Desire Mandir for Transfer: तबादले के लिए सरकारी कर्मचारियों को लगानी होगी ‘डिजायर मंदिर’ में अर्जी, भाजपा विधायक बोले- मैं सिर्फ डाकिया हूं, फैसला ऊपर वाला करेगा
Desire Mandir for Transfer: तबादले के लिए सरकारी कर्मचारियों को लगानी होगी 'डिजायर मंदिर' में अर्जी, भाजपा विधायक बोले- मैं सिर्फ डाकिया हूं, फैसला ऊपर वाला करेगा
Desire Mandir for Transfer: तबादले के लिए सरकारी कर्मचारियों को लगानी होगी 'डिजायर मंदिर' में अर्जी, भाजपा विधायक बोले- मैं सिर्फ डाकिया हूं, फैसला ऊपर वाला करेगा / Image: AI Generated
- भाजपा विधायक ने अपने कार्यालय में "डिजायर मंदिर" बनवाया
- कर्मचारियों को आवेदन सीधे देने के बजाय मंदिर की पेटी में डालने को कहा
- विधायक का कहना है कि वे केवल जनप्रतिनिधि हैं, अंतिम फैसला प्रशासन और "ऊपर वाला" करता है
जोधपुर: Desire Mandir for Transfer प्रदेश सरकार ने लंबे समय से ट्रांसफर पर लगी रोक को हटा दिया है, जिसके बाद सरकारी कर्मचारियों की नेता नगरी और सरकारी कार्यालयों में आवाजाही बढ़ गई है। बैन हटते ही कर्मचारी अपने तबादले के लिए सिफारिश और जुगाड़ में लग गए हैं। इस बीच भाजपा विधायक ने कर्मचारियों के तबादले के लिए ऐसा रास्ता निकाला है कि हर कोई हैरान है। यूं कहें कि कर्मचारियों के तबादले के लिए पूरे भारत में अब तक किसी ने ऐसा प्रयोग नहीं किया होगा। तो चलिए जानते हैं कि भाजपा विधायक ने ऐसा क्या कर दिया है कि चर्चा पूरे प्रदेश में होने लगी है।
मंदिर में लगेगी तबादले की अर्जी
Desire Mandir for Transfer दरअसल जोधपुर विधायक अतुल भंसाली कर्मचारियों के तबादले की फाइल सीधे अपने हाथ में नहीं ले रहें हैं, बल्कि उन्होंने अपने कार्यालय में छोटा सा मंदिर बनवाया है, जिसे “डिजायर मंदिर” नाम दिया गया है। मंदिर में भगवान श्रीराम की तस्वीर स्थापित है और उसके सामने एक पेटी रखी गई है। जो भी कर्मचारी या व्यक्ति तबादले की सिफारिश लेकर आता है, उसे कहा जाता है कि अपनी अर्जी इस पेटी में डाल दें और उसे भगवान के चरणों में अर्पित कर दें।
भाजपा विधायक ने बनाया डिजायर मंदिर
डिजायर मंदिर को लेकर विधायक भंसाली का कहना है कि जनता ने उन्हें सिर्फ ट्रांसफर करवाने के लिए नहीं चुना है। उनके सामने सड़क, पानी, बिजली, विकास और जनसमस्याओं जैसे कई बड़े मुद्दे हैं। अतुल भंसाली कहते हैं कि विधायक बनने के बाद से वे रोजाना 17 से 18 घंटे तक जनता के बीच और कार्यालय में काम करते हैं। अगर पूरा दिन सिर्फ डिजायर यानी तबादले की सिफारिशें सुनने में निकल जाए तो फिर जनता के बाकी काम कौन करेगा। इसी सोच के साथ उन्होंने यह अनोखा प्रयोग शुरू किया।
विधायक नहीं दे सकता चरित्र प्रमाण पत्र
उनका मानना है कि किसी कर्मचारी की योग्यता, आवश्यकता या चरित्र का अंतिम प्रमाणपत्र विधायक नहीं दे सकता। वे कहते हैं कि वे भगवान नहीं हैं, सिर्फ एक जनप्रतिनिधि हैं। इसलिए किसी एक व्यक्ति की सिफारिश कर देना और यह मान लेना कि उसका काम सौ प्रतिशत हो जाएगा, यह सोच भी सही नहीं है। विधायक बताते हैं कि उनके परिवार ने वर्षों तक राजनीति को करीब से देखा है। उनके काका स्वर्गीय कैलाश भंसाली भी विधायक रहे थे। उस दौर से लेकर आज तक उन्होंने देखा कि ट्रांसफर की सिफारिशें नेताओं के लिए हमेशा एक बड़ी चुनौती रही हैं। हर व्यक्ति चाहता है कि उसकी पोस्टिंग उसके मनपसंद स्थान पर हो, लेकिन प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी नियमों की अपनी सीमाएं होती हैं। सभी कर्मचारियों को एक ही शहर में नहीं लगाया जा सकता।
फैसला ऊपर वाला करेगा: विधायक भंसाली
डिजायर मंदिर में आने वाले लोगों की प्रतिक्रियाएं भी दिलचस्प हैं। कुछ लोग इसे विधायक की व्यस्तता का व्यावहारिक समाधान मान रहे हैं तो कुछ इसे राजनीति में बढ़ती सिफारिश संस्कृति पर एक तंज के रूप में देख रहे हैं। हालांकि ज्यादातर लोग मुस्कुराते हुए अपनी अर्जी पेटी में डाल रहे हैं और भगवान श्रीराम के सामने हाथ जोड़कर लौट रहे हैं। राजनीति में अक्सर नेता लोगों से वादे करते नजर आते हैं। लेकिन जोधपुर में एक विधायक लोगों से यह कह रहे हैं कि “मैं सिर्फ डाकिया हूं, फैसला ऊपर वाला करेगा।”
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