न्यायालय ने सुरक्षा का हवाला देते हुए हवाई अड्डे के पास नमाज़ पढ़ने की इजाजत देने से इनकार किया

न्यायालय ने सुरक्षा का हवाला देते हुए हवाई अड्डे के पास नमाज़ पढ़ने की इजाजत देने से इनकार किया

न्यायालय ने सुरक्षा का हवाला देते हुए हवाई अड्डे के पास नमाज़ पढ़ने की इजाजत देने से इनकार किया
Modified Date: March 5, 2026 / 05:09 pm IST
Published Date: March 5, 2026 5:09 pm IST

मुंबई, पांच मार्च (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने रमजान के दौरान शहर के हवाई अड्डे के पास अब ढहाये जा चुके एक अस्थायी शेड में नमाज पढ़ने की इजाजत मांग रहे टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालकों को कोई राहत देने से इनकार करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि सुरक्षा धर्म से ऊपर है।

न्यायमूर्ति बी. पी. कोलाबावाला और न्यायमूर्ति फिरदौस पूनीवाला की पीठ ने कहा कि रमजान इस्लाम का जरूरी हिस्सा है, लेकिन इसे मानने वाले किसी भी जगह, खासकर हवाई अड्डे के आस-पास, जहां सुरक्षा को लेकर उच्च स्तर की चिंता है, नमाज पढ़ने का धार्मिक अधिकार होने का दावा नहीं कर सकते।

हवाई अड्डा सुरक्षा के पहलू पर बार-बार जोर देते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि वह सावधानी को नजरअंदाज नहीं करेगा।

अदालत टैक्सी-रिक्शा ओला-उबर मेन्स यूनियन की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दावा किया गया था कि छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आस-पास एक अस्थायी शेड पिछले साल अधिकारियों ने गिरा दिया था जहां वे नमाज पढ़ते थे।

याचिका में अनुरोध किया गया था कि उन्हें उसी जगह का इस्तेमाल करने दिया जाए या उसी इलाके में कोई दूसरी जगह दी जाए जहां वे नमाज पढ़ सकें।

इस मामले में अदालत ने पिछले हफ्ते पुलिस और हवाई अड्डा प्राधिकरण को यह देखने का निर्देश दिया था कि क्या कोई और जगह दी जा सकती है।

अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को रिपोर्ट जमा करते हुए कहा कि सात अन्य स्थलों का सर्वेक्षण किया गया, लेकिन भीड़, सुरक्षा चिंताओं और हवाई अड्डा विकास योजना संबंधी पहलुओं की वजह से, इनमें से कोई भी जगह याचिकाकर्ताओं के नमाज पढ़ने के लिए सही नहीं पाई गई।

अदालत ने रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद कहा कि वह याचिकाकर्ताओं को कोई राहत नहीं दे सकती, क्योंकि मुद्दा हवाई अड्डे की सुरक्षा से जुड़ा है।

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को कोई अन्य जगह तलाशनी होगी। उसने कहा कि उस स्थान से एक किलोमीटर के दायरे में एक मदरसा है जहां वे नमाज पढ़ सकते हैं।

उच्च न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को हवाई अड्डे के नजदीक नमाज पढ़ने की जगह नहीं दी जा सकती क्योंकि सुरक्षा संबंधी कारक हैं।

पीठ ने कहा कि जब सुरक्षा की बात आती है तो कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

भाषा वैभव पवनेश

पवनेश


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