‘अच्छे अंक’ और बीएससी की डिग्री जमानत का आधार नहीं हो सकते : अदालत

‘अच्छे अंक’ और बीएससी की डिग्री जमानत का आधार नहीं हो सकते : अदालत

‘अच्छे अंक’ और बीएससी की डिग्री जमानत का आधार नहीं हो सकते : अदालत
Modified Date: July 14, 2026 / 10:23 pm IST
Published Date: July 14, 2026 10:23 pm IST

मुंबई, 14 जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र के बीड जिले के मस्साजोग गांव के सरपंच संतोष देशमुख की हत्या के एक आरोपी की जमानत याचिका अदालत ने यह कहते हुए खारिज कर दी कि उसकी शैक्षणिक योग्यता या 10वीं-12वीं में अच्छे अंक किसी भी स्थिति में जमानत का आधार नहीं हो सकते।

अदालत ने कहा कि आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर समाज में दहशत फैलाने के उद्देश्य से इस अपराध को अंजाम दिया।

बीड जिले के मस्साजोग गांव के सरपंच संतोष देशमुख का नौ दिसंबर, 2024 को कथित तौर पर अपहरण करने और उन्हें यातनाएं देने के बाद उनकी हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि उन्होंने एक ऊर्जा कंपनी से कथित रंगदारी वसूली के प्रयास का विरोध किया था। इस नृशंस हत्या के बाद राज्यभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे।

इस मामले में आरोपियों पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका), अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

इस मामले में गिरफ्तार सात आरोपियों में से एक जयराम चाटे ने अपनी शैक्षणिक योग्यता का हवाला देते हुए जमानत की मांग की थी।

याचिका में उसने कहा कि उसने 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में अच्छे अंक प्राप्त किए हैं तथा वह बीएससी (कंप्यूटर साइंस) का स्नातक है।

अदालत ने जयराम की इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि ‘‘आरोपी के आपराधिक इतिहास की पृष्ठभूमि में उसकी शैक्षणिक योग्यता और परीक्षाओं में अच्छे अंक किसी भी स्थिति में उसे जमानत देने का आधार नहीं हो सकते।’’

विशेष न्यायाधीश जयश्री पुलाते ने 10 जुलाई को पारित आदेश में कहा कि प्रत्यक्षदर्शियों के बयान प्रथम दृष्टया यह स्थापित करते हैं कि सह-आरोपी वाल्मिक कराड के निर्देश पर चाटे एक संगठित अपराध गिरोह के सदस्य के रूप में सक्रिय रूप से इस अपराध में शामिल था।

शैक्षणिक योग्यता के अलावा चाटे ने अपनी याचिका में दावा किया कि उसने कोई अपराध नहीं किया और उसे गलत तरह से फंसाया गया है।

उसने कहा कि वह कथित गिरोह का सदस्य नहीं है और न ही गिरोह के सदस्य के रूप में किसी अवैध गतिविधि में शामिल रहा है।

अभियोजन पक्ष ने उसकी जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि चाटे शुरू से ही इस अपराध में शामिल था।

पुलिस ने अदालत को बताया कि आरोपियों ने संतोष देशमुख के साथ की गई बेरहमी से मारपीट का वीडियो इस इरादे से बनाया कि उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित कर समाज में दहशत फैलाई जा सके।

पुलिस के अनुसार एक वीडियो में चाटे कथित तौर पर जोर-जोर से हंसते हुए, सरपंच के कपड़े उतारते हुए, उसकी शर्ट पकड़ते हुए और मारपीट में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए दिखाई देता है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की सूची भी प्रस्तुत की है।

न्यायाधीश ने कहा कि ऐसे में आरोपी का यह तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता कि उसे कोई आर्थिक लाभ नहीं मिला, इसलिए मकोका के प्रावधान उस पर लागू नहीं होते।

अदालत ने कहा कि आरोपी ने अपने सह-आरोपियों के साथ मिलकर समाज में आतंक फैलाने के उद्देश्य से नृशंस और जानलेवा हमला किया।

अदालत ने कहा कि इन परिस्थितियों में आरोपी को जमानत दिए जाने का कोई आधार नहीं बनता।

भाषा रवि कांत रवि कांत वैभव

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