सरकार या मुख्यमंत्री की आलोचना करना राष्ट्र के खिलाफ युद्ध छेड़ना नहीं: पुणे की अदालत

सरकार या मुख्यमंत्री की आलोचना करना राष्ट्र के खिलाफ युद्ध छेड़ना नहीं: पुणे की अदालत

सरकार या मुख्यमंत्री की आलोचना करना राष्ट्र के खिलाफ युद्ध छेड़ना नहीं: पुणे की अदालत
Modified Date: July 15, 2026 / 09:23 am IST
Published Date: July 15, 2026 9:23 am IST

पुणे, 15 जुलाई (भाषा) पुणे की एक अदालत ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के एक पदाधिकारी को जमानत देते हुए कहा कि सरकार या मुख्यमंत्री की आलोचना करने मात्र को राष्ट्र के खिलाफ युद्ध छेड़ना नहीं माना जा सकता।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बी. डी. कुलकर्णी ने मंगलवार को राकांपा (शप) की सोशल मीडिया शाखा के प्रदेश अध्यक्ष महादेव बालगुडे की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि हर नागरिक को सरकार के कार्यों पर टिप्पणी करने, उसकी सराहना करने और उसकी आलोचना करने का अधिकार है।

महादेव बालगुडे को सोशल मीडिया पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की कथित रूप से छेड़छाड़ की गई तस्वीरें प्रसारित करने तथा नक्सलियों के प्रति सहानुभूति दर्शाने वाली सामग्री पोस्ट करने के आरोप में इस वर्ष अप्रैल में गिरफ्तार किया गया था।

उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 152 समेत अन्य धाराओं के तहत भी मामला दर्ज किया गया था। धारा 152 भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को जानबूझकर खतरे में डालने से संबंधित है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मामले से जुड़े दस्तावेजों से यह स्पष्ट होता है कि आरोपी ने कुछ मामलों की जांच प्रक्रिया और सरकार की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए थे। यह विषय सार्वजनिक विमर्श के दायरे में आते हैं।

अदालत ने कहा, ‘‘रिकॉर्ड में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि आरोपी ने राष्ट्र के खिलाफ युद्ध छेड़ने की घोषणा की, इसके लिए उकसाया या भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाला कोई कार्य किया।’’

न्यायाधीश ने यह भी कहा कि इस मामले में बीएनएस की धारा 152 लागू करना विवाद का विषय है। साथ ही आरोपी के खिलाफ लगाई गई अन्य सभी धाराएं जमानती प्रकृति की हैं।

अदालत ने कहा कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और पुलिस आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है इसलिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ की अब और आवश्यकता नहीं है।

अदालत ने बालगुडे को जमानत देते हुए 25,000 रुपये का निजी मुचलका भरने और एक या दो जमानतदार पेश करने का निर्देश दिया। अदालत ने उन्हें सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करने, गवाहों को प्रभावित नहीं करने, जांच अधिकारी को अपने आवास का पता और मोबाइल फोन नंबर देने तथा अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ने का भी निर्देश दिया।

सुनवाई के दौरान बालगुडे के वकील समीर शेख ने दलील दी कि यह मामला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि सरकार की आलोचना करना संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के अंतर्गत आता है।

भाषा शोभना सिम्मी

सिम्मी


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