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मुंबई, आठ जून (भाषा) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार (राकांपा-शप) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने सोमवार को कहा कि महाराष्ट्र सरकार में मंत्री छगन भुजबल का नेतृत्व राज्य तक सीमित नहीं रहना चाहिए और अगर उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया गया होता, तो देश उनके संसदीय कौशल से लाभान्वित हो सकता था।
राष्ट्रीय स्तर पर भुजबल की महत्वाकांक्षाओं के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में सुले ने नयी दिल्ली में संवाददाताओं से कहा कि अगर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय के अनुभवी नेता (भुजबल) राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखना चाहते हैं, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
उन्होंने कहा, “अगर वह दिल्ली जाना चाहते हैं, तो इसमें गलत क्या है?”
सुले ने कहा कि राजनीतिक हलकों में भुजबल के लिए हमेशा से बहुत सम्मान रहा है। राकांपा (शप) नेता ने कहा कि लंबे समय से उनका मानना रहा है कि भुजबल के नेतृत्व को एक बड़े राष्ट्रीय मंच की आवश्यकता है।
सुले ने कहा, “भुजबल साहब का नेतृत्व केवल महाराष्ट्र तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। उनके नेतृत्व से पूरे देश को लाभ मिलना चाहिए।”
बारामती से सांसद सुले ने कहा कि अगर भुजबल राज्यसभा के लिए नामित किए जाते, तो भारत को एक प्रमुख राष्ट्रीय नेता मिल सकता था।
उन्होंने कहा, “संसद में भुजबल के बोलने का तरीका, उनके भाषण और विचार प्रभावशाली होते। अगर वह दिल्ली में नियमित रूप से सक्रिय रहते, तो एक मजबूत राष्ट्रीय नेतृत्व उभर सकता था।”
सुले ने संसद के उच्च सदन का सदस्य बनने की भुजबल की स्पष्ट इच्छा का जिक्र करते हुए कहा, “वह राज्यसभा जाना चाहते हैं।”
महाराष्ट्र के सबसे वरिष्ठ ओबीसी नेताओं में से एक भुजबल भविष्य की अपनी भूमिका और राष्ट्रीय राजनीति में संभावित पदोन्नति को लेकर अटकलों के केंद्र में रहे हैं।
भुजबल को महाराष्ट्र में राज्यसभा उपचुनाव के उम्मीदवारों की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा था। यह सीट उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के इस्तीफे के कारण खाली हो गई थी। राकांपा ने इसके लिए राजेंद्र जैन को मैदान में उतारा है।
भाषा राजकुमार नरेश पारुल
पारुल