अदालत ने कहा – पूरा मुंबई कचरे से पटा, गंदगी पर वार्ड के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी
अदालत ने कहा - पूरा मुंबई कचरे से पटा, गंदगी पर वार्ड के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी
मुंबई, 10 सितंबर (भाषा) देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की सड़कों पर जगह-जगह जमा हो रहे कचरे को लेकर मुंबई उच्च न्यायालय ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका को कड़ी फटकार लगाते हुये कहा कि “पूरा शहर गंदगी से भरा हुआ है” और चेतावनी दी कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो वह वार्ड के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करेगा।
कांजुरमार्ग कचरा निस्तारण स्थल के आसपास प्रदूषण के मुद्दे से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी एवं न्यायमूर्ति नीला गोखले की खंडपीठ ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) को कड़ी फटकार लगाई।
पीठ ने कहा कि ‘पूरी नगर निकाय व्यवस्था निष्क्रिय पड़ी हुई है।’
अदालत ने नगर निकाय को यह भी सलाह दी कि वह स्वच्छता का संदेश फैलाने के लिए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स का इस्तेमाल करे, जैसा कि कुछ समय पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सुझाव दिया था।
पीठ ने कहा, ‘हर जगह सिर्फ गंदगी ही दिखाई दे रही है। हम बीएमसी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। ऐसा लगता है कि व्यवस्था काम नहीं कर रही है। आपको एक उचित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनानी होगी। हम खुद को अंतरराष्ट्रीय शहर कैसे कह सकते हैं?’
अदालत ने कहा कि हालांकि नगर आयुक्त और वरिष्ठ अधिकारियों ने कुछ कदम उठाए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में ज्यादा सुधार नजर नहीं आ रहा है और ऐसा लगता है कि वार्ड अधिकारी काम नहीं कर रहे हैं।
इसने महाराष्ट्र सरकार को सुझाव दिया कि वह सड़कों पर कचरा फैलाने या फेंकने वालों पर भारी जुर्माना लगाने और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने पर विचार करे।
अदालत ने कहा, ‘यह एक गंभीर मामला है। यह बहुत पीड़ादायक स्थिति है। शहर में कुछ ऐसे स्थान चिन्हित हैं, जहां हमेशा कचरे के ढेर पड़े रहते हैं और फिर भी संबंधित वार्ड अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं करते।’
खंडपीठ ने कहा, ‘अब हम इन अधिकारियों को भी जवाबदेह और जिम्मेदार ठहराएंगे। इनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। पूरा शहर गंदगी से भरा हुआ है। अब बहुत हो चुका। बीएमसी हमें झूठे आश्वासन दे रही है।’
खंडपीठ ने कहा कि उसके पास अब बीएमसी आयुक्त को व्यवस्था दुरुस्त करने और जवाबदेही तय करने का निर्देश देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
खंडपीठ ने कहा, ‘ऐसा प्रतीत होता है कि पूरी नगर निकाय व्यवस्था निष्क्रिय पड़ी हुई है। किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती। अब हम कड़ा आदेश पारित करेंगे। हर चीज की एक सीमा होती है।’
अदालत ने बीएमसी को अपनी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) प्रस्तुत करने और 26 वार्डों में सड़कों की स्वच्छता एवं साफ-सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले सभी अधिकारियों की सूची भी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
उच्च न्यायालय ने कहा, ‘जिस क्षण हमें सड़क पर कोई कचरा या गंदगी दिखाई देगी, हम संबंधित अधिकारी को हटा देंगे। वे सार्वजनिक सेवा में बने रहने के योग्य नहीं हैं।’
इस मामले पर अगली सुनवाई अब सात अक्टूबर को होगी।
भाषा तान्या रंजन
रंजन

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