दाऊदी बोहरा उत्तराधिकार विवाद में फैसला सुनाने वाले पूर्व न्यायाधीश, परिवार को मिल रही हैं धमकियां

Ads

दाऊदी बोहरा उत्तराधिकार विवाद में फैसला सुनाने वाले पूर्व न्यायाधीश, परिवार को मिल रही हैं धमकियां

  •  
  • Publish Date - June 8, 2026 / 06:36 PM IST,
    Updated On - June 8, 2026 / 06:36 PM IST

मुंबई, आठ जून (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश गौतम पटेल और उनके परिवार को दाऊदी बोहरा समुदाय में उत्तराधिकार विवाद से जुड़े 2024 के उनके एक फैसले को लेकर भारत और ब्रिटेन में कथित तौर पर बार-बार धमकियां दी गई हैं।

पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, पिछले 10 महीनों के दौरान उन्हें कई हिंसक धमकियों वाले पत्र मिले हैं और सबसे हालिया पत्र लंदन में रहने वाली न्यायमूर्ति पटेल की बेटी को पांच जून को मिला था।

सूत्रों के मुताबिक, इन पत्रों में न्यायमूर्ति पटेल से यूट्यूब पर एक वीडियो जारी करके यह कहने की मांग की गई है कि उन्होंने सैयदना (समुदाय के आध्यात्मिक प्रमुख की उपाधि) से संबंधित मामले में फैसला “दबाव और मजबूरी” में दिया था।

पत्रों में पूर्व न्यायाधीश से उक्त फैसले के लिए माफी मांगने को भी कहा गया है।

गत पांच जून को उनकी बेटी को भेजे गए पत्र में हिंसा की चेतावनी दी गई थी और दावा किया गया था कि परिवार के खिलाफ एक ‘सुपारी’ दी गई है। जर्मनी की डाक मुहर वाले इस पत्र में एक डिजिटल स्टोरेज उपकरण भी शामिल था, जो अब लंदन पुलिस के कब्जे में है।

मुंबई बार एसोसिएशन ने सोमवार को एक प्रस्ताव पारित करके पूर्व न्यायाधीश और उनके परिवार को दी गई धमकियों की निंदा की तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

बार एसोसिएशन ने न्यायमूर्ति पटेल और उनके परिवार के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों से मामले की गहन जांच करके धमकी देने वालों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने का आग्रह किया।

चौबीस अप्रैल 2024 को न्यायमूर्ति पटेल की एकल पीठ ने सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन को दाऊदी बोहरा समुदाय को 53वें दाई-अल-मुतलक (धार्मिक प्रमुख) के रूप में मान्यता देते हुए उनके पक्ष में फैसला सुनाया था। अदालत ने कहा था कि उनकी ‘नास’ (उत्तराधिकार की नियुक्ति) वैध थी।

न्यायमूर्ति पटेल ने शुरुआत में 2014 में खुजैमा कुतुबुद्दीन द्वारा दायर उस वाद को खारिज कर दिया था, जिसे उन्होंने अपने भाई और तत्कालीन सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन के जनवरी 2014 में निधन के बाद दायर किया था। बुरहानुद्दीन के दूसरे पुत्र मुफद्दल सैफुद्दीन ने इसके बाद 53वें सैयदना का पद संभाला था।

कुतुबुद्दीन ने अपने मुकदमे में दावा किया था कि उसके भाई बुरहानुद्दीन ने उसे ‘मजून’ (अपना उत्तराधिकारी) नियुक्त किया था और गुप्त ‘नास’ (उत्तराधिकार) के माध्यम से निजी तौर पर उसे अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया था।

2016 में कुतुबुद्दीन के गुज़र जाने के बाद, उनके बेटे ताहिर फखरुद्दीन ने यह केस अपने हाथ में ले लिया और दावा किया कि उनके पिता ने उन्हें ये अधिकार दिए थे।

फैसले में न्यायमूर्ति पटेल ने कहा था कि वादी यह दिखाने के लिए कोई सबूत पेश नहीं कर पाए कि कुतुबुद्दीन को 52वें दाई-अल-मुतलक ने ‘नास’ दिया था।

न्यायमूर्ति गौतम पटेल 25 अप्रैल 2024 को सेवानिवृत्त हुए थे।

उत्तराधिकार संबंधी इस फैसले को बाद में संबंधित पक्ष ने उच्च न्यायालय की खंडपीठ में चुनौती दी, जहां मामला फिलहाल लंबित है।

भाषा अमित नरेश

नरेश