 11:45 am IST

(तस्वीर के साथ)

मुंबई, 24 जून (भाषा) इस वर्ष जनवरी में महाराष्ट्र के मेलघाट में जंगल में छोड़े गए एक भारतीय गिद्ध ने अब तक 3,334 किलोमीटर की दूरी तय की है। वन्यजीव विशेषज्ञों ने बुधवार को बताया कि यह गिद्ध कई राज्यों के ऊपर से उड़ान भरते हुए राजस्थान के रणथंभौर बाघ अभयारण्य तक पहुंच गया है।

बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) के निदेशक किशोर रिठे ने कहा कि बंदी-प्रजनन वाले इस गिद्ध ने जंगल में बिना किसी पूरक भोजन के स्वयं को जीवित रखा है। उन्होंने कहा कि यह बंदी-प्रजनित गिद्धों की प्राकृतिक वातावरण में ढलने, स्वतंत्र रूप से भोजन तलाशने और लंबी दूरी की यात्रा करने की क्षमता को दर्शाता है।

बंदी प्रजनन (कैप्टिव ब्रीडिंग) कार्यक्रम के तहत गिद्धों का नियंत्रित एवं सुरक्षित वातावरण में प्रजनन कराया जाता है, ताकि उनकी घटती आबादी को बढ़ाया जा सके और उन्हें बाद में प्राकृतिक आवास में छोड़ा जा सके।

रिठे ने एक बयान में कहा कि यह उपलब्धि गिद्ध संरक्षण कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण सफलता है। इससे भारत में गिद्धों की घटती आबादी को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से बंदी-प्रजनन वाले गिद्धों को छोड़ने की पहल की क्षमता रेखांकित होती है।

इस पांच वर्षीय लंबी चोंच वाली मादा गिद्ध (लॉन्ग-बिल्ड वल्चर) का नाम ‘एक्स67’ है। यह उन बंदी-प्रजनित गिद्धों में से एक है, जिन्हें सौर ऊर्जा से संचालित ट्रैकिंग टैग लगाया गया था।

इसे दो जनवरी को मेलघाट बाघ अभयारण्य के अकोट वन्यजीव प्रभाग के सोमथना क्षेत्र में जंगल में छोड़ा गया था।

भाषा

प्रचेता मनीषा

मनीषा


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