वर्धा हिंदी विश्वविद्यालय में छात्रों के प्रदर्शन को कॉजपा का समर्थन
वर्धा हिंदी विश्वविद्यालय में छात्रों के प्रदर्शन को कॉजपा का समर्थन
वर्धा, 21 सितंबर (भाषा) कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय (एमजीएएचवी) के उन छात्रों के समर्थन की घोषणा की है, जो पाठ्यक्रम स्थानांतरण और रुकी हुई पीएचडी दाखिला प्रक्रिया के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। उसने छह शोधार्थियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस लेने की मांग भी की है।
कॉजपा संस्थापक अभिजीत दीपके ने शनिवार को कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन को पुलिस मामलों के जरिए दबाया नहीं जाना चाहिए। वहीं, विश्वविद्यालय ने प्रशासनिक कामकाज बाधित होने का हवाला देते हुए आपराधिक मामलों और परिसर में लगाए गए अंतरिम प्रतिबंधों का बचाव किया।
वर्ष 1997 में स्थापित केंद्रीय विश्वविद्यालय एमजीएएचवी के छात्रों ने जुलाई में अपना प्रदर्शन शुरू किया था। छह शोधार्थी अब भी वर्धा जिला कलेक्ट्रेट में आंदोलन कर रहे हैं।
सम्यक विद्यार्थी आंदोलन के संयोजक और शोधार्थी निरंजन ओबेराय ने सोमवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा कि विश्वविद्यालय ने 2022 में वर्धा परिसर में महिला अध्ययन और फिल्म अध्ययन पाठ्यक्रम बंद कर दिए थे और उन्हें उत्तर प्रदेश स्थित विश्वविद्यालय के प्रयागराज केंद्र में स्थानांतरित कर दिया था।
उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले चार साल से पीएचडी में दाखिले बंद हैं। ओबेराय ने कहा कि जुलाई में 250 से अधिक छात्रों ने एक याचिका पर हस्ताक्षर कर उसे कुलपति और कुलसचिव को सौंपा था, जिसमें पीएचडी दाखिले फिर से शुरू करने तथा महिला अध्ययन और फिल्म अध्ययन विभागों को दोबारा शुरू करने की मांग की गई थी।
ओबेराय ने कहा कि अगस्त में विश्वविद्यालय ने छात्रों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी और इसके बाद रामनगर थाने में उनके समेत छह छात्रों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि बाद में इन छह छात्रों को विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश से रोक दिया गया।
दीपके ने शनिवार को वर्धा कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मुलाकात की और उन्हें अपना समर्थन दिया।
कॉजपा संयोजक ने छात्रों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस लेने की मांग करते हुए कहा, ‘‘ये छात्र अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। वे उस ‘शिक्षा के अधिकार’ के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जो डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने उन्हें दिया और जिसकी गारंटी संविधान देता है। इस अधिकार के लिए लड़ना कोई आपराधिक गतिविधि नहीं हो सकती।’’
इस बीच, विश्वविद्यालय ने एक बयान में कहा कि मांगों को लेकर प्रदर्शन करने के नाम पर किसी भी छात्र या समूह को विश्वविद्यालय के प्रशासनिक या शैक्षणिक कामकाज को बाधित करने, कार्यालयों में ताला लगाने, अधिकारियों और कर्मचारियों की आवाजाही रोकने या विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
उसने स्पष्ट किया कि छह शोधार्थियों के लिए विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश पर रोक अनुशासन समिति की जांच पूरी होने तक लगाई गई है।
एक अधिकारी ने कहा कि पीएचडी में दाखिले फिर से शुरू हो गए हैं और प्रयागराज स्थानांतरित किए गए पाठ्यक्रमों के मुद्दे पर विश्वविद्यालय विचार-विमर्श कर रहा है।
भाषा आशीष अमित
अमित

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