चंद्रपुर महापौर चुनाव में हार की जांच के लिए समिति का गठन करेगी कांग्रेस
चंद्रपुर महापौर चुनाव में हार की जांच के लिए समिति का गठन करेगी कांग्रेस
मुंबई, 19 फरवरी (भाषा) कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई ने चंद्रपुर में महापौर पद के चुनाव में हार की जांच के लिए एक समिति गठित करने का फैसला किया है। चंद्रपुर में संख्या बल होने के बावजूद पार्टी महापौर पद हासिल करने में विफल रही। एक वरिष्ठ नेता ने यह जानकारी दी।
पार्टी नेता ने बुधवार को कहा कि महाराष्ट्र के प्रभारी एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) महासचिव रमेश चेन्निथला जल्द समिति का गठन करेंगे।
उन्होंने बताया कि राज्य कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार भी इस मामले की जांच के लिए सहमत हो गए हैं।
बुधवार को मुंबई में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की एक बैठक के दौरान वहां उपस्थित लोगों ने चंद्रपुर महापौर चुनाव में शिवसेना (उद्धव बाला साहेब ठाकरे) द्वारा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का समर्थन करने को लेकर चिंता व्यक्त की।
उन्होंने विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का कार्यकाल इस साल समाप्त होने के बाद उन्हें एमएलसी के रूप में फिर से निर्वाचित कराने के लिए कांग्रेस के समर्थन की उम्मीद पर भी आपत्ति जताई।
गुटों में बंटी कांग्रेस को उस समय भारी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा जब उसकी सहयोगी शिवसेना (उबाठा) और सत्तारूढ़ भाजपा के बीच अप्रत्याशित गठबंधन के परिणामस्वरूप 10 फरवरी को चंद्रपुर नगर निगम में भाजपा के महापौर का चुनाव हुआ, जबकि कांग्रेस इस पद पर दावा करने की स्थिति में थी।
भाजपा की संगीता खांडेकर ने कांग्रेस उम्मीदवार वैशाली महादुले को एक वोट से हराकर महापौर चुनाव जीता। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उबाठा) ने भाजपा को समर्थन दिया। शिवसेना (उबाठा) के पार्षद प्रशांत दानव उप महापौर चुने गए।
इस घटनाक्रम ने विपक्षी एकता और महा विकास आघाडी की व्यवहार्यता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं क्योंकि शिवसेना (उबाठा) एमवीए और विपक्षी दलों के ‘इंडिया’ गठबंधन (‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’) दोनों के भीतर कांग्रेस की एक प्रमुख सहयोगी है।
चंद्रपुर उन कुछ नगर निगमों में से एक है जहां कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और महापौर का पद हासिल करने की स्थिति में थी। हालांकि, विजय वडेट्टीवार और प्रतिभा धनोरकर के नेतृत्व वाले गुटों के बीच गहरे आंतरिक मतभेदों ने भाजपा को यह अवसर प्रदान कर दिया।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा-शप) अध्यक्ष शरद पवार की पार्टी एमवीए का घटक है। पवार का राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल में समाप्त हो रहा है और संसद के ऊपरी सदन के लिए द्विवार्षिक चुनावों की घोषणा बुधवार को की गई थी।
संयुक्त विपक्ष को विधायक कोटे से केवल एक राज्यसभा और एक विधान परिषद सीट ही मिल सकती है क्योंकि सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन को 288 सदस्यीय राज्य विधानसभा में 235 से अधिक विधायकों का भारी बहुमत प्राप्त है।
भाषा सुरभि रंजन
रंजन

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