MP Professor News: ये तो गजब हो गया..! सरकारी कॉलेज में प्रोफेसर्स की लिस्ट हुई जारी, उसमें ऐसे नाम भी जो अब इस दुनिया में नहीं, कई तो…

MP Professor News: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में स्थित Jiwaji University से एक बड़ी प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है। जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय द्वारा सरकारी कॉलेजों के प्रोफेसरों की वर्ष 2026 की सीनियरिटी (वरिष्ठता) सूची जारी की गई

MP Professor News: ये तो गजब हो गया..! सरकारी कॉलेज में प्रोफेसर्स की लिस्ट हुई जारी, उसमें ऐसे नाम भी जो अब इस दुनिया में नहीं, कई तो…

jivaji university case/ image source: IBC24

Modified Date: March 11, 2026 / 08:12 am IST
Published Date: March 11, 2026 8:11 am IST
HIGHLIGHTS
  • जीवाजी यूनिवर्सिटी की बड़ी लापरवाही
  • वरिष्ठता सूची 2026 में गड़बड़ी
  • दो मृत प्रोफेसरों के नाम शामिल

Jiwaji University Gwalior: ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में स्थित Jiwaji University से एक बड़ी प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है। जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय द्वारा सरकारी कॉलेजों के प्रोफेसरों की वर्ष 2026 की सीनियरिटी (वरिष्ठता) सूची जारी की गई, लेकिन इस सूची में गंभीर गलती देखने को मिली। बताया जा रहा है कि जारी की गई वरिष्ठता सूची में दो  मृत और 14 रीटायरड प्रोफेसरों के नाम भी शामिल कर दिए गए। इस चूक के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

government college professors list: विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा आधिकारिक रूप से जारी

सूत्रों के अनुसार यह सूची विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा आधिकारिक रूप से जारी की गई थी, जिसमें सरकारी कॉलेजों में कार्यरत प्रोफेसरों की वरिष्ठता तय की गई थी। लेकिन जब संबंधित विभागों और शिक्षकों ने इस सूची को ध्यान से देखा तो पता चला कि कई ऐसे नाम भी दर्ज हैं जो या तो सेवानिवृत्त हो चुके हैं या जिनका निधन हो चुका है। खास बात यह है कि इन नामों को भी सक्रिय प्रोफेसरों की सूची में शामिल कर लिया गया। इस तरह की गलती ने प्रशासनिक जांच और दस्तावेजों की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

university administration negligence: सरकारी कॉलेजों के प्रोफेसरों की सूची में लापरवाही

वरिष्ठता सूची का इस्तेमाल पदोन्नति, पदस्थापना और कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसलों में किया जाता है। ऐसे में अगर सूची में ही त्रुटियां हों तो इसका असर कई शिक्षकों के अधिकारों और फैसलों पर पड़ सकता है। फिलहाल यह मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली को लेकर चर्चा तेज हो गई है और उम्मीद की जा रही है कि प्रशासन जल्द ही इस गलती को सुधारने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।

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लेखक के बारे में

पत्रकारिता और क्रिएटिव राइटिंग में स्नातक हूँ। मीडिया क्षेत्र में 3 वर्षों का विविध अनुभव प्राप्त है, जहां मैंने अलग-अलग मीडिया हाउस में एंकरिंग, वॉइस ओवर और कंटेन्ट राइटिंग जैसे कार्यों में उत्कृष्ट योगदान दिया। IBC24 में मैं अभी Trainee-Digital Marketing के रूप में कार्यरत हूँ।