कांग्रेस नेताओं ने चंद्रपुर महानगरपालिका से जुड़े आंतरिक विवाद को सुलझाया
कांग्रेस नेताओं ने चंद्रपुर महानगरपालिका से जुड़े आंतरिक विवाद को सुलझाया
मुंबई, 24 जनवरी (भाषा) कांग्रेस नेताओं की उच्च स्तरीय बैठक के बाद पार्टी ने महाराष्ट्र की चंद्रपुर महानगर पालिका (सीएमसी) से जुड़े आंतरिक विवाद को सुलझा लिया है। पार्टी नेता विजय वडेट्टीवार ने शनिवार को यह जानकारी दी।
यह बैठक चंद्रपुर महानगरपालिका में पार्टी के 27 निर्वाचित सदस्यों में से 13 कांग्रेस पार्षदों द्वारा शुक्रवार को वडेट्टीवार और पार्टी की स्थानीय सांसद प्रतिभा धानोरकर में कथित गतिरोध के बीच एक समूह के रूप में खुद को पंजीकृत कराने की घटना के मद्देनजर आयोजित की गई थी।
ये 13 पार्षद धानोरकर के प्रति निष्ठा रखते थे। बाद में, वडेट्टीवार का समर्थन करने वाले शेष 14 पार्षद भी कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे और पंजीकरण का विरोध किया।
ऑनलाइन आयोजित बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया कि सीएमसी में कांग्रेस समूह के नेता का नाम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल द्वारा अंतिम रूप दिया जाएगा, जबकि महापौर और स्थायी समिति के संबंध में निर्णय सांसद धानोरकर के परामर्श से वडेट्टीवार द्वारा लिया जाएगा।
इस बैठक में कांग्रेस के महाराष्ट्र प्रभारी रमेश चेन्नितला, सपकाल, धानोरकर और वडेट्टीवार उपस्थित थे।
भाजपा ने सीएमसी में 23 सीटें जीती हैं, जबकि कांग्रेस को 27 सीटें प्राप्त हुई हैं। 66 सदस्यीय महानगरपालिका में सत्ता के लिए कम से कम 34 पार्षदों की आवश्यकता है।
विधानसभा में विधायक दल के नेता वडेट्टीवार ने कहा कि कांग्रेस पार्षदों के समूह के गठन को लेकर हाल में उत्पन्न हुई असमंजस की स्थिति के मद्देनजर कांग्रेस नेताओं ने चंद्रपुर की राजनीतिक स्थिति पर विस्तृत चर्चा की।
नागपुर में पत्रकारों से बातचीत में वडेट्टीवार ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस के व्यापक हित में ‘दो कदम पीछे’ लिए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘पार्टी नेता होने के नाते धैर्य रखना जरूरी है। चाहे कोई आपकी आलोचना करे या आपको गाली दे, आपको संगठन के लिए काम करते रहना चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि वह पिछले 25 वर्षों से कांग्रेस के लिए काम कर रहे हैं और हमेशा पार्टी के हित में ही निर्णय लेंगे।
वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि भाजपा ने पार्षदों को पैसे और पद देकर चंद्रपुर महानगरपालिका में सत्ता में आने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ पार्षदों को पाला बदलने के लिए एक करोड़ रुपये और पद की पेशकश की गई।
उन्होंने कहा, ‘महानगरपालिका में सत्ता में आने के लिए कांग्रेस और भाजपा दोनों को दूसरों के समर्थन की जरूरत है। सवाल यह है कि क्या पैसा और पद काम करेंगे, और क्या निर्दलीय उम्मीदवार इसके झांसे में आ जाएंगे।’
भाषा आशीष माधव
माधव


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